
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक बेहद दर्दनाक और शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। खैरगढ़ थाना क्षेत्र में सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता का शिकार हुई 16 वर्षीय दलित नाबालिग किशोरी ने छह दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 6 नवंबर की सुबह दम तोड़ दिया।
यह खौफनाक वारदात 31 अक्टूबर की शाम की बताई जा रही है। किशोरी शाम करीब सात-आठ बजे शौच के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी। बदहवास परिजनों ने अनहोनी की आशंका के चलते रातभर गांव और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की।
अगले दिन 1 नवंबर की सुबह गांव से लगभग 300 मीटर दूर तोरई के खेत में किशोरी अचेत और मरणासन्न अवस्था में पड़ी मिली। उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे और चेहरे, गर्दन व सिर पर गंभीर चोटों के निशान थे। गला दबाकर उसकी हत्या का प्रयास किया गया था। खेत के पास से गुजर रहे एक ग्रामीण ने उसके कराहने की आवाज सुनी, जिसके बाद पुलिस और परिजनों को सूचना दी गई।
परिजनों ने आरोप लगाया कि सामूहिक दुष्कर्म के बाद विरोध करने पर दरिंदों ने उसे बुरी तरह पीटा और मरा हुआ समझकर खेत में छोड़ दिया। गंभीर हालत को देखते हुए किशोरी को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहां वह बोलने की स्थिति में नहीं थी और उसकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। आखिरकार 6 नवंबर की सुबह इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
इस क्रूरता को लेकर पुलिस ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2), 109(1), पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की। जांच में तीन आरोपियों की पहचान की गई, जिनमें नगला सकटू निवासी सगे भाई ऋषि और जगत के अलावा एक अन्य युवक अभिषेक शामिल था।
दो नवंबर को पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ भी हुई। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों भाइयों के पैरों में गोली लगी। उनके पास से अवैध हथियार, कारतूस, एक बाइक और पीड़िता का मोबाइल बरामद किया गया।
अगले ही दिन, 3 नवंबर को तीसरे आरोपी अभिषेक को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) आदित्य लांग्हे ने बताया कि यह कार्रवाई खैरगढ़ पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने की है। आरोपियों के खिलाफ ऑपरेशन कनविक्शन के तहत सख्त पैरवी, गैंगस्टर एक्ट लगाने और संपत्ति कुर्की की तैयारी की जा रही है।
इस अमानवीय घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी उबाल ला दिया है। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने किशोरी के निधन से पहले परिजनों से बात की थी। उन्होंने 5 नवंबर को सोशल मीडिया पर लिखा था कि यह घटना बेहद गंभीर और शर्मनाक है। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने, परिवार को सुरक्षा और उचित आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई थी।
आम आदमी पार्टी ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। आप के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से खेत में बेसुध पड़ी पीड़िता का वीडियो साझा करते हुए लिखा गया कि मौजूदा राज में देश की बेटियां किसी भी कोने में सुरक्षित नहीं हैं। पार्टी ने 'बेटी बचाओ' के नारे को चुनावी जुमला करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
यह वारदात ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़े महिला सुरक्षा पर एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। मई 2026 में जारी 'क्राइम इन इंडिया 2024' की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के पूर्ण मामलों में उत्तर प्रदेश 66,398 दर्ज मुकदमों के साथ देश में सबसे ऊपर है। राज्य में दुष्कर्म के 3,209 मामले दर्ज किए गए।
अब पूरा देश यह देख रहा है कि फिरोजाबाद की इस मृतक बेटी को इन कड़े कानूनों और उच्च सजा दर के दावों के बीच कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है।
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