भोपाल में किसान महाचौपाल: राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, ट्रेड डील को बताया “देश बेचने की डील"

सभा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से ट्रेड डील की शर्तों को सार्वजनिक करने, संसद में विस्तृत चर्चा कराने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
भोपाल में किसान महाचौपाल: राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, ट्रेड डील को बताया “देश बेचने की डील"
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को कांग्रेस द्वारा आयोजित किसान महा चौपाल में उस समय राजनीति तापमान बढ़ गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि यह डील देश और किसानों के हितों के खिलाफ है और इसे दबाव में किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पर एपस्टीन और अडाणी से जुड़े मामलों का दबाव है, जिसके चलते उन्होंने “हिंदुस्तान और किसानों का डेटा अमेरिका को बेच दिया।” राहुल ने इसे देश के इतिहास की अभूतपूर्व घटना बताते हुए कहा कि पहली बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में चीन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि वे लोकसभा में चीनी घुसपैठ पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका गया। उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का हवाला देते हुए कहा कि जब चीनी घुसपैठ हुई थी, तब सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया। राहुल ने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर प्रश्न है, जिस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी।

राहुल गांधी के भाषण की पांच बड़ी बातें

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने बिना कैबिनेट से सलाह लिए अमेरिका से डील की। उनके अनुसार, लोकसभा से निकलते ही प्रधानमंत्री ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन कर डील के लिए तैयार होने की बात कह दी। राहुल ने इसे संसदीय परंपराओं और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की अनदेखी बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में सोया, कपास और भुट्टा बेचने की छूट देने की तैयारी कर ली है, जिससे भारतीय किसानों को सीधा नुकसान होगा। राहुल के अनुसार, यह समझौता किसानों और देश के हितों से समझौता है।

राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील दबाव और धमकी के कारण की गई। उन्होंने एपस्टीन फाइल और अडाणी से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से सरकार अमेरिका के सामने झुकी।

उनका कहना था कि इस डील से भारत को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि भारत को ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा और हर साल अमेरिका से भारी मात्रा में सामान खरीदना पड़ेगा।

राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका से सस्ता कपास और अन्य कृषि उत्पाद भारत आएंगे, तो देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और स्थानीय उद्योगों पर गंभीर खतरा मंडराएगा, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे।

खड़गे का हमला: “मोदी ने किसानों के साथ छल किया”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी “सरेंडर मोदी” हैं और उन्होंने देश को बेच दिया है। खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री रोज ‘चाय पर चर्चा’ करते थे, तो क्या देश बेचने की बात करते थे? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर नाम बदलना ही राजनीति है, तो प्रधानमंत्री को अपना नाम भी बदल लेना चाहिए, क्योंकि उनका जन्म कांग्रेस शासनकाल में हुआ था।

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ट्रम्प के खिलाफ मजबूती से अपनी बात नहीं रख पाते और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दबाव में फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भारत को व्यापार में लाभ होता था, लेकिन अब नीतियां ऐसी बनाई जा रही हैं जिससे किसानों और देश को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

‘सिंदूर ऑपरेशन’ का जिक्र करते हुए खड़गे ने दावा किया कि ट्रम्प ने खुद कहा कि उन्होंने ऑपरेशन रुकवाया। खड़गे के अनुसार, प्रधानमंत्री ने दबाव में ऑपरेशन रोककर बड़ी गलती की।

अटल पथ पर सुबह से जुटने लगे किसान

किसान महा चौपाल के लिए सुबह से ही भोपाल के अटल पथ पर प्रदेशभर से किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता जुटने लगे थे। कांग्रेस के साथ-साथ किसानों के अन्य संगठनों के नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में पहुंचे। सभा स्थल पर अलग-अलग जिलों से आए किसानों की मौजूदगी ने इसे व्यापक जनसमर्थन का स्वरूप दिया।

‘द मूकनायक’ ने ग्राउंड पर मौजूद किसानों से बातचीत की। यहां कई अलग-अलग तरह की तस्वीरें देखने को मिलीं। उज्जैन के एक कांग्रेस नेता गले में आलुओं की माला और हाथ में गेहूं की बाल लेकर सभा स्थल पर पहुंचे, जो किसानों की उपज और उनकी मौजूदा स्थिति का प्रतीक बन गया। वहीं मध्य प्रदेश के शाजापुर और आगर मालवा जिलों से कुछ किसान बैलगाड़ी लेकर सभा स्थल पहुंचे, जो पारंपरिक कृषि संस्कृति और विरोध के अनोखे तरीके को दर्शा रहा था।

किसान चौपाल में मौजूद लोगों ने ‘द मूकनायक’ से बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हित में नहीं है। उनका कहना था कि यदि सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आएंगे तो स्थानीय किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा। कुछ किसानों ने इसे “डेड डील” करार देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

सभा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से ट्रेड डील की शर्तों को सार्वजनिक करने, संसद में विस्तृत चर्चा कराने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। किसान महा चौपाल ने साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।

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