
नई दिल्ली: मणिपुर के इंफाल-उखरुल रोड पर शुक्रवार को एक बड़ी हिंसक घटना सामने आई है। यहां सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में आगे बढ़ रहे मालवाहक ट्रकों के काफिले पर अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इस भीषण गोलीबारी में पश्चिम बंगाल के रहने वाले एक ट्रक ड्राइवर की जान चली गई, जबकि एक पुलिस कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गया।
यह दर्दनाक घटना सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर लीनगांगचिंग और टीएस कासोम के बीच घटी। यह इलाका उखरुल जिले के लीतान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। हमले के वक्त ट्रकों का यह काफिला उखरुल जिला मुख्यालय की ओर जा रहा था।
इस वारदात में जान गंवाने वाले ड्राइवर की पहचान 57 वर्षीय नीतीश कुमार के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के निवासी थे। वहीं, घायल जवान इंफाल पश्चिम जिले के रहने वाले 35 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल दिसिंगम मारिंगमेई हैं।
उखरुल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चावल और ईंधन जैसी जरूरी चीजें ले जा रहे कई ट्रक पिछले कुछ दिनों से इंफाल ईस्ट के याइंगंगपोकपी में फंसे हुए थे। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में नागा और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच चल रहे भारी तनाव के कारण कुकी समूहों ने नाकेबंदी कर रखी थी, जिससे इन मालवाहक वाहनों का आगे बढ़ना नामुमकिन हो गया था।
शुक्रवार को स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को बुलाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की कड़ी सुरक्षा में ट्रकों को आगे बढ़ाया गया। लेकिन इसी बीच रास्ते में काफिले को निशाना बनाते हुए यह घातक हमला कर दिया गया।
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों द्वारा मालवाहक वाहनों पर किया गया कायराना हमला करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऐसे ड्राइवर की हत्या करना जो राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है, बेहद शर्मनाक कृत्य है। उनका मानना है कि यह साजिश राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के सरकारी प्रयासों को विफल करने के इरादे से रची गई है।
गौरतलब है कि मणिपुर में 13 मई से ही हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। उस दिन कांगपोकपी जिले में यात्रा कर रहे थडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के तीन चर्च नेताओं की घात लगाकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के तुरंत बाद हिंसा भड़क उठी और कुकी तथा नागा समूहों ने एक-दूसरे के ग्रामीणों का अपहरण करना शुरू कर दिया।
यह स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां अपहरण किए गए 6 नागा पुरुष अभी भी लापता हैं, जबकि 14 कुकी लोगों को बंधक बनाकर रखा गया है।
शुक्रवार को जिस इलाके में यह हमला हुआ, वहां इस साल फरवरी से ही स्थानीय तांगखुल नागा और कुकी समुदाय के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। उखरुल मुख्य रूप से तांगखुल नागा बहुल जिला है, लेकिन इस क्षेत्र में कई कुकी गांव भी मौजूद हैं। पिछले साल फरवरी में भी इसी राजमार्ग पर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उखरुल जा रहे नागरिक वाहनों पर बिल्कुल ऐसा ही हमला किया था, जिसमें दो आम नागरिकों की जान चली गई थी।
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