MP: पदयात्रा से पहले गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर दो दिन से हैं पुलिस कस्टडी में! केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन होगा तेज

पुनर्वास, मुआवजा और जल-जंगल-जमीन के सवाल पर उभरा नया संघर्ष
MP: पदयात्रा से पहले गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर दो दिन से हैं पुलिस कस्टडी में! केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन होगा तेज
Published on

भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहा विरोध अब और तीखा हो गया है। 8 मई की रात सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को पन्ना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद आंदोलनकारी किसानों और आदिवासी परिवारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। यह गिरफ्तारी उस प्रस्तावित “न्याय अधिकार पदयात्रा” से कुछ घंटे पहले हुई, जिसे ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले निकाला जाना था। आंदोलनकारी इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं।

भटनागर लंबे समय से केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित गांवों के लोगों के साथ खड़े रहे हैं। वे लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि परियोजना के कारण हजारों लोगों की जमीन, जंगल, आजीविका और सामाजिक अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है, जबकि पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका आरोप है कि ग्राम सभाओं की वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए बिना भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया।

केन-बेतवा आंदोलन में अमित भटनागर
केन-बेतवा आंदोलन में अमित भटनागर Internet

गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर भावुक संदेश

गिरफ्तारी के तुरंत बाद अमित भटनागर ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि उन्हें कुपिया क्षेत्र से बिजावर थाना प्रभारी द्वारा हिरासत में लेकर पन्ना ले जाया जा रहा है। उन्होंने लिखा, “मुझे जेल में सड़ा दो, फांसी पर लटका दो, लेकिन आंदोलन कमजोर मत होने देना। मुझे अपने जल, जंगल, जमीन, हजारों लोगों की जिंदगी, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने पर गर्व है।”

उन्होंने अपनी गैरमौजूदगी में आंदोलन जारी रखने की जिम्मेदारी गांव स्तर की संघर्ष समितियों और बिजावर वार्ड क्रमांक 9 की पार्षद दिव्या अहिरवार सहित स्थानीय महिला नेतृत्व को सौंपी। गिरफ्तारी के बाद डूब क्षेत्र के गांवों में विरोध और आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब आंदोलन और बड़े स्तर पर किया जाएगा।

कब कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

फरवरी 2026 से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक होता गया फरवरी महीने में दौधन और पलकोहा गांव की महिलाओं ने मुआवजे और सर्वे में गड़बड़ियों को लेकर बांध निर्माण स्थल पर प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलनकारियों का आरोप था कि जमीनों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया और कई परिवारों को सूची से बाहर रखा गया।

8 फरवरी को प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से एक महीने का समय मांगते हुए नए सर्वे का आश्वासन दिया, लेकिन अगले ही दिन अमित भटनागर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 के तहत गैरकानूनी जमावड़े के आरोप में हिरासत में ले लिया गया। इसके विरोध में 10 फरवरी को हजारों ग्रामीण बिजावर तहसील कार्यालय पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने भीड़ पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज भी हुआ, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी प्रभावित हुए। 12 फरवरी को रिहा होने के बाद भटनागर ने जिला प्रशासन से सभी एफआईआर की प्रमाणित प्रतियां और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की।

आंदोलन करते आदिवासी किसान एवं ग्रामीण
आंदोलन करते आदिवासी किसान एवं ग्रामीण

मार्च और अप्रैल में आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप

11 और 12 मार्च को हजारों किसान और आदिवासी ग्रामीण पन्ना कलेक्ट्रेट तक मार्च करते हुए पहुंचे। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और लाठीचार्ज की खबरें सामने आईं। हालांकि प्रशासन ने बाद में लिखित आश्वासन दिया कि पांच दिनों के भीतर भूमि अधिग्रहण, ग्राम सभा और मुआवजे से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि वादे लागू नहीं किए गए।

