MP उज्जैन में नाबालिग के साथ बर्बरताः प्रेम प्रसंग के शक में निर्वस्त्र कर घुमाया, चार आरोपी गिरफ्तार
भोपाल। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। प्रेम प्रसंग के शक में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के को न सिर्फ बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसे निर्वस्त्र कर रस्सी से बांधकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक बाजार में घुमाया गया। यह अमानवीय घटना 15 जनवरी गुरुवार की बताई जा रही है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पंवासा थाना पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
प्रेम प्रसंग के शक में भीड़ का कहर
बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना प्रेम प्रसंग से जुड़ी है। आरोपी पक्ष को शक था कि नाबालिग लड़का उनके परिवार की एक लड़की को साथ ले गया था इसी रंजिश में भीड़ ने कानून अपने हाथ में ले लिया। पहले लड़के को एक जगह बंधक बनाया गया, उसके साथ मारपीट की गई और फिर उसके किया गया।
मां के साथ पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा
पंवासा क्षेत्र में रहने वाला पीड़ित लड़का शुक्रवार को अपनी मां के साथ पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा। उसने बताया कि शुक्रवार दोपहर लड़की के परिजनों ने उसे पकड़ लिया और पहले जमकर मारपीट की। इसके बाद उसके कपड़े फाड़ दिए। जब इससे भी मन नहीं भरा तो उसके हाथ रस्सी से बांधकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक निर्वस्त्र अवस्था में शहर में घुमाया गया।
3 महीने पहले लड़की भगा ले गया था
पीड़ित ने बताया कि वह शंकरपुर में रहता था और पास में रहने वाली लड़की से प्रेम करता था। करीब तीन महीने पहले वह लड़की को लेकर घर से भाग गया था, जिसके बाद पंवासा थाने में दोनों को पेश किया गया। यहां से उसे जेल भेज दिया गया, जबकि लड़की को सुधार गृह भेजा गया था। इस दौरान आरोपियों ने उसके घर में तोड़फोड़ भी की थी।
वीडियो बनाते रहे लोग
वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि नाबालिग लड़के के हाथ-पैर रस्सी से बांधे गए हैं और उसे बेरहमी से सड़क पर घसीटा जा रहा है। उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं और वह दर्द से कराहता हुआ रहम की गुहार लगाता नजर आता है। इसके बावजूद हमलावर उसे लगातार खींचते हुए आगे बढ़ाते रहे, मानो उसके इंसान होने का कोई मतलब ही न रह गया हो।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस सड़क पर यह अमानवीय कृत्य हो रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। दुकानें खुली थीं, राहगीर आ-जा रहे थे, लेकिन किसी ने भी आगे बढ़कर उस नाबालिग को छुड़ाने की कोशिश नहीं की। कुछ लोग दूर खड़े होकर तमाशा देखते रहे, तो कई लोग अपने मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाने में लगे रहे। किसी ने पुलिस को तुरंत सूचना देने या भीड़ को रोकने का साहस नहीं दिखाया।
यह दृश्य सिर्फ एक बच्चे पर हुए जुल्म का नहीं था, बल्कि समाज की संवेदनहीनता का भी आईना था। जिस वक्त एक नाबालिग की जिंदगी और इज्जत दांव पर लगी थी, उसी वक्त लोग इंसानियत भूलकर मनोरंजन की तरह इस घटना को कैमरे में कैद कर रहे थे। यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर हम किस तरह का समाज बनते जा रहे हैं, जहां दर्द देखकर भी लोग मदद की जगह वीडियो बनाना ज्यादा जरूरी समझते हैं।
मां की तबीयत खराब होने पर पैसे लेने आया था
लड़के ने बताया कि एक महीने बाद जेल से रिहा होने पर वह अपनी अपाहिज मां के साथ मौसी के घर देवास चला गया था। गुरुवार को मां की तबीयत खराब होने पर वह पैसे लेने के लिए उज्जैन आया था। डर के चलते उसने श्री सिंथेटिक्स के पास दोस्त को बुलाया, जहां आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।
पुलिसवालों ने छुड़ाया, आरोपियों को पकड़ा, बाद में छोड़ दिया
पीड़ित के अनुसार, पंवासा थाने के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे इस हालत में देखा और छुड़ाकर थाने ले गए। उस समय मारपीट करने वाले आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ा था, लेकिन शाम तक सभी को छोड़ दिया गया। पीड़ित ने बताया कि बाद में इस घटना की जानकारी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को लगी, जिसके बाद वे उसे पुलिस कंट्रोल रूम लेकर पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।
एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि नाबालिग को निर्वस्त्र कर बाजार में घुमाने के मामले में थाना पंवासा में चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस घटना को बेहद अमानवीय और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला कृत्य माना जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा रही है।
द मूकनायक से बातचीत में मप्र राज्य बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि किसी नाबालिग को निर्वस्त्र कर घुमाना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना सीधे-सीधे बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन है। यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए शर्मनाक आईना है, जो बताता है कि संवेदनशीलता और कानून का डर दोनों कमजोर पड़ते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं होती, बल्कि पीड़ित बच्चे को तत्काल मानसिक, सामाजिक और कानूनी सहायता मिलनी चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बच्चे की काउंसलिंग कराई जाए, उसे सुरक्षा दी जाए और परिवार को भरोसे में लेकर पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि यह जख्म उसके पूरे जीवन पर बोझ न बन
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