नई दिल्ली: कॉकक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले सप्ताह निवारक हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से भारी प्रताड़ना दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'डरपोक तानाशाह' करार देते हुए जंतर-मंतर को विरोध स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर तीखा हमला बोला है।
अपने पैतृक गांव हिंगोली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डिपके ने पुलिस के बर्ताव का विस्तृत जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें उनकी दादी के निधन की दुखद खबर दी थी। डिपके के अनुसार, पुलिस का मकसद सिर्फ उन्हें और शोक में डूबे उनके बीमार माता-पिता को मानसिक तनाव देना था।
उन्होंने पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे सिर्फ निधन की सूचना देने आए थे, तो रात 3:30 बजे गिरफ्तारी के कागजात लेकर क्यों पहुंचे थे। उन पर उसी वक्त उन कागजातों पर हस्ताक्षर करने का अनुचित दबाव बनाया गया, जो सीधे तौर पर मानसिक प्रताड़ना थी।
सीजेपी नेता ने बताया कि खबर सुनने के बाद उन्होंने पुलिस से अपने चचेरे भाई से बात कराने का अनुरोध किया था, जो उस वक्त उनकी दादी के पास मौजूद था। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट बताया था कि उनके माता-पिता अस्वस्थ हैं, इसलिए वे सीधे उन्हें फोन नहीं करना चाहते। बावजूद इसके, पुलिस ने उन्हें अपने फोन से भाई का नंबर तक निकालने की इजाजत नहीं दी और माता-पिता को ही कॉल करने के लिए मजबूर किया। डिपके ने अब दिल्ली पुलिस से मांग की है कि वह इस घटना का पूरा और अनएडिटेड फुटेज सार्वजनिक करे।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की मान्यता से बेदखल करने के सरकार के कदम पर भी डिपके ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि आज मोदी ने जंतर-मंतर से प्रदर्शन का अधिकार छीना है, कल वे लोकतंत्र को ही खत्म कर देंगे। डिपके ने तंज कसते हुए कहा कि तानाशाह को कभी भी प्रदर्शन स्थल से परेशानी नहीं थी, बल्कि उसे लोगों के विरोध करने के विचार से ही डर लगता है।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए लिखा कि जंतर-मंतर को अब एक वॉर जोन में तब्दील कर दिया गया है। उनका कहना था कि भले ही सरकार ने उस जगह को छीन लिया हो, लेकिन अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा। सोमवार 12 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के प्रति उन्होंने अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता जाहिर की।
डिपके ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की यह सोच बिल्कुल गलत है कि एक जगह पर पाबंदी लगाने से विरोध की आवाजें दब जाएंगी। लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे लोगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर महज एक स्थान नहीं है, बल्कि यह प्रतिरोध की वह अजेय भावना है जिसे कोई भी ताकत कभी नहीं छीन सकती।
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