बैंक बोला-"खाताधारक को लेकर आओ…”; भाई ने खोदी बहन की कब्र, कंकाल लेकर आया!ओडिशा से ये रुला देने वाली घटना

इस घटना से ग्रामीणों में दस्तावेज़ीकरण को लेकर जागरूकता की कमी और वित्तीय सेवाओं तक पहुँच के संबंध में होने वाली प्रक्रियात्मक परेशानियाँ उजागर हुईं है।
बैंक अधिकारी ने जीतू से कहा कि पैसे निकालने के लिए वह मौत का सबूत और दूसरे ज़रूरी कागज़ात लेकर आए लेकिन जीतू यह बात समझ नहीं पाया, क्योंकि वह अनपढ़ था। उसने अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटकर कंधे पर रखा और बैंक ले आया।
बैंक अधिकारी ने जीतू से कहा कि पैसे निकालने के लिए वह मौत का सबूत और दूसरे ज़रूरी कागज़ात लेकर आए लेकिन जीतू यह बात समझ नहीं पाया, क्योंकि वह अनपढ़ था। उसने अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटकर कंधे पर रखा और बैंक ले आया। सोशल मीडिया
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केनझर- ओडिशा के केनझर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति ने अपनी मृत बहन के कंकाल को बैंक तक ले जाकर उसकी मृत्यु का सबूत देने की कोशिश की। यह घटना मल्लिपासी गांव के पास पटना पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में सोमवार को हुई।

दियानाली गांव निवासी जीतू मुंडा (50 वर्ष) अपनी बड़ी बहन कलारा मुंडा (56 वर्ष) के बैंक खाते से लगभग 19,300 से 20,000 रुपये निकालना चाहते थे। कलारा की बीमारी के कारण 26 जनवरी को मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपने मवेशी बेचकर यह राशि जमा की थी। जीतू मुंडा, जो अशिक्षित हैं, बैंक में कई बार गए लेकिन बैंक अधिकारी ने पैसे देने से मना कर दिया, क्योंकि खाता उसकी बहन के नाम पर था। बैंक अधिकारी ने उससे कहा कि पैसे निकालने के लिए वह मौत का सबूत यानी डेथ सर्टिफिकेट और दूसरे ज़रूरी कागज़ात लेकर आए।

जीतू यह बात समझ नहीं पाया, क्योंकि वह अनपढ़ था। निराश होकर जीतू मुंडा ने अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटकर कंधे पर रखा और लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचे। उसने बैंक के बाहर कंकाल रखकर धरना दिया और पैसे निकालने की मांग की। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे। जब यह खबर फैली, तो आस-पास के गाँवों से लोग उस आदमी को देखने के लिए बैंक पहुँच गए।

यह घटना गरीब, अशिक्षित और आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली दस्तावेजी जटिलताओं और संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है। बैंकिंग नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन साथ ही आम नागरिकों खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में को उचित मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करना भी बैंक और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पुलिस ने बताया कि मौत के सबूत के तौर पर डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) लाने के बजाय, जीतू ने कब्र खोदी, हड्डियाँ एक बोरे में जमा कीं और उन्हें ही सबूत के तौर पर बैंक अधिकारी के सामने पेश कर दिया।

बैंक के कर्मचारी यह देखकर डर गए और उन्होंने कुछ समय के लिए उसे बैंक के अंदर ही रोककर रखा। पटना पुलिस स्टेशन के IIC किरण प्रसाद साहू ने कहा, "पुलिस ने उसे यह बात समझाई और डेथ सर्टिफिकेट लाने को कहा। बाद में वह अपनी बहन की हड्डियों वाला बोरा लेकर वापस आया। वह एक सीधा-सादा इंसान है और उसे यह समझ नहीं आया कि बैंक से अपनी बहन के जमा पैसे वापस पाने के लिए उसे बैंक में डेथ सर्टिफिकेट जमा करना होगा।"

बाद में पुलिस के समझाने पर जीतू ने अपनी बहन के अवशेष को वापस सही स्थान पर दफ़न कर दिए। इस घटना से ग्रामीणों में दस्तावेज़ीकरण को लेकर जागरूकता की कमी और वित्तीय सेवाओं तक पहुँच के संबंध में होने वाली प्रक्रियात्मक परेशानियाँ उजागर हुईं हैं। जानकारों का कहना है जीतू मुंडा एक अशिक्षित, सीधा-सादा आदिवासी व्यक्ति है। वह नहीं जानता कि नॉमिनी क्या होता है। उसे किसी ने यह नहीं बताया कि मृतक के खाते से पैसे निकालने के लिए कौन-से कागज चाहिए। उसके पास न डेथ सर्टिफिकेट था, न वारिस प्रमाण पत्र, न कोई वकील, न कोई सहारा। यह घटना गरीब, अशिक्षित और आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली दस्तावेजी जटिलताओं और संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है। बैंकिंग नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन साथ ही आम नागरिकों खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में को उचित मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करना भी बैंक और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ओडिशा सरकार और बैंकिंग नियामक को ऐसे मामलों में सुधार के लिए कदम उठाने चाहिए।

बैंक अधिकारी ने जीतू से कहा कि पैसे निकालने के लिए वह मौत का सबूत और दूसरे ज़रूरी कागज़ात लेकर आए लेकिन जीतू यह बात समझ नहीं पाया, क्योंकि वह अनपढ़ था। उसने अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटकर कंधे पर रखा और बैंक ले आया।
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बैंक अधिकारी ने जीतू से कहा कि पैसे निकालने के लिए वह मौत का सबूत और दूसरे ज़रूरी कागज़ात लेकर आए लेकिन जीतू यह बात समझ नहीं पाया, क्योंकि वह अनपढ़ था। उसने अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटकर कंधे पर रखा और बैंक ले आया।
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