पानी की बोतल छूने पर चौथी कक्षा के दलित छात्र की बेरहमी से पिटाई, NHRC ने मध्य प्रदेश सरकार को भेज नोटिस

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पानी की बोतल से पानी पीने पर दलित छात्र की पिटाई और हरियाणा में दूषित पानी से बच्ची की मौत पर NHRC सख्त, दोनों राज्य सरकारों को भेजा नोटिस।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्लीInternet
Published on

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा के दलित छात्र के साथ हुई मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। इस गंभीर मामले में आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह अमानवीय घटना शिवपुरी जिले के उकावल गांव में 28 जुलाई को घटी थी। बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक ने बच्चे को अपनी बोतल से पानी पीते हुए देख लिया था। इसके बाद गुस्से में आकर उसने मासूम छात्र की न सिर्फ बेरहमी से पिटाई की, बल्कि उसे जातिसूचक गालियां भी दीं।

एक अगस्त को प्रकाशित खबर के जरिए आयोग ने इस कृत्य का स्वतः संज्ञान लिया। मानवाधिकार पैनल ने स्पष्ट किया है कि यदि यह रिपोर्ट सच है, तो यह मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का बेहद गंभीर मामला है। पीड़ित बच्चे ने घर पहुंचकर आपबीती अपने माता-पिता को बताई थी, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचआरसी ने राज्य के मुख्य सचिव और शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक (SP) से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस रिपोर्ट में पीड़ित छात्र को दिए गए वैधानिक मुआवजे और राहत की स्थिति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

इसी बीच, मानवाधिकार आयोग ने एक अन्य दुखद मामले में हरियाणा सरकार को भी नोटिस जारी किया है। यह मामला अंबाला जिले के शहजादपुर का है, जहां कथित तौर पर दूषित पानी पीने से पीलिया का शिकार हुई 12 वर्षीय एक बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में सार्वजनिक नल से सप्लाई होने वाला पीने का पानी पूरी तरह से दूषित है। इस जहरीले पानी की वजह से कई अन्य बच्चे भी पीलिया की चपेट में आ गए हैं और बीमार हैं।

इस भयावह स्थिति को देखते हुए आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। तीन अगस्त को सामने आई रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने प्रशासन से पूछा है कि दूषित जल की समस्या को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, इलाज करा रहे अन्य बीमार बच्चों की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी रिपोर्ट में मांगी गई है।

मृतक बच्ची का पहले एक स्थानीय अस्पताल में पीलिया का इलाज चल रहा था। जब उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, तो डॉक्टरों ने उसे चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर (PGIMER) रेफर कर दिया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली
झारखंड के चतरा में दलित नाबालिग से रेप के आरोप में युवक की पीट-पीटकर हत्या
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली
GenZ Rising Tour | जंतर मंतर के बाद युवा सिर्फ सड़क पर नहीं, झकझोर रहे पूरा सिस्टम
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली
ऊना दलित कांड के 10 साल: न्याय की आस में पाई-पाई को मोहताज पीड़ित परिवार, हाईकोर्ट में लड़ाई के लिए समाज से मांगी मदद

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com