
झारखंड: रामगढ़ के सिद्धू-कान्हू मैदान में हर सुबह एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां कई महिलाएं ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स शूज में नहीं, बल्कि साड़ी और चप्पल पहनकर अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं।
इन महिलाओं का मुख्य लक्ष्य होम गार्ड की नौकरी पाना और खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। ये महिलाएं घर के कामकाज और बच्चों की देखभाल के साथ-साथ अपनी ट्रेनिंग को भी बखूबी संभाल रही हैं।
सोसो गांव की रहने वाली 32 वर्षीय विधवा कविता कुमारी रोजाना करीब आठ किलोमीटर का सफर तय करके इस मैदान में आती हैं। उनके पास न तो कोई ट्रैकसूट है और न ही दौड़ने वाले जूते, इसलिए वह साड़ी पहनकर ही अभ्यास करती हैं।
कविता शुरुआत में केवल अन्य उम्मीदवारों को देखने के लिए मैदान में आती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने खुद भी दौड़ने का फैसला किया। दो बच्चों की मां कविता का दौड़ते हुए एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
कविता ने बताया कि शुरुआत में उन्हें 1.6 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने में आठ मिनट का समय लगता था। अब अपने लगातार अभ्यास की बदौलत वह साड़ी में ही यह दूरी महज सात मिनट में पूरी कर लेती हैं।
रामगढ़ जिला प्रशासन ने हाल ही में होम गार्ड के 284 पदों पर भर्ती निकाली है। उपायुक्त रितुराज ने 19 सितंबर को इस अभियान की घोषणा की थी, जो 24 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच आयोजित किया जाएगा।
इस मैदान में हर सुबह सैकड़ों महिलाएं जुटती हैं और 'कड़ी मेहनत कभी बेकार नहीं जाती' के नारे के साथ पसीना बहाती हैं। यह दौड़ इन महिलाओं के लिए केवल एक शारीरिक परीक्षा नहीं है, बल्कि गरीबी से बाहर निकलने और बच्चों की शिक्षा सुरक्षित करने का एक सुनहरा मौका है।
इस भर्ती में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। इसके अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत का अलग कोटा रखा गया है, जिसने ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में एक नई उम्मीद जगाई है।
बुढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में ही दौड़ लगाती हैं। एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुनीता का कहना है कि साड़ी में दौड़ना उनके लिए असुविधाजनक नहीं है। उनके पति स्पोर्ट्सवियर खरीदने में असमर्थ थे, लेकिन अब सुनीता गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
गोला इलाके की रहने वाली मोनिका कुमारी ने यह दौड़ मात्र 6 मिनट और 4 सेकंड में पूरी कर ली। वहीं, एक फिटनेस एकेडमी से जुड़ी सोनी कुमारी का मानना है कि आरक्षण के कारण यह महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है। उनके लिए यह सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि परिवार का भविष्य संवारने का जरिया है।
ज्यादातर महिलाएं घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम खत्म करने के बाद ही मैदान पहुंचती हैं। फिटनेस कोच सिकंदर पांडे और एक अन्य मार्शल आर्ट ट्रेनर इन महिलाओं को मुफ्त में ट्रेनिंग दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक मेगा रेस में लगभग 2,500 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।
कोच सिकंदर पांडे बताते हैं कि ये महिलाएं सीधे अपनी रसोई का काम निपटाकर आती हैं। टी-शर्ट न होने के कारण वे साड़ी में दौड़ती हैं, लेकिन उनकी टाइमिंग और स्टैमिना हैरान करने वाला है। इन महिलाओं को पूरा विश्वास है कि नौकरी मिलने से उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा तय हो जाएगी।
इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा ऊंचाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण शामिल होंगे। उपायुक्त रितुराज ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फिटनेस और योग्यता के आधार पर पूरी तरह से पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
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