एमपी में आजादी के दिन हक की रैली! सड़क-पुल-बिजली के लिए 40 KM पैदल चले ग्रामीण-बच्चे

स्वतंत्रता दिवस पर टटम गांव से शुरू हुआ आंदोलन, 15 किमी पैदल चलकर महाराजपुर पहुंचे प्रदर्शनकारी; बोले- नाला पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे
एमपी में आजादी के दिन हक की रैली! सड़क-पुल-बिजली के लिए 40 KM पैदल चले ग्रामीण-बच्चे
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भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था, वहीं छतरपुर जिले के महाराजपुर तहसील क्षेत्र के टटम गांव के ग्रामीण और बच्चे अपनी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। शनिवार को ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने गांव की सड़क, पुल और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें मजबूर होकर पैदल मार्च करना पड़ा।

ग्रामीण और बच्चे अपनी मांगों को लेकर टटम गांव से छतरपुर कलेक्टर कार्यालय के लिए करीब 40 किलोमीटर का पैदल मार्च शुरू करके निकले। बड़ी संख्या में बच्चे और ग्रामीण पैदल ही छतरपुर की ओर बढ़े। करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद प्रदर्शनकारी महाराजपुर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं को सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं और कलेक्टर से मुलाकात कर समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे।

स्कूल जाने के लिए नाला पार करते हैं बच्चे, बारिश में बढ़ जाता है खतरा

प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने अपनी सबसे बड़ी समस्या स्कूल आने-जाने के रास्ते को बताया। बच्चों के मुताबिक गांव से स्कूल जाने के रास्ते में एक बड़ा नाला पड़ता है। सामान्य दिनों में किसी तरह बच्चे इस रास्ते से निकल जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में नाले में पानी भर जाने के बाद स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। इसके बावजूद बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए इसी नाले को पार करना पड़ता है।

बच्चों ने बताया कि बारिश के दौरान नाले में पानी अधिक होने पर उन्हें अपने कपड़े उतारकर बैग में रखने पड़ते हैं और पानी के बीच से नाला पार करना पड़ता है। दूसरी तरफ पहुंचने के बाद बच्चे दोबारा कपड़े पहनकर स्कूल जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति केवल असुविधा की नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। उनका आरोप है कि लंबे समय से पुल की मांग किए जाने के बावजूद अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

पिछले साल नाला पार करते समय छात्रा की मौत का दावा

ग्रामीणों ने प्रदर्शन के दौरान एक बेहद गंभीर घटना का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि पिछले साल इसी नाले को पार करते समय एक छात्रा की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार हादसे के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि समय रहते नाले पर पुल बना दिया जाता तो बच्चों को जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से स्कूल जाने की मजबूरी नहीं रहती।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बारिश के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ने के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यही वजह है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए आंदोलन का रास्ता चुना।

तहसील परिसर के पास पुलिस बल तैनात, अधिकारी पहुंचे

महाराजपुर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने तहसील परिसर के पास पड़ाव डाल दिया। बड़ी संख्या में बच्चों और ग्रामीणों के पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया। स्थिति को देखते हुए एसडीएम, तहसीलदार और जनपद पंचायत नौगांव के सीईओ भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने और उनकी समस्याओं को सुनने का प्रयास किया।

हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि वे लंबे समय से सड़क, पुल और बिजली की समस्या झेल रहे हैं। अधिकारियों के समझाने के बावजूद ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचना चाहते हैं और कलेक्टर से मुलाकात किए बिना वापस नहीं लौटेंगे।

विधायक के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराजगी

प्रदर्शनकारियों की एक प्रमुख मांग यह भी थी कि महाराजपुर विधायक कामाख्या प्रताप सिंह 'टीका राजा' मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और बच्चों की समस्याएं सुनें। ग्रामीणों के मुताबिक वे चाहते थे कि विधायक स्वयं धरना स्थल पर आकर उनकी समस्याओं को समझें और उनके समाधान का भरोसा दें। हालांकि प्रदर्शनकारियों के अनुसार विधायक मौके पर उनसे मिलने नहीं पहुंचे।

ग्रामीणों ने अधिकारियों से विधायक से फोन पर बात कराने की मांग भी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि कम से कम उनकी विधायक से फोन पर बातचीत करा दी जाए, लेकिन उनकी यह मांग भी पूरी नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों और बच्चों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने सरकार तथा विधायक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

बारिश के बीच भी जारी रहा पैदल मार्च

प्रदर्शनकारियों का आंदोलन केवल तहसील परिसर तक सीमित नहीं रहा। बारिश के बावजूद ग्रामीण और बच्चे छतरपुर की ओर पैदल बढ़ते रहे। रात करीब 8 बजे तक प्रदर्शनकारी गढ़ीमलहरा तक पहुंच चुके थे और वहां से छतरपुर की ओर आगे बढ़ रहे थे। खराब मौसम और लंबी दूरी के बावजूद ग्रामीणों ने अपना पैदल मार्च जारी रखा।

पैदल मार्च के दौरान पुलिस बल भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद रहा। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश जारी रही, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर कायम रहे। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाता और कलेक्टर के सामने अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता, तब तक वे वापस गांव लौटने वाले नहीं हैं।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन

टटम गांव के ग्रामीणों ने आंदोलन के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क निर्माण की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या के कारण गांव के लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है।

दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग टपरन पुरवा से टटम तक पहुंचने के लिए पुल निर्माण की है। ग्रामीणों के मुताबिक इसी रास्ते में पड़ने वाला नाला स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। पुल बनने से बच्चों को नाले में उतरकर स्कूल जाने की मजबूरी खत्म हो सकती है और बारिश के दौरान आवागमन सुरक्षित हो सकेगा।

तीसरी मांग टटम के वार्ड नंबर 3 में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के इस हिस्से में बिजली की समस्या बनी हुई है और लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

कलेक्टर से मिलने पर अड़े ग्रामीण

ग्रामीणों और बच्चों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि वे अपनी समस्याएं लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचेंगे और कलेक्टर से मुलाकात करेंगे। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क, पुल और बिजली कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि गांव के लोगों और बच्चों की बुनियादी जरूरतें हैं।

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