नई दिल्ली: मेघालय के एक प्रमुख स्वदेशी आदिवासी संगठन ने राज्य सरकार को 10 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। संगठन की स्पष्ट मांग है कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के लुम सिरमान इलाके में प्रस्तावित सीमेंट संयंत्र और चूना पत्थर खनन परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले किसानों व भूस्वामियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस ₹1,800 करोड़ की विशाल परियोजना का मई महीने से ही कड़ा विरोध हो रहा है। उस दौरान स्थानीय हितधारकों के भारी प्रदर्शन और आक्रोश के कारण जिला प्रशासन को जन सुनवाई रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
गुरुवार को जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को एक ज्ञापन सौंपा। जेएनसी के महासचिव वंश्वा सुटिंग के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने लुम सिरमान में श्री सीमेंट लिमिटेड की 217.394 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
जेएनसी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि सुतंगा और नोंगखली इलाकों (पारंपरिक प्रशासनिक इकाइयां) के किसानों और जमीन मालिकों के अधिकार हर हाल में सुरक्षित रहने चाहिए। संगठन का स्पष्ट मानना है कि प्रस्तावित खनन परियोजना के पक्ष में कोई भी अपरिवर्तनीय कदम उठाने से पहले इन अधिकारों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
आदिवासी निकाय ने यह भी बताया कि इन दोनों पारंपरिक इलाकों के किसानों के प्रथागत अधिकार, जमीन पर कब्जा, खेती और उपयोग के अधिकार सीधे तौर पर लुम सिरमान क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
संगठन ने जोर देकर कहा कि जमीन के इस संवेदनशील मुद्दे को महज 'पर्यावरण या औद्योगिक मंजूरी' का मामला मानकर नहीं टाला जा सकता। इससे प्रभावित होने वाले स्थानीय निवासियों की चिंताओं को दूर किए बिना इस दिशा में आगे बढ़ना अनुचित होगा।
परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले जेएनसी ने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने राजस्व, पंजीकरण, प्रथागत, खेती और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड्स के समयबद्ध और पूरी तरह से पारदर्शी सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया है।
खनिज विकास के नाम पर किसानों की आजीविका को नजरअंदाज करने का कड़ा विरोध करते हुए जेएनसी ने उचित मुआवजे की वकालत की है। संगठन का कहना है कि कानूनी और प्रथागत अधिकारों के निर्धारण के आधार पर प्रभावितों को हुए नुकसान की निष्पक्ष व कानूनी भरपाई होनी चाहिए।
सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए महासचिव वंश्वा सुटिंग ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार इन सीमेंट कंपनियों का पक्ष ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जुलाई को आयोजित की गई जन सुनवाई में भी स्थानीय निवासियों को शामिल होने से रोका गया।
सुटिंग ने सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि सरकार को लगता है कि सब कुछ निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुआ है, तो आम निवासियों और प्रभावित भूस्वामियों को जन सुनवाई में हिस्सा लेने से क्यों रोका गया? यह उनके अधिकारों का हनन है।
जेएनसी ने यह साफ किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। हालांकि, उनका कड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि स्थानीय हितधारकों के अधिकारों की रक्षा, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किए बिना इस परियोजना को जबरन आगे बढ़ाया जा रहा है।
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