नई दिल्ली: मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के बीच मंगलवार, 15 सितंबर को एक बार फिर खून-खराबा देखने को मिला। नागा बहुल तामेंगलोंग जिले के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अज्ञात बंदूकधारियों ने दोपहर करीब 3 बजे लेशंगफाई गांव पर हमला कर दिया। इस कायराना हमले में दो कुकी महिलाओं की जान चली गई।
इस घटना में मारी गई 78 वर्षीय फालनीचोंग उर्फ चोंगा सितलौ उस समय लकड़ियां बीन रही थीं, जब हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। वहीं, दूसरी पीड़िता 28 वर्षीय किमजालिंग उर्फ किमनेओ सिंगसन थीं। वह अपना नर्सिंग कोर्स पूरा करने के बाद खेती के काम में अपने माता-पिता का हाथ बंटाने के लिए घर लौटी थीं, लेकिन उसी जगह पर उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया गया।
यह ताजा हमला हिंसा की उस भयावह शृंखला का हिस्सा है, जो पिछले कुछ समय से लगातार जारी है। इससे पहले 13 सितंबर को भी तामेंगलोंग और एक अन्य नागा बहुल जिले नोने में कथित तौर पर नागा उग्रवादियों ने दो महिलाओं सहित चार कुकी नागरिकों की हत्या कर दी थी। इस घटना से पूर्व 27 अगस्त को कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में कथित कुकी सशस्त्र समूहों द्वारा चार नागा नागरिकों की जान ले ली गई थी।
मंगलवार को हुए इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने गहरा रोष व्यक्त किया है। परिषद का कहना है कि कुकी-जो नागरिकों की लगातार हो रही हत्याओं ने अब एक बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य रूप ले लिया है। उनके अनुसार, अब इन लगातार हो रही हिंसक घटनाओं को महज छिटपुट हमले मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अपने आधिकारिक बयान में काउंसिल ने कहा कि इन हत्याओं में कथित तौर पर एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) और जेडयूएफ-के (ZUF-K) जैसे गुट शामिल हैं। यह कुकी-जो समुदाय के खिलाफ बढ़ते हमलों की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। निर्दोष नागरिकों को इस तरह निशाना बनाए जाने से यह साफ होता है कि लोगों में दहशत फैलाने और उन्हें उनकी बस्तियों से खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस खौफनाक माहौल के बीच काउंसिल ने राज्य और केंद्र सरकार से कमजोर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने और नागरिक आबादी पर हमला करने वाले सशस्त्र समूहों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए केजेडसी ने सभी कुकी-जो नागरिक समाज संगठनों को एक अहम निर्देश जारी किया है। इसके तहत यह तय किया गया है कि नागा सशस्त्र समूहों द्वारा मारे गए किसी भी कुकी-जो व्यक्ति के शव को अगले आदेश तक दफनाया नहीं जाएगा। हर पीड़ित के पार्थिव शरीर को निकटतम उपलब्ध कोल्ड-स्टोरेज सुविधा में संरक्षित रखा जाएगा, जब तक कि इस संबंध में कोई अगला निर्णय नहीं लिया जाता।
इस पूरी घटना की निंदा करते हुए सैकुल क्षेत्र की विधायक किमनेओ हांगशिंग ने कहा कि अगर जांच में एनएससीएन (आई-एम) और जेडयूएफ (के) के सशस्त्र कैडरों की संलिप्तता साबित होती है, तो यह निर्दोष नागरिकों के जीवन पर एक बेहद गंभीर और जघन्य हमला है।
यह पूरी हिंसक स्थिति तब बनी हुई है, जब मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह बार-बार सभी पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, उनकी लगातार अपीलों के बावजूद राज्य में हिंसा का यह खूनी खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
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