
भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैला दूषित पानी का संक्रमण अब भी लोगों की जान ले रहा है। नगर निगम की गंभीर लापरवाही के चलते क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी थी, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। शुक्रवार को 65 वर्षीय बुजुर्ग एकनाथ सूर्यवंशी की मौत के बाद इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। यह मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि शहरी प्रशासन की विफलता का प्रतीक बनती जा रही है।
परिजनों के अनुसार, एकनाथ सूर्यवंशी को 28 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझा गया, लेकिन हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। अगले ही दिन, 29 दिसंबर को उन्हें शैल्बी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहां इलाज के बावजूद जब उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों की सलाह पर 3 जनवरी को उन्हें बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक, दूषित पानी के कारण फैले संक्रमण ने पहले पाचन तंत्र को प्रभावित किया, फिर धीरे-धीरे किडनी और लिवर तक फैल गया। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण ने गंभीर रूप ले लिया और अंततः ब्रेन हेमरेज की स्थिति भी बन गई।
आईसीयू और वेंटिलेटर पर संघर्ष
एकनाथ सूर्यवंशी लगभग 25 दिनों तक बॉम्बे अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर रहे। इस दौरान परिवार को हर दिन एक नई चिंता और डर के साथ गुजरना पड़ा। 28 जनवरी की रात उनकी हालत अचानक और ज्यादा बिगड़ गई। डॉक्टरों ने परिजनों को साफ शब्दों में बता दिया कि अब बचने की संभावना बेहद कम है।
इसके बाद परिजनों ने भारी मन से 29 जनवरी को उन्हें वेंटिलेटर से हटवाकर घर ले जाने का फैसला किया। एकनाथ के बेटे नीलेश के अनुसार, “पिताजी ने एक महीने तक अस्पताल में असहनीय पीड़ा झेली। हर दिन उम्मीद और निराशा के बीच गुजरता रहा।” शुक्रवार, 30 जनवरी को घर पर ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
31 मौतें, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं
भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले एक महीने से दूषित पानी से फैल रही बीमारियों ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग बीमार पड़े हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से ठोस और स्थायी समाधान अब तक नजर नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की पाइपलाइन में सीवेज के मिल जाने की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन समय रहते मरम्मत और जांच नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि एक पूरी बस्ती संक्रमण की चपेट में आ गई। सवाल यह है कि इतनी मौतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा मामला
भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रही। हाल ही में इंदौर दौरे के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी। उन्होंने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान एकनाथ सूर्यवंशी के बेटे से भी मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
राहुल गांधी ने नगर निगम और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन यहां इस जिम्मेदारी में घोर चूक हुई है।
आज भी डर का माहौल
भागीरथपुरा में आज भी डर और आक्रोश का माहौल है। लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। हर नई मौत के साथ यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि आखिर इस त्रासदी की जिम्मेदारी कौन लेगा।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिले और क्षेत्र में जल आपूर्ति व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक भागीरथपुरा की यह जल-त्रासदी प्रशासन पर एक बड़ा सवालिया निशान बनी रहेगी।
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