
मुंबई- देशभर में परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ जेन-जेड की नाराजगी जब सड़कों पर उतरी, तब दिल्ली के जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हफ्तों चले आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल पूरे देश के सामने रख दिया। जुलाई 20 को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग की घटनाओं ने इस गुस्से को और बढ़ा दिया। अब जब यह आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कुछ मांगों पर सहमति के बाद थमा है।
इसी पृष्ठभूमि में 6 अगस्त को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आईआईएमयूएन (India's International Movement to Unite Nations) के 15वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 15-19 वर्ष के करीब 2,000 छात्रों से संवाद करेंगे।
आईआईएमयूएन भारत का एक प्रमुख युवा संगठन और मंच है, जो मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN), नेतृत्व विकास कार्यक्रमों और सम्मेलनों का आयोजन करता है। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम “दुनिया को जोड़ने में युवाओं की भूमिका, भारतीय तरीका” थीम पर केंद्रित है। संस्थापक ऋषभ शाह ने कहा कि नेतृत्व सिर्फ मार्गदर्शन नहीं, सुनने का भी नाम है और इस महत्वपूर्ण समय पर यह संवाद जरूरी है। यह संवाद का कार्यक्रम इस पूरे संदर्भ में नई चर्चा का विषय बन गया है।
एनईईटी-यूजी सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया। परिणाम रद्द होने, दोबारा परीक्षा और दबाव के चलते कई छात्र आत्महत्या तक कर बैठे। सीजेपी ने जून 20 से जंतर मंतर पर धरना शुरू किया। मांगें साफ थीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई न हो और परीक्षा व्यवस्था में सुधार। देश के कई राज्यों में भी छात्रों ने समर्थन में प्रदर्शन किए। यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वसनीयता, युवाओं के भविष्य और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया।
जुलाई 20 को सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, अस्पतालों में भर्ती हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ज्यादती का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने बैरिकेड तोड़ने, पत्थरबाजी और सुरक्षा व्यवस्था भंग करने का दावा किया। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में नाबालिगों की रिहाई का आदेश दिया और पुलिस की कथित ज्यादतियों की स्वतंत्र जांच पर विचार किया। कई राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। ये घटनाएं युवाओं के मन में और गहरा आक्रोश छोड़ गईं।
जुलाई 25 को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस ले लिया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, एफआईआर वापस लेने और मुआवजे जैसी मांगों पर सहमति बनी। लेकिन कई युवा अब भी पूछ रहे हैं कि सिस्टम में बुनियादी बदलाव कितना होगा। पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून और एनटीए में सुधार की घोषणाएं हुईं, फिर भी विश्वास बहाली का काम बाकी है।
सीजेपी आंदोलन ने साबित किया कि आज का युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं, सड़क पर भी अपनी बात रखने को तैयार है। पेपर लीक जैसे मुद्दे पर उनका गुस्सा सिस्टम की नाकामी का आईना बना। पुलिस कार्रवाई ने इस गुस्से को और बढ़ाया। अब आरएसएस प्रमुख का युवाओं से सीधा संवाद खासकर इतने बड़े पैमाने पर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि राजनीतिक और सामाजिक संगठन जेन-जेड की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
कुछ इसे युवाओं तक पहुंच बनाने और उनकी आवाज सुनने की कोशिश बता रहे हैं। कुछ इसे आंदोलन के बाद युवाओं को वैकल्पिक नजरिया देने का प्रयास मान रहे हैं। असल परीक्षा यह होगी कि संवाद सिर्फ भाषण तक सीमित रहता है या युवाओं की वास्तविक चिंताओं परीक्षा की साख, रोजगार, शिक्षा सुधार और जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होती है।
जेन-जेड ने साफ कर दिया है कि वे सिर्फ सुनने को तैयार नहीं, जवाब भी मांगते हैं। 6 अगस्त का यह कार्यक्रम इसी नए राजनीतिक-सामाजिक माहौल में हो रहा है, जहां युवा सिर्फ श्रोता नहीं, सक्रिय भागीदार बन चुके हैं।
हर साल आईआईएमयूएन 108 कॉन्फ्रेंस और कई नागरिक जुड़ाव और सामुदायिक पहल आयोजित करता है, जिनका नेतृत्व पूरी तरह से 15-24 साल के युवा करते हैं और ये 11-19 साल के छात्रों के लिए होते हैं।
2011 में ऋषभ शाह द्वारा स्थापित आईआईएमयूएन एक पब्लिक अफेयर्स प्लेटफॉर्म है जो भारत के विचार को फैलाकर और भविष्य के नेताओं को आज ही जागरूक करके दुनिया को एकजुट करने के लिए समर्पित है। पिछले 15 वर्षों से, यह संगठन 15-24 साल के युवाओं द्वारा चलाया जा रहा है; इसमें भाग लेने वाले और आयोजन करने वाले कई लोग बाद में चुने हुए प्रतिनिधि, सिविल सर्वेंट, लेखक, वकील, अभिनेता और बिजनेस लीडर बने हैं।
संगठन के सलाहकार बोर्ड में अलग-अलग क्षेत्रों के जाने-माने लीडर्स शामिल हैं, जिनमें अजय पीरामल, दीपक पारेख, नादिर गोदरेज, डॉ. शशि थरूर, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, करण जौहर, सशस्त्र बलों के पूर्व प्रमुख और पी. टी. उषा आदि शामिल हैं।
अब अपने 15वें साल में, I.I.M.U.N. के कार्यक्रम भारत के 275 शहरों और 40 देशों में फैले हुए हैं, जो 7.5 करोड़ से ज़्यादा युवाओं तक पहुँचते हैं और 1,50,000 से ज़्यादा स्कूलों और कॉलेजों के साथ काम करते हैं। इन वर्षों में, संगठन ने दुनिया भर के 32 राष्ट्राध्यक्षों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, अकादमी पुरस्कार विजेताओं और 34,000 से ज़्यादा जाने-माने वक्ताओं और मशहूर हस्तियों की मेज़बानी की है।
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