SIR Fraud: सांसद साकेत गोखले ने बताया क्यों मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को होनी चाहिए जेल

गोखले के अनुसार SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने एक रहस्यमयी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर 2002 की पुरानी बंगाली मतदाता सूची को AI से अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया।
TMC सांसद साकेत गोखले ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत और फ्रॉड का विस्तार से खुलासा किया।
TMC सांसद साकेत गोखले ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत और फ्रॉड का विस्तार से खुलासा किया।
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नई दिल्ली- तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ने और BJP को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। गोखले ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस साजिश के लिए जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत और फ्रॉड का विस्तार से खुलासा किया।

गोखले के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने एक रहस्यमयी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर 2002 की पुरानी बंगाली मतदाता सूची को AI से अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया। इस गलत AI अनुवाद की वजह से नाम जैसे “অমিত” को “O-mit” कर दिया गया, जबकि सही अनुवाद “Amit” होना चाहिए था। नतीजतन, नामों के स्पेलिंग मैच न करने पर 1.67 करोड़ मतदाताओं को “logical discrepancy” का निशान लगा दिया गया। बाद में इनमें से 95 लाख मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए गए।

ECI ने केंद्र सरकार के अधिकारियों को माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किया, जिनका असली काम सुनवाई की निगरानी करना था। लेकिन इन अधिकारियों को गैरकानूनी रूप से मतदाताओं को डिलीट करने की शक्ति दे दी गई। गोखले का आरोप है कि चुनाव अधिकारियों को किनारे कर इन माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को “WhatsApp ऑर्डर” के जरिए अवैध पावर सौंपी गई, जो कभी आधिकारिक तौर पर जारी ही नहीं किए गए।

जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने इन माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को हटा दिया और बंगाल के मौजूदा व रिटायर्ड जजों को सुनवाई सौंपी। इन जजों को 28 फरवरी तक 95 लाख सुनवाइयां पूरी करनी थीं। लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इतनी सुनवाइयां करने में कम से कम 3 महीने लगेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा और झारखंड के जजों को भी लगाने का फैसला किया।

साकेत गोखले ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा फ्रॉड ये है कि SIR जो सामान्यतः 8 महीने लेती है, उसे मात्र 3 महीने में निपटा दिया गया। पहले AI सॉफ्टवेयर से 1.67 करोड़ मतदाताओं को डिलीट करने की कोशिश की गई। जब ये नहीं हुआ तो BJP-समर्थक माइक्रो-ऑब्जर्वर्स के जरिए अवैध तरीके से डिलीट करने की साजिश रची गई।

गोखले ने कहा, “आज बंगाल में 80 लाख वैध मतदाता सिर्फ ECI की manipulation और गलत सॉफ्टवेयर की वजह से तीन दिनों में सुनवाई के खतरे में हैं। ये सुनवाइयां पूरी नहीं हो पाएंगी और लाखों वोटर डिलीट हो सकते हैं।”

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद ही अदालत को दखल देना पड़ा। गोखले ने कहा, “समझौता कर चुके ECI और अमित शाह के CEC ज्ञानेश कुमार ने भारत की चुनावी प्रक्रिया को नष्ट करने की कोशिश की है। इसलिए ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाना चाहिए।”

TMC सांसद साकेत गोखले ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत और फ्रॉड का विस्तार से खुलासा किया।
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