MP के बहुचर्चित अंजना हत्याकांड की जांच अब CBI के हवाले: SC के आदेश से बढ़ीं पूर्व गृह मंत्री की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस की जांच पर उठाए सवाल; सागर के बरोदिया नौनागिर मामले में नई जांच के आदेश, एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से बना था राष्ट्रीय मुद्दा
MP के बहुचर्चित अंजना हत्याकांड की जांच अब CBI के हवाले: SC के आदेश से बढ़ीं पूर्व गृह मंत्री की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला?
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भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बरोदिया नौनागिर क्षेत्र में हुए बहुचर्चित अंजना हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने सुनाया। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस आदेश के बाद हलचल तेज हो गई है।

पीड़ित पक्ष लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण आरोपियों को मिला हुआ था, जिसके कारण पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं रही। परिवार का कहना था कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दबाव के चलते मामले की गंभीरता को कम करके दिखाया गया और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बाद इस मामले में कई नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है। साथ ही राजनीतिक स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि इस जांच के बाद पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पूरे मामले को विस्तार से रखा और यह दलील दी कि राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अदालत ने भी प्रथम दृष्टया इस तर्क को गंभीर माना और कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे स्वतंत्र एजेंसी को सौंपना जरूरी है।

कोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई की टीम पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेगी। इसके तहत राज्य पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच, केस डायरी, सबूत और सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपे जाएंगे। एजेंसी इन सभी तथ्यों की समीक्षा कर नए सिरे से जांच शुरू करेगी और यह भी जांचेगी कि कहीं आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिला तथा क्या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।

छेड़छाड़ के मामले से शुरू हुआ विवाद

पीड़ित परिवार के अनुसार इस पूरे विवाद की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब अंजना के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी। परिवार का आरोप है कि जब इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई, तब आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाने के बजाय हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। परिवार का कहना है कि उस समय भी उन्होंने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यही वह बिंदु था जहां से विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और बाद में यह मामला एक बड़े आपराधिक प्रकरण में बदल गया।

सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ जब मुख्य गवाह अंजना की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दरअसल राजेंद्र के शव को लाते समय अंजना की एंबुलेंस से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने इसे वाहन से गिरने की दुर्घटना बताया था, लेकिन बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों और सिर में बड़ा फ्रैक्चर सामने आया। इसके बाद परिवार ने इसे हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी थी।

राजनीतिक स्तर पर भी गूंजा था मामला

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया था। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कई नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इसके अलावा उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना व्यक्त की थी और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था।

हालांकि पीड़ित परिवार का आरोप रहा कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं हो पाई। परिवार लगातार उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की गुहार लगाता रहा। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है, जिसे इस मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

अब नए सिरे से होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच करेगी। एजेंसी न केवल पहले दर्ज मामलों और सबूतों की समीक्षा करेगी, बल्कि यह भी जांचेगी कि इस मामले में कहीं किसी स्तर पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई। इसके अलावा गवाहों की सुरक्षा, राजनीतिक दबाव और घटनाओं की कड़ियों को जोड़कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की जाएगी।

माना जा रहा है कि सीबीआई जांच के बाद इस बहुचर्चित मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित परिवार को अब उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकेगी।

घटना पर प्रकाशित हो चुकी है पुस्तक

इसी पूरे प्रकरण और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर “अंजना” नाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक सागर जिले के बरोदिया नोनागिर में हुए दलित उत्पीड़न और हत्याकांड की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें नितिन अहिरवार, राजेंद्र और अंजना अहिरवार से जुड़े घटनाक्रमों को दर्ज किया गया है। इस पुस्तक के लेखक पत्रकार, लेखक और द मूकनायक के डिप्टी एडिटर अंकित पचौरी हैं, जिन्होंने इस मामले को दस्तावेजी शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

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