
चेन्नई- मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास की पृष्ठभूमि और पहचान की जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि सौरव का वास्तविक नाम 'योगेश शर्मा उर्फ सौरव दास' है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में उनके माता-पिता के नाम, पते और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। याचिका में न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के आधार पर उनके सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने की भी मांग की गई है।
चीफ जस्टिस एस.ए. धर्मधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (चेन्नई), UIDAI अध्यक्ष, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा एक्स और इंस्टाग्राम के शिकायत अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए मामले को स्थगित कर दिया।
आपको बता दें, दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। इसके बावजूद, 13 अक्टूबर की सुबह सीजेपी (CJP) नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने समर्थकों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वहां पहुंचे। पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को तोड़ते हुए ये जंतर-मंतर के बंद गेट और बैरिकेड्स फांदकर अंदर घुस गए और वहां तिरंगा लहराया व नारेबाजी की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
दिल्ली पुलिस ने उन पर पहले दिए गए 'पीस बॉन्ड' (शांति नियम) की शर्तों के उल्लंघन और प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन घुसने का आरोप लगाया। इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था, जिसे बाद में 2 दिन के लिए और बढ़ा दिया गया था और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी।
लगभग 9 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद, 21 अक्टूबर 2026 को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उनके मुचलके (Sureties) स्वीकार करते हुए दोनों नेताओं को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया और वे जेल से बाहर आ चुके हैं।
SEM Court में शांति बांड मामले के दौरान भी उनके दिल्ली स्थित निवास के रेंट एग्रीमेंट या पक्के पते के सबूत न होने को लेकर सोशल मीडिया पर दावे किए गए थे, जिसे लेकर सौरव दास ने इन आरोपों को खारिज किया था।
कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार ने दायर याचिका में सरकार से सौरव दास की पृष्ठभूमि की विस्तृत, निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द किया जाए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सौरव दास ने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के जजों और न्यायपालिका के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और अवमाननाजनक टिप्पणियां की हैं, इसलिए MeitY को निर्देश देने की मांग है कि सौरव दास के इंस्टाग्राम और एक्स हैंडल ब्लॉक किए जाएं तथा उन्हें न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक बयान देने से रोका जाए।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बी. जगन्नाथ ने अदालत में दलील दी कि सौरव दास न्यायपालिका के बारे में जिस तरीके से बोलते हैं, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए यह याचिका दायर की गई।
CJP के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरने के बाद सौरव दास की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि और परिवार पर सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठे थे। विशेष रूप से उनके पिता के नाम और पहचान को लेकर चर्चा हुई।
कुछ रिपोर्टों और ऑनलाइन चर्चाओं में पुदुचेरी के चुनावी रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम सुबीर दास बताया गया। राजनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर-मित्रा ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सौरव दास के जैविक पिता नेपाली नागरिक थे और उपनाम गोद लिए गए पिता से आया। ये आरोप सत्यापित नहीं हैं।
कुछ अन्य रिपोर्टों में उनके परिवार के पुदुचेरी से जुड़ाव की बात कही गई है। अगस्त 2026 में सौरव दास ने आरोप लगाया था कि पुदुचेरी पुलिस उनके परिवार के घर पहुंची और उनकी मां से सवाल पूछे। पुलिस ने इसे नियमित जांच बताया था।
माता-पिता के नाम और पहचान को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब मद्रास हाईकोर्ट में उनकी पृष्ठभूमि की जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी हो गया है। अदालत ने अभी कोई फैसला नहीं सुनाया है और केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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