नई दिल्ली: मणिपुर में जारी संकट के बीच नागा समुदाय ने शांति और स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। गुरुवार, 5 नवंबर को कामजोंग और उखरुल के संघर्ष प्रभावित जिलों में नागाओं ने विशाल रैलियां निकालीं। इस दौरान राज्य में जारी हिंसा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र सरकार को मणिपुर संकट को एक ऐतिहासिक समस्या के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने इस समस्या की मूल वजह अवैध कुकी घुसपैठ को बताया है। इसके अलावा, आदिवासी बहुल पहाड़ी क्षेत्रों और सत्ता के केंद्र माने जाने वाले गैर-आदिवासी बहुल इंफाल घाटी के बीच के भेदभाव को भी इस अशांति का प्रमुख कारण माना गया है।
इन रैलियों का आयोजन मणिपुर की सर्वोच्च नागा संस्था 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' के बैनर तले चार तांगखुल नागा संगठनों ने किया। नागा बहुल इन दोनों जिलों में एक साथ प्रदर्शन किए गए। संगठनों ने एक संयुक्त ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से इस गंभीर संकट को समाप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है।
संगठनों ने याद दिलाया कि मणिपुर में संघर्ष की शुरुआत मई 2023 में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हुई थी। लेकिन इस साल फरवरी में उखरुल जिले में एक नागा नागरिक पर हुए हमले के बाद यह विवाद कुकी-नागा संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि इसके बाद कुकी चरमपंथियों ने पहाड़ी इलाकों में नागा नागरिकों की हत्या, अपहरण और आगजनी की कई घटनाओं को अंजाम देकर हिंसा का एक नया मोर्चा खोल दिया।
ज्ञापन में दर्दनाक घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि अब तक 32 से अधिक नागा नागरिकों की हत्या की जा चुकी है। इनमें सबसे खौफनाक घटना 10 जून 2026 को सामने आई, जब अपहरण किए गए छह लियांगमई नागाओं के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए थे। हाल ही में 10 अक्टूबर 2026 को अजिनबौ रिंगकांगमई की बेहद क्रूरता से सिर काटकर हत्या कर दी गई।
मुख्य दोषियों को पकड़ने में प्रशासन की विफलता पर दुख जताते हुए तांगखुल संगठनों ने कहा कि मणिपुर के लिए यह संघर्ष नया नहीं है। उनका दावा है कि बर्मा से अवैध कुकी प्रवासियों की घुसपैठ और शरणार्थी नीतियों के कारण राज्य की जनसांख्यिकी में भारी बदलाव आया है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए संगठनों ने बताया कि वर्ष 1881 की जनगणना में राज्य में मात्र 73 कुकी गांव थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 1,878 हो गई है। आरोप है कि आदिवासी जमीनों और पहाड़ों पर कुकी उग्रवादियों द्वारा कब्जा कर अफीम की खेती की जा रही है।
नागा समूहों ने केंद्र सरकार से नागा क्षेत्रों के सैन्यीकरण को रोकने और वहां से अर्धसैनिक बल असम राइफल्स को हटाने की भी जोरदार मांग की है। इसके साथ ही, सभी कुकी शरणार्थियों और अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें एक तय समय सीमा के भीतर उनके मूल देश वापस भेजने की अपील की गई है।
संगठनों ने केंद्र को आगाह किया है कि कुकी समुदाय को कोई अलग होमलैंड, प्रशासनिक व्यवस्था या क्षेत्रीय परिषद न दी जाए। उनका मानना है कि इस तरह की किसी भी रियायत से नागाओं के पैतृक क्षेत्रों की अखंडता पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा।
ज्ञापन में 20 से अधिक कुकी चरमपंथी समूहों के साथ हुए 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' समझौते को रद्द करने की मांग रखी गई है। संगठनों ने इन गुटों के सदस्यों से हथियार छीनकर उन्हें गिरफ्तार करने और सभी आंतरिक विस्थापित व्यक्तियों को नागा आबादी वाले इलाकों से दूर बसाने का भी सख्त आग्रह किया है।
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