MP सागर में आदिवासी सुसाइड केस: SIT ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा वक्त, मार्च में पेश होगी रिपोर्ट, जानिए क्या है मामला?

राज्य सरकार ने 15 मार्च 2026 तक जांच की समय-सीमा बढ़ाने का आवेदन किया, फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
Published on

भोपाल। मध्यप्रदेश के सागर जिले के बहुचर्चित नीलेश आदिवासी सुसाइड केस में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा है। राज्य सरकार ने कोर्ट में आवेदन दाखिल कर जांच की समय-सीमा 15 मार्च 2026 तक बढ़ाने की मांग की है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत गठित SIT द्वारा की जा रही है।

क्या है मामला?

यह मामला सागर जिले के मालथौन थाना क्षेत्र का है, जहां पिछले साल नीलेश आदिवासी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन मृतक की पत्नी रेवा आदिवासी ने आरोप लगाए कि स्थानीय राजनीतिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते नीलेश ने यह कदम उठाया। परिवार का दावा है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई।

मर्ग से FIR तक: तीन केस, कई धाराएं

मौत के बाद पुलिस ने पहले असामान्य मृत्यु (मर्ग) कायम कर जांच शुरू की। बाद में परिजनों के बयानों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। कुल मिलाकर तीन मामले सामने आए एक मर्ग और दो आपराधिक प्रकरण जिनमें एट्रोसिटी सहित अन्य धाराएं शामिल हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को CBI जांच से इनकार करते हुए आर्टिकल 142 के तहत राज्य स्तर पर SIT गठित करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने एक महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा था। आदेश के अनुपालन में 12 दिसंबर 2025 को SIT का गठन किया गया। टीम में दूसरे राज्य के मूल निवासी डीआईजी रैंक के अधिकारी को चीफ बनाया गया, साथ ही मध्यप्रदेश के बाहर के एक IPS और एक महिला DSP को शामिल किया गया। SIT को सभी संबंधित FIR और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर स्वतंत्र जांच करने के निर्देश दिए गए।

फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि SIT ने तीनों मामलों में रिकॉर्ड की स्वतंत्र और गहन जांच की है। केस (क्राइम नंबर 249/2025) की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और फाइनल रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस दौरान कई मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिन्हें साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। सरकार का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना जांच को अंतिम रूप देना संभव नहीं है और देरी न तो जानबूझकर है, न ही लापरवाही के कारण, बल्कि तकनीकी साक्ष्यों की प्रकृति के चलते हुई है।

गोविंद सिंह राजपूत को राहत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत गोविंद सिंह राजपूत की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक जारी है। उन्हें जमानत बांड भरने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि SIT को गंभीर आपराधिक साक्ष्य मिलते हैं, तो कस्टोडियल पूछताछ के लिए अनुमति मांगी जा सकती है।

गवाहों की सुरक्षा पर सख्त रुख

कोर्ट ने मृतक की पत्नी रेवा आदिवासी सहित सभी कमजोर गवाहों को प्रभावित न किए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही मृतक के भाई नीरज आदिवासी और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई न करने का आदेश भी दिया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में आगे बढ़ सके।

सुप्रीम कोर्ट
MP: अर्धनग्न प्रदर्शन पर भड़की तहसीलदार, कलेक्ट्रेट में परिवार से कहा- ‘नाटक मत करो, अभी पुलिस बुला लूंगी’ जानिए क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट
MP: ग्वालियर में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास, गवाही से मुकरी पीड़िता साक्ष्यों के आधार पर पाक्सो में मिली सजा
सुप्रीम कोर्ट
MP: मुरैना में घर से अगवा कर दलित सरपंच को बेरहमी से पीटा, सुनील अस्तेय ने कहा- 'दलित प्रतिनिधित्व पर हमला'

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com