
भोपाल। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जगला गांव पहुंचे। यहां उन्होंने बीमारी और कुपोषण से बच्चों की मौत से प्रभावित बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। राहुल गांधी करीब एक घंटे तक ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते रहे। इस दौरान आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उनसे मिलने पहुंचे।
राहुल गांधी का पिछले 12 दिनों में मध्य प्रदेश का यह दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 19 सितंबर को इंदौर पहुंचे थे।
करीब डेढ़ हजार लोग राहुल गांधी से मिलने पहुंचे
राहुल गांधी के जगला पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां पहुंचे। कांग्रेस के मुताबिक, करीब डेढ़ हजार लोग उनसे मिलने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार, राशन, शिक्षा और वन अधिकार से जुड़ी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं।
राहुल गांधी ने बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से भी बातचीत की और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ली।
आदिवासी देश के पहले मालिक
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी देश के मूल और पहले मालिक हैं। उन्हें संविधान और कानून के तहत अपने अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय को उसका पूरा हक नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बीमारी और कुपोषण से बच्चों की मौत के बावजूद प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले को वे लोकसभा में उठाएंगे।
परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिलने का दावा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता और मुआवजा भी पूरी तरह नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कई परिवार अब भी सहायता से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों को पूरी सहायता देने की मांग की।
मनरेगा और वन अधिकार कानून का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने कहा कि क्षेत्र में मनरेगा का काम प्रभावित है और आदिवासियों को वन अधिकार कानून के तहत जमीन के पट्टे नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने सरकार से वन अधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की।उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही उनके पारंपरिक भूमि अधिकारों को भी सुरक्षित किया जाना चाहिए।
स्कूल और अस्पतालों की सुविधाओं पर भी सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से क्षेत्र में बेहतर स्कूल और अस्पताल उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास की बातें तो करती है, लेकिन जब आदिवासी परिवारों को वास्तविक मदद की जरूरत होती है, तब उन्हें पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिलती।
लाड़ली बहना योजना की राशि का भी जिक्र
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार को एक योजना का लाभ मिल रहा है तो दूसरी योजना के लाभ से उसे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि दो योजनाएं पात्र परिवारों के लिए लागू हैं तो उन्हें दोनों योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
वनवासी नहीं, आदिवासी कहना चाहिए
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समुदाय के लिए 'वनवासी' शब्द के बजाय 'आदिवासी' शब्द का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी और पहले मालिक हैं और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा जमीन से जुड़े अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सुविधाओं के लिए काम किया जाएगा।
पहले स्कूल पहुंचे, बच्चों से मिड-डे मील की जानकारी ली
जगला गांव पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल का दौरा किया। यहां उन्होंने स्कूली बच्चों से बातचीत की और मिड-डे मील सहित स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
तीन महीने में 32 आदिवासी बच्चों की मौत का दावा
बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में पिछले तीन महीनों में कुपोषण और मलेरिया समेत विभिन्न बीमारियों से 32 आदिवासी बच्चों की मौत होने का दावा किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
इन मौतों के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं, कुपोषण और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा ने दौरे को राजनीतिक बताया
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर भाजपा ने इसे राजनीतिक दौरा बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि बच्चों की मौत और आदिवासी परिवारों की समस्याएं गंभीर जनहित के मुद्दे हैं, जिन्हें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखकर देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने दौरे के दौरान कहा कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को वे संसद में उठाएंगे और सरकार से उनके अधिकार तथा प्रभावित परिवारों को सहायता दिलाने की मांग करेंगे।
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