नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को हालात उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब कुकी-ज़ो समुदाय के लोगों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। भारी संख्या में लोग कांगपोकपी और इंफाल वेस्ट जिले की सीमा पर जमा हो गए और राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के जरिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को तुरंत बहाल करने की मांग करने लगे।
यह पूरा विवाद नागा समूहों द्वारा पिछले डेढ़ महीने से जारी 'आर्थिक नाकेबंदी' का नतीजा है। इस सख्त नाकेबंदी के कारण कुकी-ज़ो बहुल इलाकों में राशन और अन्य जरूरी सामानों की एंट्री पूरी तरह से बंद हो गई है। कुकी-ज़ो बहुल कांगपोकपी जिला इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। जिले में सामान लाने वाले दोनों मुख्य रास्तों को नागा बहुल सेनापति जिले और राज्य की राजधानी में रोक दिया गया है, जिससे समुदायों के बीच की खाई और भी गहरी हो गई है।
अपने इसी विरोध को जताने के लिए मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने कांगपोकपी जिले के गामगीफाई से आगे उस 'बफर जोन' की ओर मार्च किया, जो मैतेई और कुकी-ज़ो आबादी वाले क्षेत्रों के बीच स्थित है। मई 2023 में भड़की हिंसा के बाद से ही इस संवेदनशील इलाके में सुरक्षाबलों का भारी पहरा रहता है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसी इलाके में उनके जरूरी सामानों के ट्रकों को रोका जा रहा है। जब भीड़ ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई। हालात बिगड़ते देख जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने और उन्हें 'बफर जोन' पार करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
मंगलवार के इस बड़े प्रदर्शन का आह्वान कुकी-ज़ो संगठन 'कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी' (CoTU) ने किया था। दरअसल, इस संगठन ने 27 जून को केंद्र और मणिपुर सरकार को हाईवे पर सामानों की आवाजाही बहाल करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।
संगठन ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर सोमवार तक यह नाकेबंदी नहीं हटाई गई, तो वे आम जनता के अधिकारों, हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कड़े और एहतियाती लोकतांत्रिक कदम उठाने को मजबूर होंगे।
गौरतलब है कि मणिपुर में जारी इस लंबे संघर्ष और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हाईवे जाम करना एक आम बात हो गई है। अतीत में कांगपोकपी में कुकी-ज़ो समूहों ने भी कई बार दबाव बनाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल किया है। लेकिन अब यह पूरी लड़ाई एक त्रिकोणीय संघर्ष में बदल चुकी है।
राज्य में जहां एक तरफ कुकी-ज़ो और मैतेई समुदाय आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी तरफ कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच भी गहरा टकराव पैदा हो गया है। इस बहुआयामी लड़ाई के कारण कांगपोकपी में रहने वाले लोग खुद को भौगोलिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग और संकट में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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