
भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित अचलेश्वर मंदिर से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक स्थलों पर बढ़ती मनमानी और अंधविश्वास के सहारे भय फैलाने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपू थाना क्षेत्र के इस मंदिर में एक पुजारी द्वारा श्रद्धालु के साथ की गई मारपीट का वीडियो सामने आया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि प्रसाद चढ़ाने को लेकर हुए मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें पुजारी और मंदिर कर्मचारियों ने मिलकर श्रद्धालु को कमरे में बंद कर पीटा।
पीड़ित राजेश बोहरा (54), जो लक्ष्मीगंज लश्कर के निवासी हैं, पिछले लगभग 40 वर्षों से मंदिर में नियमित पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि 29 मार्च को जब वे मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे, तो उन्होंने पुजारी गगन कटारे को प्रसाद चढ़ाने के लिए दिया। आरोप है कि पुजारी ने प्रसाद को सम्मानपूर्वक चढ़ाने के बजाय भगवान की प्रतिमा पर फेंक दिया। जब राजेश बोहरा ने इस पर आपत्ति जताई और विधि-विधान से प्रसाद चढ़ाने की बात कही, तो यही बात विवाद की जड़ बन गई।
CCTV में कैद हुई घटना!
इसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। आरोप है कि पुजारी ने मंदिर के कर्मचारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालु को नटराज भवन में ले जाकर “ठीक कर दो”। इसके बाद राजेश बोहरा को जबरन एक कमरे में ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। उनके साथ थप्पड़-घूंसे से मारपीट की, गले से पकड़कर धक्का दिया गया। यह पूरी घटना मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जो अब सबूत के तौर पर सामने आई है।
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि वह मानसिक दबाव और डर का माहौल है, जो कथित तौर पर पुजारी द्वारा बनाया गया। पीड़ित के अनुसार, आरोपी पुजारी गौरव कटारे ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि “तुझे तांत्रिक क्रिया से भस्म कर देंगे, तू सड़-सड़कर मरेगा।” इस तरह की धमकियां न केवल एक व्यक्ति को डराने का माध्यम हैं, बल्कि समाज में अंधविश्वास को गहराई तक स्थापित करने का भी जरिया बनती हैं।
यह घटना इस बड़े सवाल को जन्म देती है कि क्या धार्मिक आस्था के स्थानों पर कुछ लोग अपने प्रभाव और पद का इस्तेमाल करके लोगों को डराने और नियंत्रित करने का काम कर रहे हैं? “तांत्रिक क्रिया”, “श्राप” और “प्रकोप” जैसे शब्दों का उपयोग कर आम लोगों में भय पैदा करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह सब खुलेआम और हिंसा के साथ जुड़ जाता है, तो यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाती है।राजेश बोहरा का यह भी कहना है कि जिस पुजारी के साथ उनका विवाद हुआ, उसी से उन्होंने पहले दीक्षा ली थी।
पीड़ित ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार धमकियों के कारण वे भय के साये में जी रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि अभी तक औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
सीएसपी मनीष यादव के अनुसार, शिकायत मिलते ही मामले की जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को उजागर करती है, जिसमें धर्म और आस्था के नाम पर लोगों को डराकर, दबाकर और नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। समाज में आज भी बड़ी संख्या में लोग “दैवी प्रकोप” और “तांत्रिक शक्ति” जैसे विचारों से प्रभावित होते हैं, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग अपनी सत्ता बनाए रखते हैं।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.