
नई दिल्ली- सोमवार को दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों-युवाओं पर लाठीचार्ज, आंसू गैस की कार्रवाई के बावजूद जंतर-मंतर पर CJP का धरना आधी रात बाद भी जारी है। पुलिस की बर्बरता और मंच तोड़ने के बाद भी जंतर-मंतर पर CJP का शांतिपूर्ण आंदोलन थमा नहीं है। बल्कि रात होते-होते यह और मजबूत हो गया है। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रयागराज की सड़कों पर भी हजारों छात्र उतर आए।
अभिजीत दीपके और कार्यकर्ताओं ने जन्तर मंतर मंच दोबारा खड़ा किया, जबकि सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने की घोषणा की। इधर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने देर शाम संसद भवन परिसर में भारी बारिश के बीच धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा: “ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है, वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है। आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया।
"मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी। लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है। इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।”
इधर, cjp फाउंडर अभिजीत दीपके ने जनता से अपील की है कि वे जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन में शामिल हों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को मजबूत करें। उन्होंने कहा, “BJP ने आज गुंडे भेजकर प्रोटेस्ट में घुसपैठ की कोशिश की और अराजकता फैलाने की कोशिश की, लेकिन CJP और इसके प्रदर्शनकारियों का शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का ट्रैक रिकॉर्ड सबके सामने है।”
दीपके ने आगे कहा, “युवा छात्रों पर पुलिस की बर्बरता एक साफ संदेश था- कभी आवाज उठाने की हिम्मत न करना। यह दमन दिखाता है कि सरकार सिर्फ 20-22 नीट छात्रों की जान लेने से संतुष्ट नहीं है। अगर हम संसद पहुंचने के लिए आगे बढ़ते तो और ज्यादा जानें जा सकती थीं। इसलिए हम वापस जंतर-मंतर पर लौट आए हैं, जहां हमारा शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट जारी रहेगा।”
सोनम वांगचुक ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये युवाओं को कहा, " मैं अपना अनशन जारी रखूंगा (दिन 23)। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह की बर्बरता हो रही है, उसे देखते हुए मैंने फैसला किया है कि मैं अपना अनशन तब तक जारी रखूंगा जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की इजाज़त नहीं मिल जाती, या फिर मुझे अस्पताल में ही उनसे मिलने नहीं दिया जाता। उम्मीद है कि सरकार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी। मैं इस बात से बहुत प्रभावित हूं कि उकसावे के बावजूद युवाओं ने शांति बनाए रखी है। मैं सरकार और पुलिस बल से अपील करता हूं कि वे छात्रों को आज या कल संसद के सामने अपनी शिकायतें रखने की इजाज़त देकर इस मुद्दे को सुलझाएं। मुझे यकीन है कि युवा प्रदर्शनकारी कल भी वैसा ही धैर्य और सहनशीलता दिखाएंगे जैसा उन्होंने आज दिखाया है।
ट्राइबल आर्मी के फाउंडर हंसराज मीणा ने कहा, "मैंने अपने जीवन में इतनी क्रूर सरकार नहीं देखी, जिसने बच्चों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार किया हो। शांतिपूर्ण आवाज़ उठाने वाले बच्चों को जानवरों की तरह पीटना किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। सत्ता का काम सुरक्षा देना है, दमन करना नहीं।"
स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेन्द्र यादव ने कहा, "दिन-दहाड़े, देश की राजधानी में यह सब हो रहा है। रायसीना रोड पर हम शांतिपूर्वक बैठे थे। न किसी ने बैरिकेड तोड़ा, न हिंसा की, न किसी पर हमला किया। फिर भी जवाब में आई आंसू गैस, लाठीचार्ज और दमन। अब यही लोकतंत्र का नया चेहरा है! युवा कई दिनों तक सड़क पर बैठे रहे। सरकार चाहती तो बातचीत से शुरुआत कर सकती थी।समिति बन सकती थी, समाधान निकल सकता था।लेकिन सरकार ने संवाद का हर रास्ता बंद रखा।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है। सरकार को युवाओं की आवाज़ सुननी चाहिए, दबानी नहीं चाहिए। मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग भी है जिसमे आवाज उठाई जाएगी, टिकैत ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा फिर से जंतर मंतर आयेंगे।
एक्टर दम्पत्ति जेनेलिया और रितेश देशमुख ने सोमवार रात को पोस्ट किये मेसेज में लिखा," हम अपने देश के युवाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए, ज़ोरदार, साफ़ और बिना किसी डर के। वे हमारे लोकतंत्र की धड़कन और हमारे देश के भविष्य के असली निर्माता हैं। आइए, हम उनकी बात सुनें, उनका समर्थन करें और उन्हें सशक्त बनाएं। हमारे युवाओं की ऊर्जा, साहस और सपने ही उस भारत को आकार देंगे जिसे हम बनाना चाहते हैं।"
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