
भोपाल: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर आदिवासी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को मुख्य रूप से महिलाओं ने इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के खिलाफ अनोखा और कड़ा विरोध दर्ज कराया। अपनी आखिरी सांस तक पीछे न हटने का संकल्प लेते हुए इन ग्रामीणों ने प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन किया।
इस 'चिता आंदोलन' की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लिए चिता पर लेटी नजर आ रही हैं। उनका साफ कहना है कि उन्हें या तो न्याय चाहिए या फिर मौत। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश की, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और तीखी नोकझोंक के बाद पुलिसकर्मियों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
प्रशासन पर लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका दावा है कि जमीन, जंगल के अधिकार और विस्थापन से जुड़ी उनकी बुनियादी चिंताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने हकों की इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देंगे।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का मुख्य उद्देश्य केन नदी बेसिन का पानी बेतवा बेसिन के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाना है। इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत दौधन बांध और 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबा नहर नेटवर्क बनाया जाना है। इसके साथ ही सिंचाई और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना से 10 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी और करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा। इसके अलावा बिजली उत्पादन भी किया जा सकेगा। यह योजना मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त जिलों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसे कई वर्षों में विभिन्न चरणों के तहत पूरा किया जाना है।
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व स्थानीय आदिवासी महिलाओं के साथ-साथ जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर कर रहे हैं। भटनागर ने साफ किया है कि महिलाओं का यह चिता प्रदर्शन शुक्रवार को भी लगातार जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इससे पहले उन्हें अपनी मांगें रखने के लिए दिल्ली जाने से भी रोक दिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन ने रास्ते बंद कर दिए और उनकी बस्तियों में राशन-पानी की आपूर्ति भी बाधित की गई। इसके अलावा उन्होंने लगातार धमकियां मिलने की बात भी कही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पन्ना और छतरपुर के कुछ हिस्सों में बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इससे प्रदर्शन स्थलों के आसपास लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लग गई है।
तमाम पाबंदियों और सख्ती के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने हार नहीं मानी है। उन्होंने अपने आंदोलन का एक हिस्सा केन नदी के बीचोबीच स्थानांतरित कर दिया है। पन्ना और छतरपुर के किसान अपने-अपने जिलों की सीमा में रहकर नदी के दोनों किनारों से लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि किसी भी तरह की आवाजाही को रोकने के लिए सभी पहुंच मार्गों पर पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों की भारी तैनाती की गई है।
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