
मध्य प्रदेश: बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से अधिक बच्चों की मौत ने एक बड़े सियासी विवाद का रूप ले लिया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार राज्य सरकार पर हमलावर है और जवाबदेही की मांग कर रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए 1 अक्टूबर को इन गांवों का दौरा करने वाले हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के जरिए इस दौरे की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी दी है कि राहुल गांधी बैहर और बिरसा क्षेत्रों का सघन दौरा करेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों के भीतर इन आदिवासी बहुल गांवों में 30 से ज्यादा मासूमों की जान जा चुकी है। जान गंवाने वाले ज्यादातर बच्चे बैगा और गोंड समुदाय से ताल्लुक रखते थे।
प्रशासन के आंकड़ों और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी में अब भी विसंगतियां बनी हुई हैं। हालांकि, सितंबर में आई एक रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों का आंकड़ा 30 के पार पहुंच चुका है।
ग्रामीणों और विपक्षी नेताओं ने इस त्रासदी के पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी, कुपोषण, दूषित पानी और इलाज मिलने में होने वाली देरी को मुख्य कारण बताया है। अभी तक की जांच में किसी एक विशेष बीमारी या वायरस को इन मौतों की एकमात्र वजह नहीं माना गया है।
केंद्रीय जांच में इन मौतों के लिए कई अलग-अलग कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें खसरा, मलेरिया, संक्रमण, सांस की समस्या, निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन), कुपोषण, एनीमिया और सदमा जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं।
कांग्रेस इस मसले पर राज्य सरकार को लगातार घेर रही है। राहुल गांधी के इस प्रस्तावित दौरे को, इस स्थानीय मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत डिपके ने भी इन प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा किया था। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर तीखे सवाल खड़े किए थे।
इस दौरान स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के बीच तीखी नोकझोंक और विरोध प्रदर्शन के वीडियो भी सामने आए हैं।
अब यह पूरा मामला अदालत की दहलीज तक भी पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और बच्चों की मौत के संबंध में दस्तावेज व जवाब तलब किए हैं।
दूसरी तरफ, प्रशासन ने दावा किया है कि प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य निगरानी, जांच और इलाज की व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग मौसमी बीमारियों पर काबू पाने के लिए बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर क्षेत्र के 57 गांवों में एक सघन अभियान चला रहा है।
राहत कार्य के तहत अब तक 1,255 बच्चों को आयरन सिरप पिलाई गई है, जबकि 1,145 बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियां दी गई हैं।
टीकाकरण अभियान के तहत 28 सितंबर को छह अलग-अलग सत्रों के माध्यम से 284 बच्चों को टीके लगाए गए। अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो अब तक 689 सत्रों के जरिए 28,296 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है।
मंगलवार को जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक, 28 सितंबर तक इलाके में 45,458 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। इस जांच में सर्दी, बुखार, मलेरिया, खसरा और त्वचा रोगों से पीड़ित 7,549 मरीजों की पहचान हुई।
इन चिह्नित मरीजों में से 6,861 लोगों का इलाज उनके घर पर ही किया गया, जबकि 688 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रशासन के मुताबिक इनमें से 662 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।
प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य फोकस बच्चों के स्वास्थ्य पर बना हुआ है। इसके लिए हजारों लाभार्थियों को विटामिन ए, ओआरएस, जिंक, आयरन सिरप और एल्बेंडाजोल बांटा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि इलाके में बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण और मच्छरों पर नियंत्रण के उपाय लगातार जारी हैं, जिनमें निगरानी के साथ-साथ कीटनाशकों का छिड़काव और फॉगिंग शामिल है।
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