छत्तीसगढ़: कांकेर में आदिवासी महिला का शव 3 दिन से मोर्चरी में, गांव बोला- दफनाया तो जमीन होगी अपवित्र!

मृतका के पति कमलेश मंडावी ने इस मामले में जिला प्रशासन को औपचारिक शिकायत सौंपी है, जिसमें दफनाने में बाधा डालने वालों के नाम और परिवार को मिली धमकियों का विवरण दिया गया है।
परिवार को न तो गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में और न ही निजी पारिवारिक जमीन पर दफनाने की इजाजत दी जा रही है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और हिंदू धर्म में पुन: परिवर्तित होने की मांग की।
परिवार को न तो गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में और न ही निजी पारिवारिक जमीन पर दफनाने की इजाजत दी जा रही है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और हिंदू धर्म में पुन: परिवर्तित होने की मांग की।AI generated symbolic image
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कांकेर- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक आदिवासी ईसाई परिवार को अपने परिजन को दफनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य भर के गांवों में आदिवासी ईसाइयों की कब्रों को खोदे जाने के मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए इसे तुरंत रोकने का निर्देश दिया था।

प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस के साइमन दिगबाल तांडी ने बताया कि संबाई मंडावी (34) नाम की महिला की 24 फरवरी को अस्पताल ले जाते समय सांस और हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण मृत्यु हो गई। उनके पति कमलेश मंडावी अंतागढ़ तहसील के दुर्गोंदल थाना क्षेत्र के अमोदी गांव के पंडरीपुरा निवासी हैं, कमलेश को अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार करने से रोका जा रहा है।

बताया गया है कि परिवार को न तो गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में और न ही निजी पारिवारिक जमीन पर दफनाने की इजाजत दी जा रही है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और 'घर वापसी' (हिंदू धर्म में पुन: परिवर्तित होने) की मांग की। आरोप है कि विरोध कर रहे लोगों ने परिवार को धमकी दी है, जिसमें मारपीट, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और यदि ईसाई रीति-रिवाज से दफनाया गया तो शव को बाहर निकालने की बात कही गई है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि ईसाई रीति-रिवाज से दफनाने से स्थानीय देवी-देवता और जमीन अपवित्र हो जाएगी।

इस विवाद के चलते संबाई मंडावी का पार्थिव शरीर दुर्गोंदल के स्थानीय सरकारी अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ है, जिससे शोक संतप्त परिवार की पीड़ा और बढ़ गई है।

कमलेश मंडावी ने इस मामले में जिला प्रशासन को औपचारिक शिकायत सौंपी है, जिसमें दफनाने में बाधा डालने वालों के नाम और परिवार को मिली धमकियों का विवरण दिया गया है।

यह घटना 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश के बाद हुई है, जिसमें छत्तीसगढ़ के गांवों में आदिवासी ईसाइयों की कब्रों की खुदाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। अधिवक्ता समूहों का कहना है कि यह मामला जमीनी स्तर पर न्यायिक सुरक्षा के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने परिवार के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार को सुनिश्चित करने, संवैधानिक गारंटी को बनाए रखने और कमजोर अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है।

परिवार को न तो गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में और न ही निजी पारिवारिक जमीन पर दफनाने की इजाजत दी जा रही है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और हिंदू धर्म में पुन: परिवर्तित होने की मांग की।
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परिवार को न तो गांव के सार्वजनिक कब्रिस्तान में और न ही निजी पारिवारिक जमीन पर दफनाने की इजाजत दी जा रही है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और हिंदू धर्म में पुन: परिवर्तित होने की मांग की।
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