90 साल की सास को पीठ पर ढोकर 9 किलोमीटर चली बहू, गरीबी और व्यवस्था की मजबूरी ने देश को झकझोरा

छत्तीसगढ़ के जंगलपारा गांव से सामने आई तस्वीर ने सरकारी योजनाओं और ग्रामीण व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल
90 साल की सास को पीठ पर ढोकर 9 किलोमीटर चली बहू, गरीबी और व्यवस्था की मजबूरी ने देश को झकझोरा
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नई-दिल्ली। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। तस्वीर में एक बहू अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर कई किलोमीटर तक पैदल चलती दिखाई दे रही है। वजह सिर्फ इतनी थी कि वृद्ध महिला को पेंशन मिल सके। बताया जा रहा है कि बहू को अपनी सास को लेकर करीब 9 किलोमीटर दूर बैंक या पेंशन केंद्र तक जाना पड़ा, क्योंकि गांव तक वाहन नहीं पहुंचते और अब पेंशन पाने के लिए बुजुर्ग की भौतिक उपस्थिति तथा फिंगरप्रिंट सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।

यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने इसे सरकारी व्यवस्था की असफलता बताया तो कुछ ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। जिस उम्र में बुजुर्गों को घर पर सम्मान और सुविधा मिलनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें पेंशन के लिए पहाड़ जैसे संघर्ष से गुजरना पड़ रहा है। वहीं बहू की मजबूरी और सेवा भावना दोनों ने लोगों को भावुक कर दिया।

बैंक मित्र ने घर आना बंद किया तो बढ़ी परेशानी

जानकारी के मुताबिक जंगलपारा के कुनिया गांव में रहने वाली सुखमनिया नाम की महिला अपनी बुजुर्ग सास सोनवारी की देखभाल करती है। परिवार बेहद गरीब है और गांव तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन है। गांव के बीच में नाले और पथरीले रास्ते पड़ते हैं, जहां तक गाड़ी पहुंचना लगभग असंभव है। पहले बैंक मित्र गांव पहुंचकर ही बुजुर्गों को पेंशन उपलब्ध करा देता था, जिससे वृद्ध लोगों को परेशानी नहीं होती थी। लेकिन कुछ समय से यह व्यवस्था बंद हो गई।

इसके बाद सुखमनिया के सामने सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई कि वह अपनी चलने-फिरने में असमर्थ सास को बैंक तक कैसे ले जाए। परिवार के पास न वाहन है और न ही कोई अन्य साधन। मजबूरी में उसने अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर बांधा और कई किलोमीटर का सफर तय किया। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि रास्ता बेहद ऊबड़-खाबड़ है और महिला तपती गर्मी में अपनी सास को लेकर आगे बढ़ रही है।

1500 रुपए की पेंशन के लिए संघर्ष

सुखमनिया ने रोते हुए बताया कि उसकी सास को तीन महीने में केवल 1500 रुपए पेंशन मिलती है। इतनी छोटी राशि पाने के लिए उन्हें हर बार इतना बड़ा संघर्ष करना पड़ता है। उसने कहा कि कई बार नदी और नालों को पार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है।

महिला ने बताया कि अब बैंक द्वारा फिंगरप्रिंट और भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। इसी कारण वृद्ध महिला को स्वयं उपस्थित होना पड़ता है। उसने कहा कि अगर बैंक मित्र पहले की तरह घर आकर भुगतान कर दे तो उन्हें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। सुखमनिया ने यह भी बताया कि उनकी सास को महतारी वंदन योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है।

वायरल वीडियो के बाद प्रशासन पर उठे सवाल

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने पूछा कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवाओं की बात करती है, तब ग्रामीण और बुजुर्ग लोगों की वास्तविक समस्याओं को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें और अधिक परेशान करना।

ग्रामीण इलाकों में आज भी सड़क, परिवहन और बैंकिंग सुविधाओं की भारी कमी है। बुजुर्ग, दिव्यांग और गरीब लोग अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर होते हैं। इस घटना ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी योजनाएं वास्तव में सबसे जरूरतमंद लोगों तक आसानी से पहुंच पा रही हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग वृद्ध हैं, दिव्यांग हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उनके लिए विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अगर बुजुर्गों को समय पर और सम्मानपूर्वक पेंशन तक नहीं पहुंचा पा रही है, तो यह बड़ी प्रशासनिक लापरवाही है।

टीएस सिंह देव ने कहा कि सरकार हर चीज को तेजी से ऑनलाइन करने में लगी हुई है, लेकिन यह नहीं देख रही कि ग्रामीण और अशिक्षित लोग इन प्रक्रियाओं से कितनी परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव के समय प्रशासन घर-घर जाकर वोट डलवा सकता है, तो बुजुर्गों और असहाय लोगों को घर पर पेंशन सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती।

उन्होंने मांग की कि वृद्ध और दिव्यांग लोगों के लिए घर पहुंच सेवा शुरू की जानी चाहिए, ताकि उन्हें पेंशन, सत्यापन और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

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