
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने चालू वित्तीय वर्ष का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसका आकार 19 हजार 287 करोड़ 32 लाख रुपये है। इस बजट पर 23 फरवरी को चर्चा तय की गई है और साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन के पटल पर रखा गया। लेकिन बजट की औपचारिक कार्यवाही से अधिक सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनस्वास्थ्य मुद्दों और सामाजिक न्याय से जुड़े सवालों ने माहौल गरमा दिया।
सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के बयान की रही, जिन्होंने आरोप लगाया कि एससी-एसटी क्षेत्रों के विकास के लिए जारी बजट राजनीतिक आधार पर बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भाजपा के विधायक हैं या जहां पार्टी जीत सकती है, वहां योजनाएं पहुंचती हैं, जबकि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों की उपेक्षा होती है।
बरैया ने दावा किया कि पहले अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को डायरेक्ट लोन जैसी योजनाओं से मदद मिलती थी, लेकिन अब वे योजनाएं बंद हो चुकी हैं और बैंक भी आवेदकों को बहाने बनाकर लौटा देते हैं। उनका कहना था कि अगर यही स्थिति रही तो कमजोर वर्गों की हालत और खराब होगी।
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ अकील गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का संकल्प लेकर आए। इस पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिदों में मुल्ला-मौलवियों से कसम दिला दी जाए तो गाय कटनी बंद हो जाएगी। इस बयान पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और सदन में कुछ समय तक शोर-शराबा हुआ।
सदन के भीतर बहस के साथ-साथ बाहर भी राजनीतिक गर्माहट दिखी। कांग्रेस विधायकों ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के विरोध में प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार गंदे पानी की बोतल लेकर विधानसभा पहुंचे और गांधी प्रतिमा के सामने नारेबाजी की। सिंघार ने आरोप लगाया कि इंदौर की जनता श्मशान जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियों पर बैठे हैं। तराना (उज्जैन जिला) से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि इस घटना ने प्रशासन और सरकार को विश्व स्तर पर शर्मसार किया है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान आतिफ अकील ने भोपाल में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नसबंदी और वैक्सीनेशन पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद न तो कुत्तों की संख्या नियंत्रित हो रही है और न ही काटने की घटनाएं कम हो रही हैं। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि नगर निगम हर घटना को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करता है और मौसम, भोजन की उपलब्धता, ब्रीडिंग सीजन व बीमारियों जैसे कारणों से आक्रामकता बढ़ती है।
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला उठाते हुए सरकार पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं कमजोर हैं और कई सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा। वाल्मीकि ने राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल उपलब्धियां गिनाने से काम नहीं चलेगा, 2047 तक का स्पष्ट रोडमैप भी सदन के सामने रखा जाना चाहिए।
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