अप्रैल में आंदोलन और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल, प्रतीकात्मक चिता आंदोलन और प्रतीकात्मक फांसी प्रदर्शन जैसे विरोध कार्यक्रम किए। कई गांवों में महिलाओं ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। रुंझ बांध निर्माण स्थल पर लगातार धरना जारी रहा।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रभावित ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास की है। दौधन क्षेत्र के ग्रामीण प्रत्येक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान मुआवजा राशि जमीनों की वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले बहुत कम है।

ग्रामीण यह भी मांग कर रहे हैं कि परिवार के सभी वयस्क सदस्यों, विशेषकर बेटियों और महिलाओं, को अलग परिवार इकाई मानते हुए मुआवजा दिया जाए। महिलाओं का कहना है कि यदि पूरा पैसा केवल पुरुषों को दिया गया तो उनके और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा नहीं रहेगी।

इसके अलावा आंदोलनकारी ग्राम सभा की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून और वनाधिकार कानून के तहत जरूरी सहमति प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। कई गांवों का दावा है कि उनकी वास्तविक ग्राम सभाएं कभी हुई ही नहीं और दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए।

सरकार का पक्ष और नई समितियां

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी और पेयजल संकट कम होगा। सरकार के अनुसार मझगाय और रुंझ परियोजनाओं से 86 गांवों की लगभग 27,510 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब 45 हजार किसान परिवारों को लाभ मिलेगा।

22 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ग्रामीण भूमि अधिग्रहण मुआवजे के गुणक को बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत अब किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना तक मुआवजा मिल सकेगा।

इसके बाद 4 मई को राज्य सरकार ने विस्थापन और पुनर्वास संबंधी शिकायतों की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित की। लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि पहले भी कई समितियां और आश्वासन दिए गए, जिनका जमीन पर असर नहीं दिखा।

अब भी कायम हैं कई बड़े सवाल

अमित भटनागर की गिरफ्तारी ने इस पूरे आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। एक ओर सरकार परियोजना को बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण इसे अपने अस्तित्व, संस्कृति और अधिकारों पर संकट मान रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या ग्राम सभा की वैधानिक प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हुई? क्या मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप है? क्या विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास मिलेगा? और क्या प्रशासन वे सभी दस्तावेज सार्वजनिक करेगा, जिनकी मांग ग्रामीण महीनों से कर रहे हैं?

फिलहाल रुंझ बांध निर्माण स्थल पर काम बंद है, जबकि दौधन बांध पर निर्माण दोबारा शुरू हो चुका है। गांवों में आंदोलन जारी है और प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा।

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ परियोजना है। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने के लिए केन नदी का पानी बेतवा नदी तक पहुंचाना है। परियोजना के पहले चरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर दौधन बांध का निर्माण किया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जब बांध अपनी पूर्ण जलभराव क्षमता 288 मीटर तक पहुंचेगा, तब लगभग 9 हजार हेक्टेयर भूमि डूब क्षेत्र में आ जाएगी। इसमें 5,258 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। परियोजना से 10 गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

इसके अलावा मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना और रुंझ नदी परियोजना को लेकर भी विवाद और विरोध जारी है। मझगाय परियोजना से आठ गांव प्रभावित हो रहे हैं, जबकि रुंझ परियोजना से पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के विश्रामगंज और भुजबई गांव प्रभावित हैं।

MP: पदयात्रा से पहले गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर दो दिन से हैं पुलिस कस्टडी में! केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन होगा तेज
TM Ground Report छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना को लेकर टकराव तेज! एक ओर ‘मिट्टी सत्याग्रह, दूसरी ओर सहमति से हटाने का दावा
MP: पदयात्रा से पहले गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर दो दिन से हैं पुलिस कस्टडी में! केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन होगा तेज
मध्य प्रदेश: केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में 'चिता आंदोलन', चिताओं पर लेटकर आदिवासी महिलाओं ने किया प्रदर्शन
MP: पदयात्रा से पहले गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर दो दिन से हैं पुलिस कस्टडी में! केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन होगा तेज
MP के खंडवा में वन भूमि पर कब्जा हटाने गई टीम से टकराव! आदिवासियों का आरोप- चार पीढ़ियों से खेती, 4 घंटे में उजाड़ दी बस्ती

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com