MP: गर्भवती महिला से थाने में मारपीट के आरोप पर गरमाया बालाघाट, 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन

मरार माली समाज ने किया आंदोलन का ऐलान, रैली-धरना और आमसभा के बाद एसडीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन; निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग
MP: गर्भवती महिला से थाने में मारपीट के आरोप पर गरमाया बालाघाट, 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन
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भोपाल। बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में दो महीने की गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के विरोध में मरार माली समाज ने 15 सितंबर को किरनापुर में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। समाज की ओर से कहा गया है कि आंदोलन के दौरान जिलेभर से समाज के लोग किरनापुर पहुंचेंगे और पीड़िता सावित्री चौधरी के साथ हुई कथित मारपीट के विरोध में आवाज उठाएंगे। समाज ने मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, पीड़िता को न्याय और परिवार को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग उठाई है।

समाज की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय

सोमवार को मरार माली समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष रमेश पंचे ने की। बैठक में किरनापुर थाने में गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट के मामले पर विस्तार से चर्चा की गई और आंदोलन की रणनीति तय की गई। समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी महिला के साथ पुलिस थाने में ही अमानवीय व्यवहार और मारपीट के आरोप सामने आते हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना जरूरी है।

बैठक में तय किया गया कि 15 सितंबर को किरनापुर में समाज की ओर से रैली निकाली जाएगी। इसके बाद धरना-प्रदर्शन और आमसभा का आयोजन किया जाएगा। आंदोलन के अंत में समाज की ओर से एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की जाएगी। समाज ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना है तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।

जिलेभर से समाज के लोगों के शामिल होने का दावा

मरार माली समाज के अध्यक्ष रमेश पंचे ने बताया कि आंदोलन को लेकर समाज के लोगों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि किरनापुर में होने वाले प्रदर्शन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से समाज के लोग शामिल होंगे। आंदोलन के माध्यम से प्रशासन के सामने पीड़िता की स्थिति और परिवार की समस्याओं को रखा जाएगा।

समाज की प्रमुख मांगों में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़िता को न्याय और परिवार को हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। समाज का कहना है कि जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

चोरी के मामले की जांच के दौरान सामने आया विवाद

दरअसल, यह पूरा मामला किरनापुर थाने में चोरी के एक मामले की जांच के दौरान सामने आया। 7 सितंबर को सामने आए इस मामले में कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी पर पुलिस द्वारा कथित तौर पर अमानवीय तरीके से मारपीट किए जाने के आरोप लगाए गए। मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब पुलिस कार्रवाई में गर्भवती महिला के साथ मारपीट के आरोप सामने आए।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने कार्रवाई करते हुए उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग की ओर से की गई इस प्रारंभिक कार्रवाई के बाद मामले की जांच को आगे बढ़ाया गया।

डीएसपी के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी मामले से जुड़े तथ्यों, पुलिस कार्रवाई और लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान, पीड़ित पक्ष के आरोप और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को देखा जा रहा है।

अब समाज के आंदोलन के ऐलान के बाद इस मामले पर प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। समाज की मांग है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

पीड़िता ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर लगाए मारपीट के आरोप

पीड़िता सावित्री चौधरी का आरोप है कि रात के समय किरनापुर थाने में पुरुष पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। पीड़िता के अनुसार वह गर्भवती थी, इसके बावजूद उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। आरोप सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया है।

मामले में महिला के गर्भवती होने की बात सामने आने के कारण समाज के लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, घटना के वास्तविक तथ्यों और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से हो सकेगी। फिलहाल एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।

विधायक अनुभा मुंजारे ने भी उठाई कार्रवाई की मांग

मामले को लेकर किरनापुर क्षेत्र की विधायक अनुभा मुंजारे ने भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विधायक ने थाने के सभी संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने, दोषी पाए जाने वालों को बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की मांग उठाई है।

विधायक का कहना है कि पुलिस थाने में किसी महिला के साथ इस तरह की घटना के आरोप बेहद गंभीर हैं और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कही है।

15 सितंबर के आंदोलन पर प्रशासन की नजर

मरार माली समाज द्वारा 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। समाज की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की बात कही गई है। रैली, धरना, आमसभा और ज्ञापन के जरिए समाज अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखेगा।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि आंदोलन के दौरान प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और एसआईटी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल पुलिसकर्मियों का निलंबन हो चुका है और चार सदस्यीय एसआईटी मामले की जांच कर रही है। समाज ने साफ कर दिया है कि वह निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय मिलने तक इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगा।

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