बलिया: रेप पीड़िता से चार्जशीट के बदले पुलिस इंस्पेक्टर ने की अश्लील डिमांड, ऑडियो वायरल होने पर SHO समेत दो निलंबित

वायरल ऑडियो में चार्जशीट के नाम पर रेप पीड़िता से यौन संबंध की मांग, एसपी ने एक्शन लेते हुए क्राइम इंस्पेक्टर और उभांव एसएचओ को किया सस्पेंड।
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यूपी पुलिससांकेतिक फोटो
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उत्तर प्रदेश: बलिया जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां उभांव थाने के एक पुलिस अधिकारी समेत दो इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और यह सख्त कार्रवाई की गई। इस वायरल क्लिप में कथित तौर पर एक इंस्पेक्टर रेप पीड़िता से केस की चार्जशीट दाखिल करने के एवज में यौन संबंध बनाने की मांग कर रहा था। इस मामले का मुख्य आरोपी वन विभाग का एक सब-इंस्पेक्टर है, जिसे 24 फरवरी को ही गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।

बुधवार को बलिया के एसपी ओमवीर सिंह ने इस पूरी घटना के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और ऑडियो क्लिप का गंभीरता से संज्ञान लिया गया और मामले की जांच सीओ रसड़ा आलोक कुमार गुप्ता को सौंपी गई। एसपी के अनुसार, यह ऑडियो क्लिप 1 अप्रैल से पहले उभांव थाने में क्राइम इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रहे नरेश मोहन और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत का है, जिसमें केस की चार्जशीट को लेकर सौदेबाजी की जा रही थी।

सीओ रसड़ा की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद इंस्पेक्टर मलिक (नरेश मोहन) और उभांव के एसएचओ संजय शुक्ला को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सीओ रसड़ा को सख्त निर्देश दिया गया है कि वह पीड़िता से सीधे बात करें और इस मामले में बिना किसी लापरवाही के आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

यह पूरा घटनाक्रम उभांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की रहने वाली रेप पीड़िता से जुड़ा है। पीड़िता ने 21 फरवरी को वन विभाग के एक एसआई के खिलाफ उभांव पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ एक मंदिर में शादी की थी और बाद में कोर्ट मैरिज करने का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे।

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने आरोपी पर कोर्ट मैरिज के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो उसने शादी के सारे सबूत मिटा दिए। इसके बाद आरोपी ने महिला को अपने साथ रखने से साफ तौर पर इनकार कर दिया, जिसके बाद पीड़िता को पुलिस की शरण लेनी पड़ी।

सीओ रसड़ा के मुताबिक, मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच संबंधित पुलिस चौकी प्रभारी को सौंप दी गई थी। इस केस में मार्च महीने में ही आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी थी और उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी थी।

इन सब के बावजूद, अप्रैल के पहले सप्ताह में उभांव थाने से ट्रांसफर किए गए इंस्पेक्टर मलिक ने मामले का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की। इस केस की जांच से उसका कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी वह चार्जशीट दाखिल कराने का झांसा देकर पीड़िता को फोन करने लगा और उसे अकेले में मिलने का दबाव बनाने लगा।

सीओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वायरल ऑडियो क्लिप के रूप में ठोस सबूत केवल इंस्पेक्टर मलिक के खिलाफ ही पाया गया है। हालांकि, रेप पीड़िता ने एसएचओ संजय शुक्ला पर भी इसी तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन वह एसएचओ के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने दोनों पर निलंबन की कार्रवाई की है।

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