
भोपाल। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में घिरे सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और गुना से जिला पंचायत सदस्य रघुवीर सिंह मीणा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा अब उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत भी अलग से अपराध दर्ज करने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका के चलते यह कार्रवाई प्रस्तावित है।
पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
रघुवीर सिंह मीणा पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षक की नौकरी के लिए ओबीसी श्रेणी का प्रमाण पत्र इस्तेमाल किया था। इसके बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा परीक्षा में उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी से आवेदन किया।
जाति प्रमाण पत्र को लेकर मामला सामने आने के बाद अनुसूचित जनजाति विभाग की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उनके एसटी प्रमाण पत्र की जांच की। समिति ने प्रमाण पत्र को अवैध माना। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने इसी महीने उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी।
उप निरीक्षक अमिताभ प्रताप सिंह पर भी मामला
यह मामला केवल रघुवीर सिंह मीणा तक सीमित नहीं है। अपराध अन्वेषण विभाग (CID) के अंतर्गत काम करने वाले विजिलेंस थाने में उप निरीक्षक अमिताभ प्रताप सिंह के विरुद्ध भी जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मामलों में प्रमाण पत्र हासिल करने की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अलग से केस दर्ज किया जा सकता है।
शासन से अभियोजन की अनुमति मांगेगा पुलिस मुख्यालय
अधिकारियों के अनुसार, पीसी एक्ट के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय शासन से अभियोजन चलाने की अनुमति मांगेगा। अनुमति मिलने के बाद मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दो अन्य अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्र भी जांच के दायरे में
सीआईडी के पास जाति प्रमाण पत्र से जुड़े दो अन्य मामले भी लंबित हैं। इनमें एक मामला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से संबंधित है, जबकि दूसरा सेवानिवृत्त निरीक्षक का है।
बताया गया है कि दोनों मामलों में उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने संबंधित अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्र को अवैध माना था। हालांकि, दोनों अधिकारियों ने समिति के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत से उन्हें फिलहाल स्थगन (स्टे) मिला हुआ है।
ऐसे में इन दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। दूसरी ओर, रघुवीर सिंह मीणा और उप निरीक्षक अमिताभ प्रताप सिंह के मामलों में सतर्कता शाखा अब कथित भ्रष्टाचार की भूमिका की भी जांच आगे बढ़ा रही है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें