राजस्थान निकाय चुनाव 2026 | पंचायत-निकाय लॉटरी में SC/ST/OBC आरक्षण घटाया? डोटासरा का भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप

डोटासरा ने सवाल किया कि जब 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर इन वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की गुंजाइश थी, तो कई जिलों में एससी-एसटी और ओबीसी की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी नीचे क्यों समेट दी गई?
डोटासरा का आरोप है कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी में ओबीसी, एससी व एसटी के आरक्षित वार्ड जानबूझकर कम करके उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय और बेईमानी की है।
डोटासरा का आरोप है कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी में ओबीसी, एससी व एसटी के आरक्षित वार्ड जानबूझकर कम करके उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय और बेईमानी की है।
Published on

जयपुर- स्वायत्त शासन विभाग ने राजस्थान के सभी 309 शहरी निकायों 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद, 248 नगर पालिका में अध्यक्ष/महापौर के पदों और 41 जिला परिषदों के प्रमुखों के लिए बहुप्रतीक्षित आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वर्ष 2014 और 2019 में जो सीटें एससी या एसटी वर्ग के लिए आरक्षित रह चुकी थीं, उन्हें इस बार की आरक्षण सूची से अपवर्जित किया गया है। इसके बाद बची हुई निकायों को उस वर्ग की जनसंख्या के घटते क्रम के अनुसार सूचीबद्ध करके ड्रा निकाला गया।

309 निकायों में से 50 सीटें एससी, 11 एसटी, 60 ओबीसी और 188 सीटें अनारक्षित वर्ग के लिए तय की गई हैं। जिला परिषदों में बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटपूतली बहरोड़, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर के जिला प्रमुख इस बार अनारक्षित वर्ग से होंगे।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभापतियों की लॉटरी में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के साथ अन्याय किया है और बेईमानी की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आरक्षण के आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संविधान की उस भावना को कुचलने की कोशिश है, जो हर वंचित और पिछड़े वर्ग को उसकी आबादी के अनुपात में न्यायपूर्ण भागीदारी का अधिकार देती है।

डोटासरा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार “जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी भागीदारी” और सामाजिक न्याय की बात करते हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि सत्ता, संस्थाओं और संसाधनों में भागीदारी केवल कुछ वर्गों तक सीमित नहीं रह सकती। लेकिन भाजपा सरकार राजस्थान में इसके ठीक उलट रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है। ओबीसी, एससी और एसटी की वास्तविक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के बजाय आंकड़ों को इस तरह पेश किया जा रहा है कि उनका संवैधानिक अधिकार ही सीमित हो जाए।

डोटासरा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में ग्रामीण आबादी को लेकर ही गंभीर विसंगतियां हैं। एक जिले की ग्रामीण ओबीसी आबादी जिला परिषद और उसी जिले की पंचायत समितियों में तार्किक रूप से एक-दूसरे के अनुरूप होनी चाहिए, लेकिन कई जगह दोनों आंकड़ों में कई प्रतिशत का अंतर है। आखिर एक ही ग्रामीण आबादी का आंकड़ा अलग-अलग संस्थाओं के लिए अलग कैसे हो सकता है?

उन्होंने बताया कि प्रदेश के 41 जिला परिषदों में 1,403 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए केवल 192 वार्ड, यानी मात्र 13.68 प्रतिशत आरक्षित करने की अनुशंसा की गई। जबकि 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता तो 294 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, यानी 102 वार्ड कम आरक्षित किए गए। इसी तरह राजस्थान की 457 पंचायत समितियों में 8,245 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए केवल 1,101 वार्ड, यानी लगभग 13.35 प्रतिशत आरक्षित किए गए। 21 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण दिया जाता तो 1,731 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, यानी 630 वार्ड कम आरक्षित हुए।

कई जिलों में 40 प्रतिशत से भी नीचे हिस्सेदारी

उन्होंने अलग-अलग जिलों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि अजमेर में एससी-एसटी और ओबीसी का कुल आरक्षण 39.97 प्रतिशत, बालोतरा में 41.93 प्रतिशत, बाड़मेर में 43.24 प्रतिशत, ब्यावर में 33.3 प्रतिशत, चूरू में 46.75 प्रतिशत, डीग में 34.48 प्रतिशत, डीडवाना-कुचामन में 42.85 प्रतिशत, जैसलमेर में 38 प्रतिशत, झुंझुनूं में 39 प्रतिशत, खैरथल-तिजारा में 36 प्रतिशत, कोटपूतली-बहरोड़ में 37 प्रतिशत, फलोदी में 39.13 प्रतिशत और सीकर में 40.8 प्रतिशत रखा गया है। डोटासरा ने सवाल किया कि जब 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर इन वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की गुंजाइश थी, तो कई जिलों में एससी-एसटी और ओबीसी की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी नीचे क्यों समेट दी गई? आबादी अधिक, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम। आखिर ये आरक्षण की नीति है, या सामाजिक न्याय के अधिकारों को सीमित करने का सोची-समझा षड्यंत्र? उन्होंने कहा कि सरकार को हर जिले में तय किए गए प्रतिशत का स्पष्ट और तार्किक आधार सार्वजनिक करना चाहिए।

प्रदेश के 41 जिला परिषदों में 1,403 निर्वाचन क्षेत्रों में OBC के लिए केवल 192 वार्ड, यानी मात्र 13.68% आरक्षित करने की अनुशंसा की गई। जबकि 50% की सीमा के भीतर OBC को 21% आरक्षण दिया जाता तो 294 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, यानी 102 वार्ड कम आरक्षित किए गए।
-गोविन्द सिंह डोटासरा

उन्होंने आगे कहा कि अलवर, चित्तौड़गढ़, दौसा, करौली और श्रीगंगानगर में ओबीसी सीटों का प्रतिशत 9.9 प्रतिशत के आसपास, जबकि डीडवाना-कुचामन, पाली, फलोदी और राजसमंद में 11.11 प्रतिशत रखा गया है। जब ओबीसी की आबादी इन जिलों में 45-50 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है, तो आरक्षण का यह आधार क्या है?

सरकार को सार्वजनिक रूप से इसका जवाब देना चाहिए। डोटासरा ने सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार ओबीसी, एससी और एसटी को उनके अधिकारों के लिए एकजुट होते देखकर जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है? ओबीसी रिपोर्ट को लेकर जिस तरह के अधूरे और विवादित आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे समाज में भ्रम पैदा हो रहा है। सरकार को पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि ये आंकड़े किस सर्वे, किस वैज्ञानिक पद्धति और किस मानक के आधार पर तैयार किए गए हैं।

डोटासरा ने कहा कि ओबीसी, एससी और एसटी किसी का हक नहीं चाहते, वे अपना संवैधानिक अधिकार और सम्मानजनक भागीदारी चाहते हैं। राहुल गांधी जिस सामाजिक न्याय की लड़ाई को देशभर में आवाज़ दे रहे हैं, राजस्थान में भाजपा सरकार उसी न्याय की भावना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। ये सिर्फ 102 जिला परिषद या 630 पंचायत समिति वार्डों का सवाल नहीं है। ये संविधान की भावना के खिलाफ भाजपा सरकार की तानाशाही है। उन्होंने भाजपा सरकार से जवाब मांगा कि आखिर ओबीसी, एससी-एसटी की हिस्सेदारी घटाने का आधार क्या है, और संविधान की भावना के साथ ये खिलवाड़ क्यों? डोटासरा ने कहा कि सामाजिक न्याय की आवाज दबेगी नहीं। कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ हर समाज के हक की लड़ाई लड़ेगी। पंचायत और निकाय चुनाव में भाजपा को इस बेईमानी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

डोटासरा का आरोप है कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी में ओबीसी, एससी व एसटी के आरक्षित वार्ड जानबूझकर कम करके उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय और बेईमानी की है।
TM Special | यूपी के 4 मेडिकल कॉलेजों में 70% SC/ST सीटों पर फिर संकट: आज से NEET-UG काउंसलिंग, सीट मैट्रिक्स अब तक जारी न होने से छात्र चिंतित
डोटासरा का आरोप है कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी में ओबीसी, एससी व एसटी के आरक्षित वार्ड जानबूझकर कम करके उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय और बेईमानी की है।
यवतमाल हत्याकांड | सामान्य सीट पर दलित महिला बनी सरपंच तो रंजिश में कर दी पति की हत्या: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 दोषियों की उम्रकैद रखी बरकरार

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com