राजस्थान में आदिवासी युवक के साथ बर्बरता: निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया, पेशाब पिलाया

समाज एकजुट होकर कर रहा न्याय की मांग, आसपुर MLA बोले- मानवता के खिलाफ अपराध
इस अमानवीय घटना के सप्ताह भर बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं जिससे समाज में आक्रोश फ़ैल रहा है, भीम आर्मी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन भी हुआ।
इस अमानवीय घटना के सप्ताह भर बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं जिससे समाज में आक्रोश फ़ैल रहा है, भीम आर्मी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन भी हुआ।AI generated image
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जालोर- राजस्थान के जालोर जिले से एक ऐसा अमानवीय और कलंकित करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश की साख को शर्मसार कर दिया है। एक युवक के साथ न सिर्फ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई, बल्कि उसे निर्वस्त्र कर उसका वीडियो बनाया गया और फिर उसे पेशाब पिलाने जैसा घिनौना कृत्य भी किया गया। पीड़ित युवक ने रानीवाडा पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इस अमानवीय घटना के सप्ताह भर बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं जिससे समाज में आक्रोश फ़ैल रहा है, भीम आर्मी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन भी हुआ। शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाजजनों ने जालोर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।

पीड़ित 28 वर्षीय प्रकाश कुमार भील पुत्र जितेंद्र कुमार ने अपनी FIR में बताया कि वह वर्ष 2012 से अपने मामा अजाराम के यहां धामसीन (तहसील रानीवाडा) में रह रहे थे।
पीड़ित ने बताया 28 मई की रात करीब 11 बजे माधुसिंह पुत्र पृथ्वीसिंह अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी में दो अन्य व्यक्तियों के साथ उसके घर पहुंचे। आरोप है कि माधुसिंह ने उसको गाड़ी में बैठने का दबाव बनाया। मना करने पर तीनों ने उसके के साथ मारपीट शुरू कर दी, उसे जबरदस्ती गाड़ी में डाला और खाखरिया ले गए।

आरोपियों ने पीड़ित को बडगाँव हाईवे के किनारे झाड़ियों के पास ले जाकर शराब पीना शुरू कर दिया। जब प्रकाश ने वहां से भागने की कोशिश की, तो माधुसिंह ने गाड़ी में रखे लोहे के सरिये से उसके बाएं पैर की नली पर वार कर उसे घायल कर दिया। इसके बाद तीनों ने गाड़ी के अंदर ही पीड़ित के साथ जमकर मारपीट की। FIR के मुताबिक, जब प्रकाश ने पूछा कि क्यों मार रहे हो, तो माधुसिंह ने कहा, "साले नीच %$डे, तूने अपने मामा-मामी को मेरे यहां काम करने से रोक दिया।"

आरोपियों ने पीड़ित को निर्वस्त्र कर दिया और पूरी रात बारी-बारी से उसके साथ मारपीट करते रहे। इसके बाद उन्होंने पीड़ित को माधुसिंह के घर के माड़ में ले जाकर उसकी नग्न अवस्था का वीडियो बनाया। फिर तीनों उसे खाखरिया रोड पर मामाजी के थान के पास ले गए, जहां माधुसिंह ने पीड़ित को पेशाब पिलाया और उसके शरीर पर भी पेशाब कर दिया। अधमरी हालत में पीड़ित को नंगा ही सड़क पर छोड़ दिया गया। पीड़ित किसी तरह रात में ही पैदल अपने घर पहुंचा।

ये विवाद की वजह

जब पीड़ित प्रकाश ने पूछा कि उसे क्यों मारा जा रहा है, तो मुख्य आरोपी माधुसिंह ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "तेरे मामा-मामी और उनका परिवार मेरे बेरे पर काम करने आते थे, पर तूने ही उन्हें बंद करा दिया।" इस पर प्रकाश ने जवाब दिया कि आप मेरी मामी पर बुरी नज़र रखते हो और उनसे बेगार (जबरन मजदूरी) करवाते थे, इसीलिए अब वे काम पर नहीं आते। यह सुनते ही माधुसिंह और अधिक क्रोधित हो गया और उसने अपने साथियों से कहा, "साले को नंगा करो और और अधिक पीटो।" इसके बाद तीनों आरोपियों ने प्रकाश को निर्वस्त्र कर दिया और पूरी रात बारी-बारी से उसके साथ मारपीट करते रहे। इस जघन्य हमले के कारण प्रकाश के सिर, आंखों, चेहरे और पूरे शरीर पर गंभीर चोटों के निशान बन गए।

पीड़ित की शिकायत पर रानीवाडा पुलिस थाने में IPC (BNS 2023) की धाराएं 133, 140(3), 115(2), 3(5) और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं 3(i), (r), (s), (a), 3(2), (va) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने पीड़ित के शरीर पर घावों का मेडिकल परीक्षण भी करवा लिया है।

MLA उमेश डामोर ने लगाई सरकार को लताड़

इस मामले को लेकर भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के विधायक (आसपुर) उमेश डामोर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा,
"जालोर में आदिवासी समाज के युवक प्रकाश भील के साथ हुई यह अमानवीय घटना ने पूरे राजस्थान को शर्मसार कर दिया है। किसी भी व्यक्ति के साथ जातिसूचक शब्दों से अपमान करना और इस प्रकार की घिनौनी हरकतें करना मानवता के खिलाफ अपराध है।"

डामोर ने राजस्थान सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और SC/ST एक्ट के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा प्रदान की जाए। घटना को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश व्याप्त हो गया। समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि 21वीं सदी में ऐसा कृत्य राजस्थान जैसे राज्य की छवि को धूमिल करता है। प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में त्वरित और पारदर्शी जांच कर संवेदनशीलता दिखाए।

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