
भोपाल। मध्यप्रदेश के खंडवा में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब अपनी जमीन से जुड़े रास्ते के विवाद को लेकर पहुंचे किसान पिता-पुत्र ने कलेक्टर के सामने जमकर नाराजगी जाहिर कर दी। किसान ने अधिकारियों पर समस्या का समाधान नहीं करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को “बिकाऊ” तक कह दिया। इसके बाद सभागार का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में प्रशासन ने किसान पिता-पुत्र को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। हालांकि करीब छह घंटे बाद रात में दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और कांग्रेस नेताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू कर दिया।
“तुम सब बिकाऊ हो…” बयान के बाद मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार छैगांवमाखन क्षेत्र के ग्राम बरूड़ निवासी किसान रामनारायण कुमरावत अपने बेटे श्याम कुमरावत के साथ कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे थे। किसान ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता के सामने अपनी जमीन तक जाने वाले रास्ते के विवाद का मुद्दा उठाया। किसान का कहना था कि वर्षों से वह प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
बताया गया कि कलेक्टर द्वारा मामले को दिखवाने और कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के दौरान किसान अचानक आक्रोशित हो गया। उसने अधिकारियों की ओर मुखातिब होते हुए कहा, “तुम सब बिकाऊ हो, अगर समस्या हल नहीं हुई तो मैं मर जाऊंगा।” किसान के इस बयान के बाद सभागार में अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, जबकि सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत किसान और उसके बेटे को सभागार से बाहर कर दिया।
मीडिया के सामने रखी बात, सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की के बाद बढ़ा विवाद
सभागार से बाहर आने के बाद किसान ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों और किसान पक्ष के बीच कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बात इतनी बढ़ गई कि धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर मौके पर पहुंचे और दोनों को हिरासत में लेने के निर्देश दिए।
इसके बाद कोतवाली पुलिस किसान पिता-पुत्र को अपने साथ ले गई और मजिस्ट्रेट के चैंबर में बैठाया गया। बाद में शांतिभंग की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को दोपहर करीब दो बजे जेल भेज दिया गया। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हलचल मच गई और राजनीतिक दलों के नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया।
कांग्रेस ने जमानत की मांग की, अफसर के बयान पर बढ़ा विवाद
किसान पिता-पुत्र को जेल भेजे जाने की जानकारी मिलते ही शहर कांग्रेस के पदाधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट के पास पहुंचे और दोनों की जमानत की मांग करने लगे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे मुचलका देने को तैयार हैं और मामले में तत्काल जमानत दी जानी चाहिए।
इसी दौरान सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा कथित तौर पर कहा गया कि “अभी जमानत नहीं दूंगा, जेल के दरवाजे बंद हो गए हैं। कल ऑफिस समय में आना, तब जमानत दे देंगे।” इस बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जानबूझकर जमानत में देरी करने का आरोप लगाया। विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया। देर शाम तक धरना जारी रहा और प्रशासन तथा कांग्रेस नेताओं के बीच बहस का माहौल बना रहा।
जीतू पटवारी तक पहुंचा मामला, रात में मिली जमानत
घटना धीरे-धीरे राजनीतिक मुद्दा बनती चली गई। शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को दी। इसके बाद जीतू पटवारी ने प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की।
राजनीतिक दबाव और लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच रात करीब 8:35 बजे सिटी मजिस्ट्रेट दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे। कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए आवेदन पर सुनवाई करते हुए किसान पिता-पुत्र को जमानत दे दी गई। रिहाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रशासन बोला- कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी
पूरे मामले पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने कहा कि किसान पिता-पुत्र लगातार जनसुनवाई में हंगामा कर रहे थे और अधिकारियों के साथ मारपीट जैसी स्थिति बना रहे थे। प्रशासन का कहना है कि जनसुनवाई जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है और यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती जाती तो व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ सकती थी।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन का दावा है कि दोनों के खिलाफ केवल शांति भंग की आशंका को देखते हुए वैधानिक कार्रवाई की गई थी और जेल में भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
किसान का आरोप- कोर्ट से जीतने के बाद भी नहीं मिला रास्ता
वहीं किसान रामनारायण कुमरावत का कहना है कि उसकी परेशानी कई वर्षों पुरानी है। किसान के अनुसार उसकी जमीन की 1981 की रजिस्ट्री में रास्ते का उल्लेख दर्ज है, लेकिन वर्ष 2019 में पड़ोसियों द्वारा रास्ता बंद कर दिया गया। इसके बाद उसने तहसील से लेकर एसडीएम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी और कई स्तरों पर फैसला उसके पक्ष में आया। किसान का दावा है कि उसे उच्च न्यायालय से भी राहत मिली, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर आदेशों का पालन नहीं कराया गया।
किसान ने आरोप लगाया कि रास्ता बंद होने के कारण वह पिछले तीन वर्षों से अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पा रहा है। खेत खाली पड़ा हुआ है, जिससे उसे लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उसने कहा कि वह कई बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुका है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। इसी निराशा और मानसिक तनाव के चलते उसका गुस्सा जनसुनवाई में फूट पड़ा।
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