
नई दिल्ली: मेघालय के खासी हिल्स क्षेत्र में व्यापार और कारोबार के नियमों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (KHADC) ने अपने ग्रीष्मकालीन सत्र के आखिरी दिन एक अहम संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत अब इस जिले में काम करने वाले सभी गैर-आदिवासी कर्मचारियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
परिषद द्वारा पारित किए गए इस नए विधेयक का नाम 'खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट (ट्रेडिंग बाय नॉन-ट्राइबल्स) (अमेंडमेंट) बिल, 2026' है। यह नया कानून दरअसल सात दशक पुराने 'यूनाइटेड खासी-जयंतिया हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट (ट्रेडिंग बाय नॉन-ट्राइबल्स) रेगुलेशन, 1954' के प्रावधानों को आधुनिक और अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
इस संशोधित ढांचे के लागू होने के बाद किसी भी गैर-आदिवासी व्यक्ति को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं की जवाबदेही काफी बढ़ जाएगी। व्यवसायिक गतिविधियों में शामिल हर गैर-आदिवासी कर्मचारी या एजेंट के लिए 'नॉन-ट्राइबल एम्प्लॉइज सर्विस लाइसेंस' लेना जरूरी होगा। नए नियमों के अनुसार नियुक्ति के ठीक 30 दिनों के भीतर यह लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खासी हिल्स क्षेत्र के व्यवसायों में गैर-आदिवासी कर्मियों की भागीदारी को पूरी तरह से नियमित करना है। आवेदन प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए यह तय किया गया है कि आवेदक को अपना वोटर आईडी, तस्वीरें, स्थायी निवास का प्रमाण और संबंधित ग्राम प्रधान की सिफारिश जमा करनी होगी।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर आवेदनों की प्रारंभिक जांच करें और 30 दिनों के अंदर पूरी स्वीकृति प्रक्रिया को संपन्न करें।
इस नए कानून में किसी भी तरह की परेशानी या विवाद से निपटने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया है। अगर कोई आवेदक लाइसेंसिंग अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट रहता है, तो वह संबंधित कार्यकारी सदस्य के समक्ष अपनी बात रख सकता है। इसके बाद भी उचित समाधान न मिलने पर दूसरी अपील सीधे कार्यकारी समिति के पास की जा सकेगी।
नई प्रणाली के तहत जारी किए गए सर्विस लाइसेंस की वैधता केवल एक वर्ष की होगी। लाइसेंस की समय सीमा समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर नवीनीकरण (रिन्यूअल) न कराने पर उसे स्वतः ही रद्द मान लिया जाएगा। नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए परिषद के चुनिंदा अधिकारियों को व्यापारिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण का विशेष अधिकार दिया गया है। हालांकि, जांच करने वाले अधिकारियों को अपनी पहचान बतानी होगी और किसी भी कार्रवाई से पहले अपना लिखित अधिकार पत्र दिखाना होगा।
राज्य सरकार और परिषद के बीच हुए विचार-विमर्श के बाद विधेयक से उन पुराने प्रावधानों को भी हटा दिया गया है, जो राज्य सरकार के लेबर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (LCC) शासन के साथ टकराते थे। मुख्य कार्यकारी सदस्य विंस्टन टोनी लिंगदोह ने सदन को बताया कि इस प्रस्तावित कानून को पिछले सत्र में ही पेश किया जाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिलांग के सांसद रिकी ए.जे. सिंगकोन के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के कारण इसे टालना पड़ा था।
परिषद से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस विधेयक को अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसे जिला परिषद मामले विभाग के माध्यम से राज्यपाल के पास आधिकारिक स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद ही यह नियम पूरी तरह से प्रभाव में आ सकेगा।
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