MP: सीधी में सड़क के लिए फिर तेज हुआ आंदोलन! एंबुलेंस गांव से 3 किमी पहले रुकी, घर पर हुआ प्रसव

खड्डी खुर्द-बगैहा टोला से गजरी तक 10.50 किमी सड़क की मांग; करीब 5 किमी हिस्सा अब भी अधूरा, 14 सितंबर से लीला साहू का अनिश्चितकालीन धरना
MP: सीधी में सड़क के लिए फिर तेज हुआ आंदोलन! एंबुलेंस गांव से 3 किमी पहले रुकी, घर पर हुआ प्रसव
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भोपाल। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के खड्डी खुर्द गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज हो गया है। सितंबर 2026 में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को अस्पताल ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस खराब सड़क के कारण गांव से करीब तीन किलोमीटर पहले ही रुक गई। इसके बाद महिला का प्रसव घर पर ही कराना पड़ा। इस घटना ने गांव की बदहाल सड़क और आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की समस्या को फिर सामने ला दिया है। एंबुलेंस के तीन किलोमीटर पहले रुकने की घटना की स्थानीय रिपोर्टें भी सामने आई हैं।

इसी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय लीला साहू 14 सितंबर 2026 से ग्रामीणों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी हैं। उनकी मांग खड्डी खुर्द-बगैहा टोला से गजरी तक करीब 10.50 किलोमीटर लंबे मार्ग का पूरा निर्माण कराने की है। सड़क का कुछ हिस्सा तैयार हुआ है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर मार्ग अब भी अधूरा बताया जा रहा है।

10.50 किलोमीटर सड़क, करीब 5 किलोमीटर अब भी अधूरी

खड्डी खुर्द-बगैहा टोला से गजरी को जोड़ने वाला यह मार्ग आसपास के कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और गड्ढों की स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसका असर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के आवागमन पर पड़ता है।

सितंबर में शुरू हुए धरने से पहले ही लीला साहू ने सड़क के शेष हिस्से के निर्माण की मांग उठाई थी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सड़क की कुल लंबाई करीब 10.50 किलोमीटर है और इसका एक हिस्सा बन चुका है, जबकि लगभग पांच किलोमीटर हिस्से का निर्माण बाकी है।

जुलाई 2024 में सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुई मुहिम

सड़क को लेकर लीला साहू की मुहिम जुलाई 2024 में सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुई थी। उन्होंने बघेली भाषा में वीडियो बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जनप्रतिनिधियों से गांव की सड़क बनवाने की अपील की थी।

वीडियो वायरल होने के बाद मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। एबीपी न्यूज की जुलाई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, खड्डी खुर्द के बगैहा टोला तक पहुंचने वाला रास्ता बेहद खराब था और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

गर्भावस्था के दौरान लीला ने उठाया था अस्पताल पहुंचने का सवाल

जुलाई 2025 में लीला साहू खुद गर्भवती थीं। इसी दौरान उन्होंने एक बार फिर सड़क की समस्या को लेकर आवाज उठाई। उनका कहना था कि सड़क खराब होने के कारण गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है।

इसी दौरान सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा की ओर से लीला से प्रसव की तारीख पूछे जाने और जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाने की बात का जिक्र मीडिया रिपोर्टों में आया था। लीला ने इसके जवाब में सड़क की जरूरत पर जोर दिया था।

उनका सवाल था कि समस्या केवल उनकी नहीं है, गांव में दूसरी गर्भवती महिलाएं भी हैं। ऐसे में स्थायी समाधान सड़क का निर्माण है।

जुलाई 2025 में शुरू हुआ था सड़क का काम

लगातार सोशल मीडिया अभियान के बाद जुलाई 2025 में सड़क के एक हिस्से पर काम शुरू हुआ। जेसीबी और रोलर से सड़क सुधार का काम शुरू होने की जानकारी उस समय सामने आई थी। लीला साहू ने इसे अपनी मुहिम की सफलता बताया था।

हालांकि, शुरुआती काम के बावजूद पूरा मार्ग तैयार नहीं हुआ। यही वजह है कि 2026 में एक बार फिर ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

पूरे मार्ग के निर्माण के लिए करीब 4.48 करोड़ का प्राक्कलन

ग्रामीणों के मुताबिक पूरे 10.50 किलोमीटर मार्ग को स्थायी और बारहमासी सड़क के रूप में विकसित करने के लिए करीब 448.63 लाख रुपये यानी 4.48 करोड़ रुपये का प्राक्कलन सामने आया है।

इसके बावजूद सड़क का पूरा हिस्सा जमीन पर तैयार नहीं हो सका है। अब ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क निर्माण की प्रक्रिया और बजट को लेकर लंबे समय से बातें हो रही हैं, तो बाकी हिस्से का निर्माण कब शुरू होगा।

सड़क के श्रेय को लेकर भी राजनीतिक खींचतान

सड़क निर्माण को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी श्रेय लेने की कोशिशें होती रही हैं। 2025 में सड़क के एक हिस्से में तत्काल राहत के लिए काम शुरू कराया गया था। दूसरी ओर सांसद डॉ. राजेश मिश्रा की ओर से सड़क निर्माण की योजना केंद्र सरकार को भेजे जाने की बात कही गई थी।

मीडिया रिपोर्टों में सड़क को लेकर अलग-अलग जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की भूमिका का भी उल्लेख हुआ है। यही सड़क चुरहट और धौहनी विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े इलाकों को प्रभावित करती है।

14 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना

सड़क पूरी नहीं बनने के बाद लीला साहू ने 14 सितंबर से ग्रामीणों के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उनका कहना है कि ग्रामीण खेती-किसानी और घरेलू काम छोड़कर आंदोलन में शामिल हैं और जब तक सड़क का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, धरने में आसपास के लोगों के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों से भी समर्थन पहुंच रहा है। 25 सितंबर को सिंगरौली नगर निगम की महापौर रानी अग्रवाल भी धरना स्थल पर समर्थन देने पहुंचीं; इस दौरान उनकी गाड़ी भी खराब सड़क के कारण कीचड़ में फंस गई।

सड़क के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

सितंबर 2026 में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला के लिए बुलाई गई एंबुलेंस का गांव से करीब तीन किलोमीटर पहले रुक जाना इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू बन गया है। महिला को अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही प्रसव कराना पड़ा।

ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ सड़क का सवाल नहीं है, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का भी सवाल है। उनका कहना है कि सड़क बनने में यदि अभी समय लगता है तो कम से कम गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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