
भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में वर्ष 2021 की बाढ़ राहत राशि वितरण में सामने आए बहुचर्चित घोटाले में तत्कालीन तहसीलदार बड़ौदा अमिता सिंह तोमर की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी खातों के माध्यम से सुनियोजित तरीके से सरकारी राहत राशि का गबन किया। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत याचिका जिला न्यायालय श्योपुर में विचाराधीन है, जिस पर अब 31 मार्च को सुनवाई प्रस्तावित है। न्यायालय ने सुनवाई से पहले केस डायरी तलब की है, जिससे यह साफ है कि अदालत भी मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों की गहन समीक्षा करना चाहती है।
फर्जी खातों के जरिए राहत राशि का बड़ा खेल
पुलिस विवेचना में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच में पाया गया कि 87 लोगों के 127 खातों में राहत राशि ट्रांसफर की गई, जिनमें कई खाते ऐसे थे जो पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल ही नहीं थे। कुछ खाते संबंधित तहसील क्षेत्र से बाहर के भी पाए गए, जिससे यह आशंका मजबूत होती है कि फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया। इतना ही नहीं, एक ही खाते में कई बार राशि डालने के मामले भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, एक खाते में 22 बार ट्रांजेक्शन दर्ज हुआ, जबकि एक ही परिवार के कई सदस्यों के खातों में भी राशि ट्रांसफर की गई।
अंतिम स्वीकृति का अधिकार बना अहम कड़ी
मामले की जांच में यह तथ्य बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि तहसीलदार के रूप में अमिता सिंह तोमर के पास डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer) के रूप में भुगतान की अंतिम स्वीकृति का अधिकार था। ऐसे में बिना उनकी अनुमति के इतनी बड़ी मात्रा में राशि का ट्रांसफर होना संभव नहीं माना जा रहा। पुलिस का कहना है कि उन्हें केवल सहआरोपी पटवारियों के बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि राहत वितरण में हुई अनियमितताओं के ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बनाया गया है, जिससे उनकी भूमिका और अधिक संदिग्ध हो जाती है।
2.57 करोड़ के गबन का आरोप
पूरे मामले में करीब 2.57 करोड़ रुपए के गबन के आरोपों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को यह भी संकेत मिले हैं कि इस घोटाले के बदले आर्थिक लाभ लिया गया। कराहल एसडीओपी अवनीत शर्मा के अनुसार, लगभग 80 लाख रुपए के संदिग्ध नकद लेन-देन की जानकारी सामने आई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामला अभी विवेचना में है, इसलिए विस्तृत जानकारी साझा करना संभव नहीं है। इसके बावजूद यह तथ्य इस घोटाले के आर्थिक पक्ष को और गंभीर बनाता है।
पटवारियों और उनके परिजनों की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस घोटाले का दायरा काफी व्यापक है और यह केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं दिखता। पुलिस ने अब तक 22 पटवारियों सहित कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पटवारियों ने अपने परिवार के सदस्यों पत्नी, बच्चों और माता-पिता के खातों में भी राहत राशि ट्रांसफर करवाई। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह घोटाला संगठित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत रही है।
ऑडिट जांच में हुआ घोटाले का खुलासा
पूरे मामले का खुलासा ऑडिट जांच के दौरान हुआ, जिसमें राहत वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि वास्तविक बाढ़ प्रभावितों को नजरअंदाज कर फर्जी नामों और अपात्र लोगों को लाभ दिया गया। दस्तावेजों में हेरफेर कर ऐसे लोगों को भी राहत राशि दी गई, जिनका बाढ़ से कोई संबंध नहीं था। इस प्रक्रिया में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की राशि अनियमित रूप से निकाली गई।
सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, गिरफ्तारी के बाद तेज हुई कार्रवाई
अमिता सिंह तोमर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की थी, लेकिन उन्हें कहीं से राहत नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें ग्वालियर स्थित निवास से गिरफ्तार कर श्योपुर लाया, जहां न्यायालय में पेशी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद इस मामले में जांच और तेज हो गई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए गंभीर सवाल
श्योपुर में किसानों के मुद्दों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र पराशर ने इस पूरे मामले को सुनियोजित भ्रष्टाचार बताया है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले के कारण वास्तविक जरूरतमंदों को मिलने वाली राहत उनसे छीन ली गई, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर सभी दोषियों की पहचान की जाए और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आगे और खुलासों की संभावना
पुलिस का कहना है कि यह मामला अभी शुरुआती जांच से आगे बढ़कर गहन पड़ताल के चरण में है। बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे साक्ष्य सामने आएंगे, इस घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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