
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के एक दहेज हत्या मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी सास की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी एफआईआर या शिकायत को केवल तभी रद्द किया जा सकता है जब उसमें लगाए गए आरोप किसी अपराध का खुलासा न करते हों या आरोपी के खिलाफ कोई मामला ही न बनता हो।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक कार्यवाही को रद्द करना अभियोजन पक्ष की वैधता तय करने जैसा होगा। मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर समय से पहले ही ट्रायल करना कानून की नजर में पूरी तरह अनुचित है।
फिरोजाबाद की रहने वाली निर्मला देवी की याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस चवन प्रकाश ने 24 सितंबर को अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि दहेज की मांग, क्रूरता और दहेज हत्या से जुड़े आरोप एक निरंतर चलने वाली घटनाओं की कड़ी का हिस्सा होते हैं, जो संहिता के प्रावधानों के तहत आते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि इस मामले में तथ्य और कानून के मिले-जुले सवाल शामिल हैं। ऐसे जटिल सवालों का निपटारा केवल एक निष्पक्ष ट्रायल के जरिए ही संभव है।
जज ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को ट्रायल के दौरान अपना बचाव करने का पूरा अवसर मिलेगा। वे कानून के अनुसार अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह कर सकेंगे और यदि कोई बचाव का सबूत हो, तो उसे अदालत में पेश कर सकेंगे।
इस दर्दनाक मामले की शुरुआत 4 मई, 2021 को हुई थी, जब मृतका प्रतिभा यादव की शादी कृष्णकांत के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे ससुराल में दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। इसी क्रूरता से तंग आकर वह 22 जून, 2024 को अपने मायके लौट गई थी।
ससुराल वालों के लगातार अनुरोध और आश्वासनों के बाद प्रतिभा 25 जनवरी, 2025 को वापस अपने पति के घर चली गई। लेकिन 15 फरवरी, 2025 को उसने अपनी मां को फोन पर बताया कि उसकी सास और ननद सपना ने उसे घसीटा है और उसके साथ शारीरिक मारपीट की है।
18 फरवरी, 2025 को प्रतिभा की अपनी मां से आखिरी बार बात हुई थी। उसी रात (18/19 फरवरी) वह ससुराल में बेहोशी की हालत में मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां छह दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद मृतका के भाई ने फिरोजाबाद के टूंडला पुलिस स्टेशन में मामले की एफआईआर दर्ज कराई।
अदालत में आरोपी सास के वकील रघुवंश मिश्रा ने दलील दी कि प्रतिभा की मौत स्वाभाविक थी। बचाव पक्ष का कहना था कि यह मौत मेडिकल जटिलताओं के कारण आए कार्डियक अरेस्ट से हुई है।
वकील ने तर्क दिया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं। इस प्रावधान के तहत मौत का "अप्राकृतिक" होना या "सामान्य परिस्थितियों के अलावा" होना जरूरी है, जो कि बचाव पक्ष के अनुसार इस मामले में नहीं था।
इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए पीड़ित पक्ष (मृतका के भाई) की वकील तान्या पांडे ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रतिभा की मौत शादी के सात साल के भीतर हुई है और अभियोजन पक्ष के अनुसार, मौत से ठीक पहले उसे दहेज की मांग को लेकर भारी क्रूरता और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा था।
गौरतलब है कि आरोपी सास ने यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 (हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियां) के तहत दायर की थी। इसके जरिए उन्होंने फिरोजाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही, चार्जशीट और समन आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
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