
भोपाल। शहर में नाबालिगों के घर छोड़ने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। पिछले दो वर्षों में कुल 817 बच्चे लापता हुए, जिनमें 544 बेटियां और 273 बेटे शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार औसतन हर महीने 34 बच्चे घर छोड़ रहे हैं, जिनमें करीब 23 बेटियां होती हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि पुलिस ने लगभग 98 प्रतिशत बच्चों को बरामद कर लिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत बार-बार क्यों आ रही है?
पुलिस विश्लेषण में सामने आया है कि डिजिटल प्रभाव, भावनात्मक आवेग और पारिवारिक संवाद की कमी इन मामलों के प्रमुख कारण हैं। बदलते सामाजिक परिवेश में किशोर उम्र के बच्चों पर मोबाइल और सोशल मीडिया का असर सीधे तौर पर उनके फैसलों में दिख रहा है।
मोबाइल और सोशल मीडिया: 55 फीसदी मामलों की जड़
जांच में पाया गया कि करीब 55 फीसदी बच्चे मोबाइल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के कारण घर छोड़कर गए। इनमें ऑनलाइन चैटिंग, गेमिंग, वर्चुअल दोस्ती और सोशल मीडिया पर बने रिश्ते प्रमुख कारण रहे।
करीब 25 फीसदी मामले प्रेम-प्रसंग से जुड़े पाए गए, जबकि 10 फीसदी बच्चे रोजगार या बेहतर जिंदगी की तलाश में घर से निकले। शेष 10 फीसदी बच्चे दोस्तों के बहकावे या किसी के उकसाने में आकर घर छोड़ बैठे।
स्पष्ट है कि डिजिटल दुनिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि किशोरों के भावनात्मक और व्यवहारिक फैसलों को भी प्रभावित कर रही है। वर्चुअल रिश्ते कई बार वास्तविक जीवन से दूरी पैदा कर रहे हैं।
स्थानीय समाचार पत्र दैनिक भास्कर की रिपोर्ट अनुसार छह मामलों से समझें: कैसे डिजिटल असर ने बदली दिशा
मोबाइल से रोका तो छात्रा पहुंची वृंदावन
माधौगंज की 12वीं की एक छात्रा को जब परिजनों ने मोबाइल चलाने से रोका, तो वह अचानक लापता हो गई। शिकायत के बाद पुलिस ने उसे वृंदावन से बरामद किया। छात्रा ने बताया कि मोबाइल पर पाबंदी से नाराज होकर उसने घर छोड़ा।
गेम खेलने से रोका तो बेटा स्टेशन पहुंचा
9 दिसंबर 2024 को ओफो की बगिया निवासी 14 वर्षीय बालक घर से चला गया। झांसी रोड थाना पुलिस ने उसे रेलवे स्टेशन से पकड़ा। उसने स्वीकार किया कि माता-पिता द्वारा मोबाइल गेम खेलने से रोकने पर वह घर छोड़ आया।
17 में गई, 21 में लौटी… साथ में दो साल का बच्चा
बहोड़ापुर की 17 वर्षीय किशोरी 2021 में लापता हुई। उसी दिन ‘चिंटू’ नामक युवक भी गायब हुआ। नवंबर 2025 में आरोपी को प्रयागराज से पकड़ा गया। किशोरी जब घर लौटी तो उसके साथ दो साल का बच्चा था। यह मामला ऑनलाइन संपर्क और भावनात्मक बहकावे से जुड़ा पाया गया।
पढ़ाई पर डांट पड़ी, तो किशोर अहमदाबाद पहुंचा
चार शहर का नाका निवासी 16 वर्षीय बालक नवंबर 2024 में घर से चला गया। पिता ने 25 हजार रुपये इनाम की घोषणा की। इस बीच धमकी भरे कॉल भी आए, जिनमें दो लाख की मांग की गई। पुलिस को किशोर अहमदाबाद में मिला। उसने बताया कि पढ़ाई को लेकर डांट पड़ने पर उसने घर छोड़ा।
जरूरतें पूरी न हुईं तो 15 वर्षीय बच्ची चली गई
पढ़ाई छूटने और आवश्यकताओं के पूरी न होने से परेशान 15 वर्षीय बच्ची घर से निकल गई। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे वृंदावन से बरामद किया।
चैटिंग से रोका तो बेटी पहुंची राजस्थान
मुरार की 15 वर्षीय किशोरी ज्यादा चैटिंग करती थी। मां ने मोबाइल छीन लिया तो वह घर छोड़ गई। पुलिस ने उसे राजस्थान से सुरक्षित बरामद किया।
बेटियों के ज्यादा घर छोड़ने के पीछे क्या वजह?
आंकड़े बताते हैं कि बेटियों की संख्या बेटों से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में भावनात्मक जुड़ाव, ऑनलाइन दोस्ती और शादी या साथ रहने के झांसे में आने की घटनाएं अधिक देखी जा रही हैं। कई मामलों में पहले भरोसा जीता जाता है, फिर मिलने के लिए बुलाया जाता है। कुछ केस ऑनलाइन ग्रूमिंग से जुड़े पाए गए हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बने रिश्ते वास्तविकता से अलग होते हैं, लेकिन किशोर उम्र में भावनाएं तेजी से हावी हो जाती हैं। इसी आवेग में कई बेटियां जल्दबाजी में फैसले ले लेती हैं।
द मूकनायक से बातचीत में समाजशास्त्री डॉ. इम्तियाज खान ने बताया, आज का किशोर वर्ग दोहरी दुनिया में जी रहा है, एक वास्तविक और दूसरी डिजिटल। सोशल मीडिया उन्हें अभिव्यक्ति और जुड़ाव का मंच देता है, लेकिन यही मंच कई बार भ्रम और उनमे भावनात्मक कमी भी पैदा कर देता है। कम उम्र में लिए गए फैसले अक्सर तात्कालिक भावनाओं पर आधारित होते हैं, जिनके दूरगामी परिणाम सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह समझना होगा कि मोबाइल छीन लेना या सख्ती करना स्थायी समाधान नहीं है। बच्चों को सही-गलत का बोध कराना, उनके साथ समय बिताना और उनकी बात धैर्य से सुनना ज्यादा प्रभावी तरीका है। यदि परिवार भरोसे का माहौल बनाए रखे, तो बच्चे किसी भी समस्या में घर छोड़ने के बजाय घरवालों से ही बात करना पसंद करेंगे।
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