
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली महिलाओं को इन दिनों एक भयानक ऑनलाइन प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। सेना का कथित तौर पर अपमान करने या प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने के आरोप में इन महिलाओं को जान से मारने और बलात्कार जैसी खौफनाक धमकियां दी जा रही हैं। इतना ही नहीं, इंटरनेट पर उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करके (डॉक्सिंग) उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है। इस मामले पर द हिन्दू के लिए सुरुचि कुमारी ने विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है.
बीती 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म होने के तुरंत बाद, 23 वर्षीय एमएससी की छात्रा श्रद्धा सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सात सेकंड का एक रील वीडियो पोस्ट किया था। इस अकाउंट पर उनके 3.78 लाख फॉलोअर्स हैं। महज एक घंटे के भीतर इस वीडियो को दस लाख से ज्यादा बार देखा गया, जिसके बाद विवाद बढ़ता देख उन्होंने इसे हटा दिया। पांच दिन बीत जाने और दो बार सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के बावजूद, श्रद्धा का कहना है कि उन्हें अब भी डरावनी धमकियां मिल रही हैं।
श्रद्धा के अनुसार, वह वीडियो केवल 'मनोरंजन के उद्देश्य' से बनाया गया था। क्लिप में वह प्रदर्शन स्थल पर नजर आ रही थीं और उनके पीछे रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान खड़े थे। इस वीडियो के बैकग्राउंड में टॉयलेट क्लीनर का एक विज्ञापन वाला संगीत लगा हुआ था। जल्द ही मीम पेजों और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इसे यह दावा करते हुए वायरल करना शुरू कर दिया कि छात्रा ने सेना का अपमान किया है।
लगातार बढ़ते दबाव के कारण उन्होंने एक घंटे में वीडियो हटा दिया और तीन दिन बाद दो माफीनामे भी पोस्ट किए, लेकिन धमकियों का सिलसिला नहीं रुका। इस मामले में पड़ताल करने पर यह सामने आया है कि श्रद्धा अकेली नहीं हैं जो इस तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल कई अन्य महिलाओं को भी इसी तरह की डॉक्सिंग, रेप की धमकियों और व्यक्तिगत जानकारी लीक होने का शिकार होना पड़ा है।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर कई हैंडल्स इन महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो जमकर साझा कर रहे हैं। इन पोस्ट्स के जरिए अकाउंट चलाने वाले लोग अपने फॉलोअर्स को उकसा रहे हैं कि वे इन महिलाओं को 'सबक सिखाएं'।
एक महिला को तो एक पोस्ट के जरिए बाकायदा 'मोस्ट वांटेड' घोषित कर दिया गया और यह संदेश फैलाया गया कि उसकी तलाश की जा रही है। 30 जुलाई (गुरुवार) की दोपहर तक, इंटरनेट पर ऐसे पोस्ट वायरल होने लगे जिनमें दावा किया गया कि इस महिला की पहचान कर ली गई है। इन पोस्ट्स में उसका नाम, शहर और नोएडा में दर्ज की गई एक जीरो एफआईआर की कॉपी भी सार्वजनिक कर दी गई।
यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत दर्ज की गई है। वायरल हो रहे कथित वीडियो में इस महिला पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहने का आरोप लगाया गया है। इंस्टाग्राम पर 1.6 मिलियन फॉलोअर्स वाले अनूप खेतान ने सबसे पहले एक वीडियो शेयर करते हुए यह दावा किया था कि 'मोस्ट वांटेड' महिला की पहचान हो चुकी है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हो चुके हैं।
इस पूरी स्थिति पर बात करते हुए श्रद्धा सिंह ने बताया कि उन्हें हर मिनट धमकी भरे कॉल और मैसेज आ रहे हैं। उनके एक पोस्ट पर किसी ने खौफनाक कमेंट करते हुए लिखा कि अगर वह कहीं दिखी तो वह उसे जान से मार देगा। उनका कहना है कि पांच दिन हो गए हैं लेकिन लोग लगातार उनका वीडियो और माफीनामा रीपोस्ट करके गालियां दे रहे हैं।
श्रद्धा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि यह अब सिर्फ ट्रोलिंग नहीं, बल्कि सीधा मानसिक उत्पीड़न है। उनका फोन नंबर और घर का पता सार्वजनिक कर दिया गया है। हालात इस कदर बिगड़ गए कि उनकी मां के मोबाइल पर भी बेहद भद्दे संदेश आने लगे, जिसके चलते उन्हें अपनी मां का इंस्टाग्राम अकाउंट हमेशा के लिए हटाना पड़ा।
छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स से अपना वीडियो हटाने का अनुरोध किया, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन लोगों ने श्रद्धा को बताया कि उन्हें इस वीडियो को पोस्ट करने के पैसे मिले हैं। तब उन्हें अहसास हुआ कि वह केवल एक विशेष एजेंडे को फैलाने का टूल बन गई हैं।
अपने बचाव में श्रद्धा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सेना का कोई अपमान नहीं किया था। वीडियो में दिख रहे जवान सेना के नहीं बल्कि आरएएफ के थे और उन्होंने उस क्लिप में किसी के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला था। उनका आरोप है कि डीडी न्यूज ने भी उनके वीडियो को सेना के अपमान के तौर पर ही प्रसारित किया। तनाव में आकर उन्होंने अपने माफीनामे में भी गलती से आरएएफ को सेना बोल दिया था, लेकिन इसके बावजूद लोगों की हिंसक प्रतिक्रियाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
साल 2020 से ऑनलाइन कंटेंट बना रहीं श्रद्धा पेशे से एक योग प्रशिक्षक भी हैं। लगातार मास रिपोर्टिंग के कारण इंस्टाग्राम ने उनके अकाउंट के मैसेजिंग जैसे कई फीचर्स को फिलहाल बंद कर दिया है। लोगों ने उनकी बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर से उनका फोन नंबर और पता निकाल लिया, जिसके कारण उनके कई क्लाइंट्स भी टूट गए हैं।
इस बीच, ऐसी सामग्री साझा करने वाले कई अकाउंट्स ने हाल के दिनों में ऐसे वीडियो को भी काफी हवा दी है जिनमें प्रदर्शनकारियों पर अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने या पुलिस से हाथापाई करने के आरोप लगाए गए हैं। ये लोग पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांगों की भी कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
नाम गुप्त रखने की शर्त पर 22 वर्षीय एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि उनकी तस्वीरों को एक कोलाज में डालकर ऑनलाइन वायरल किया गया। इस पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द कहने और 'भारत विरोधी' रुख अपनाने के आरोप में 12 महिलाओं की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की गई थी।
तीन लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाली इस कंटेंट क्रिएटर ने बताया कि उनके पोस्ट भद्दे कमेंट्स और रेप की धमकियों से भर गए हैं। उनका कहना है कि उन्हें खुद को अभिव्यक्त करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने एक खौफनाक वाकया साझा करते हुए बताया कि जब वह अपनी मां के साथ बाजार में थीं, तब दो अज्ञात लोगों ने पास आकर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।
ये वायरल वीडियो देखकर उनके माता-पिता को रिश्तेदारों के फोन आ रहे हैं। हालांकि, तमाम दबावों के बावजूद इस युवा प्रदर्शनकारी ने साफ कर दिया है कि वह न तो अपना अकाउंट डिएक्टिवेट करेंगी और न ही अपने पोस्ट इंटरनेट से हटाएंगी।
महिलाओं को निशाना बनाने वाले इन पोस्ट्स को द जयपुर डायलॉग्स, हिंदुत्व विजिलेंट और कई अन्य अकाउंट्स द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर प्रमोट किया गया। इंस्टाग्राम यूजर रोहित शर्मा ने एक पोस्ट में दावा किया कि ऐसे लोगों की एक सूची तैयार कर ली गई है और उन्होंने अपने फॉलोअर्स से इन महिलाओं की लाइव लोकेशन शेयर करने की अपील की। एक अन्य अकाउंट, इंडिक मैट्रिक्स ने भी एक प्रदर्शनकारी का घर का पता और फोन नंबर जानने का दावा किया है।
जानकारी के मुताबिक, महिलाओं को निशाना बनाने वाले कुछ वीडियो 23 जुलाई से ही इंटरनेट पर शेयर किए जा रहे हैं। द जयपुर डायलॉग्स और हिंदुत्व विजिलेंट ने हाल ही में बताया था कि उन्हें एक महिला के बारे में शेयर किए गए वीडियो पर 'टेकडाउन नोटिस' मिले हैं। इस शिकायत में उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो को 'अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण' करार दिया गया था।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुत्व विजिलेंट की ओर से कहा गया कि उन्होंने केवल शिकायतकर्ता द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को ही साझा किया था। साथ ही उन्होंने उचित कानूनी कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को टैग किया था। इस अकाउंट ने किसी की भी निजी जानकारी अपने पास होने के दावों से साफ इनकार किया है।
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