MP लाड़ली बहनों पर सियासत की सख़्ती! मंत्रियों के बयानों से उठा डर का सवाल, अब राजस्व मंत्री ने मंच से धमकाया

मंच से दिए गए इस बयान ने प्रशासनिक मर्यादा और योजना के स्वैच्छिक स्वरूप पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
MP लाड़ली बहनों पर सियासत की सख़्ती! मंत्रियों के बयानों से उठा डर का सवाल, अब राजस्व मंत्री ने मंच से धमकाया
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भोपाल। मध्यप्रदेश की बहुचर्चित लाड़ली बहना योजना एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। मंत्री विजय शाह के बाद अब राज्य के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान सामने आया है, जिसे विपक्ष ने खुलेआम गरीब महिलाओं को डराने वाला करार दिया है। गुरुवार को सीहोर जिले की इछावर विधानसभा क्षेत्र के धामंदा गांव में नवीन उपस्वास्थ्य केंद्रों के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान मंत्री वर्मा ने मंच से ही अफसरों को निर्देश दे दिए कि एक दिन सभी लाड़ली बहनों को बुलाया जाए और जो महिलाएं नहीं आएं, उनका नाम सूची से काटकर रिपोर्ट भेजी जाए। मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सरकार खुद योजना की राशि बढ़ाने के वादे कर रही है और इसे महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बता रही है।

कार्यक्रम में मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि ग्राम धामंदा में 894 लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लोकार्पण कार्यक्रम में महिलाओं की मौजूदगी बेहद कम है। इसी नाराज़गी में उन्होंने सीईओ को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी लाभार्थी महिलाओं को बुलाया जाए और जो उपस्थित न हों, उनके नाम काटे जाएं।

मंच से दिए गए इस बयान ने प्रशासनिक मर्यादा और योजना के स्वैच्छिक स्वरूप पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने कांग्रेस शासन पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस के राज में बहनों को पैसा मिलता था क्या?” साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र करते हुए कहा कि दिल्ली से गेहूं भेजा जा रहा है, किसानों के खातों में पैसे डाले जा रहे हैं, फिर भी लोग ध्यान नहीं रखते। विपक्ष का कहना है कि इस तरह के बयान गरीब महिलाओं में भय पैदा करते हैं और योजना को ‘उपकार’ की तरह पेश करते हैं, जबकि यह उनका अधिकार है।

मंत्री विजय शाह ने भी दिया था विवादित बयान

इस विवाद की पृष्ठभूमि में मंत्री विजय शाह का रतलाम में दिया गया बयान भी है। 13 दिसंबर 2025 को एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था कि जिले में ढाई लाख लाड़ली बहनें हैं, सरकार 1500 रुपए के हिसाब से करोड़ों रुपए दे रही है, तो दो साल में एक बार धन्यवाद तो बनता है। उन्होंने यह भी कहा- “जो नहीं आएंगी, फिर देखते हैं… जिनके ढाई-ढाई सौ बढ़ रहे हैं, उनकी जांच करेंगे। किसी का आधार लिंक नहीं है तो जांच पेंडिंग कर देंगे।” इस बयान को भी विपक्ष ने धमकी भरा बताया और कहा कि सरकार योजनाओं को अधिकार नहीं, बल्कि एहसान की तरह पेश कर रही है।

दिलचस्प बात यह है कि एक ओर मंत्री स्तर पर कार्यक्रमों में न आने पर जांच और नाम काटने जैसी बातें कही जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री खुद योजना की राशि बढ़ाने के बड़े वादे कर रहे हैं। 17 दिसंबर 2025 को विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि विपक्ष को लाड़ली बहनों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां विपक्ष 3000 रुपए देने की बात कर रहा है, वहीं सरकार आगे चलकर लाड़ली बहनों को 5000 रुपए तक सहायता देगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि जब योजना को और मजबूत करने की बात हो रही है, तब मंत्रियों द्वारा मंच से दी जा रही सख्त चेतावनियां किस दिशा की ओर इशारा कर रही हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लाड़ली बहना योजना अब केवल सामाजिक कल्याण की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधा राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार योजना के लाभार्थियों से उपस्थिति और आभार की अपेक्षा कर रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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