MP में ‘नातरा झगड़ा’ कुप्रथा: 25 लाख की मांग पूरी न होने पर किसान की फसल काटकर दी जान से मारने की धमकी, जानिए पूरा मामला?

प्रशासनिक अभियान के बावजूद नहीं थम रही सामाजिक कुरीति; पीड़ित परिवार ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, गांव में आक्रोश
MP में ‘नातरा झगड़ा’ कुप्रथा: 25 लाख की मांग पूरी न होने पर किसान की फसल काटकर दी जान से मारने की धमकी, जानिए पूरा मामला?
Published on

भोपाल। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में सामाजिक कुप्रथा ‘नातरा झगड़ा’ एक बार फिर गंभीर विवाद और आपराधिक घटना का कारण बनकर सामने आई है। जिले के सिटी थाना क्षेत्र के एक गांव में कथित तौर पर 25 लाख रुपये की झगड़ा राशि न देने पर खेत में खड़ी गेहूं की फसल काटकर नुकसान पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला दर्ज हुआ है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा वर्षों से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन ताजा घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का असर आखिर क्यों नहीं दिख रहा।

पीड़ित किसान राधेश्याम गुर्जर (60) निवासी जेपला अपने बेटे हेमराज के साथ थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई प्रभुलाल ने चार-पांच साल पहले अपनी बेटी की सगाई ग्राम सागोडिया निवासी भगवान सिंह के छोटे बेटे मांगू से की थी। आरोप के मुताबिक लड़के के पिता भगवान सिंह की शराब पीने की आदत के कारण करीब एक वर्ष पहले यह सगाई तोड़ दी गई थी। सगाई टूटने के बाद से ही विवाद शुरू हुआ और राधेश्याम के अनुसार भगवान सिंह और उसका बेटा हरीओम उन्हें कई बार ब्यावरा में मिलकर 25 लाख रुपये झगड़े के रूप में देने का दबाव बना रहे थे।

धमकी दी और काट ले गए फसल!

शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने धमकी दी थी कि यदि झगड़े की रकम नहीं दी गई तो वे गांव में फसल काट देंगे, आग लगा देंगे और जान से मार देंगे। 14 फरवरी की सुबह करीब 7 बजे जब गांव के सरपंच घनश्याम गुर्जर और चौकीदार भंवरलाल खेत की ओर गए तो वहां खड़ी गेहूं की फसल कटी हुई मिली। खेत में एक पर्ची भी पड़ी थी, जिस पर कथित तौर पर लिखा था- “राधेश्याम नुकसान का हकदार।” यह दृश्य देखकर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और मामले की सूचना तुरंत पीड़ित परिवार को दी गई।

राधेश्याम का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपियों को फोन कर पूछा तो उन्होंने कथित रूप से स्वीकार किया कि फसल उन्होंने ही काटी है और यदि 25 लाख रुपये नहीं दिए गए तो आगे भी इसी तरह नुकसान पहुंचाया जाएगा। आरोप है कि उन्होंने गांव के अन्य किसानों की फसल काटने और पकने पर आग लगाने की धमकी भी दी, साथ ही राधेश्याम के हाथ-पैर तोड़कर जान से मारने की बात कही। पीड़ित किसान के अनुसार करीब एक ट्रॉली गेहूं की फसल खेत में कटी पड़ी मिली, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि ग्रामीण समाज में जड़ जमाए उस सामाजिक ढांचे की भी झलक दिखाती है, जहां ‘झगड़ा’ जैसी प्रथा अभी भी प्रभावी है। प्रशासन समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाने का प्रयास करता है कि इस तरह की मांग करना या दबाव बनाना गैरकानूनी है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में यह परंपरा सामाजिक दबाव और भय के कारण जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक समाज खुद आगे बढ़कर ऐसी कुप्रथाओं का विरोध नहीं करेगा, तब तक सिर्फ सरकारी अभियान पर्याप्त नहीं होंगे।

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गांव में घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है और ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस तरह की कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

द मूकनायक से बातचीत करते हुए समाजशास्त्री डॉ. इम्तियाज खान ने कहा कि “नातरा झगड़ा जैसी प्रथाएं दरअसल पारंपरिक सामाजिक संरचना की देन हैं, जहां रिश्तों को मान-सम्मान और आर्थिक लेनदेन से जोड़ा जाता रहा है। लेकिन आधुनिक कानून और संवैधानिक मूल्यों के दौर में ऐसी प्रथाओं का कोई औचित्य नहीं बचता, क्योंकि यह न केवल महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है बल्कि समाज में भय और असमानता का माहौल भी पैदा करती है।”

उन्होंने आगे कहा कि “जब किसी परिवार से दबाव बनाकर लाखों रुपये मांगे जाते हैं या धमकी दी जाती है, तो यह परंपरा नहीं बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। जरूरत इस बात की है कि समाज शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से खुद इन कुरीतियों का विरोध करे, तभी प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक बदलाव भी संभव होगा।”

क्या है नातरा-झगड़ा प्रथा?

नातरा झगड़ा एक सामाजिक कुप्रथा है जिसमें सगाई या विवाह टूटने, या लड़की के दूसरे रिश्ते में जाने पर पहले पक्ष द्वारा लड़की या उसके परिवार से कथित “मुआवज़े” के नाम पर बड़ी रकम मांगी जाती है; यह रकम देने के लिए अक्सर दबाव, धमकी, सामाजिक बहिष्कार या हिंसा तक की नौबत आ जाती है, जबकि भारतीय कानून में ऐसी मांग का कोई वैध आधार नहीं है और इसे जबरन वसूली व आपराधिक धमकी जैसे अपराधों की श्रेणी में माना जा सकता है, इसलिए इसे समाज पर बोझ और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ मानी जाने वाली कुरीति समझा जाता है।

MP में ‘नातरा झगड़ा’ कुप्रथा: 25 लाख की मांग पूरी न होने पर किसान की फसल काटकर दी जान से मारने की धमकी, जानिए पूरा मामला?
MP बालाघाट के आदिवासी वन क्षेत्रों में बॉक्साइट खनन का विरोध तेज, जनसुनवाई से पहले संगठनों हुए एकजुट, जानिए क्या है मामला?
MP में ‘नातरा झगड़ा’ कुप्रथा: 25 लाख की मांग पूरी न होने पर किसान की फसल काटकर दी जान से मारने की धमकी, जानिए पूरा मामला?
MP: ग्वालियर हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा को लेकर तेज़ हुई सियासत, संकल्प यात्रा निकालेगी ASP-भीम आर्मी
MP में ‘नातरा झगड़ा’ कुप्रथा: 25 लाख की मांग पूरी न होने पर किसान की फसल काटकर दी जान से मारने की धमकी, जानिए पूरा मामला?
MP: शहडोल में CM के काफिले को काले झंडे दिखाने पर नाबालिग को जेल भेजा, बोर्ड परीक्षा छूटी! कौन जिम्मेदार?

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com