मणिपुर में जातीय हिंसा और तनाव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के कांगपोकपी जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक 71 वर्षीय कुकी बुजुर्ग की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई है। मृतक का शव रविवार 4 अक्टूबर को बरामद किया गया। इससे ठीक एक दिन पहले हथियारबंद बदमाशों ने बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर लिया था।
इस खौफनाक वारदात को सेना के एक बेस के करीब स्थित खुनखो कुकी गांव में अंजाम दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, शनिवार 3 अक्टूबर को अज्ञात हमलावरों ने पहले हेमजांग हाओकिप नामक इस बुजुर्ग के घर को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद वे उन्हें जबरन अपने साथ ले गए। अपहरण के करीब 24 घंटे बाद जंगल में उनका शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने बुजुर्ग की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स की मदद भी ली थी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। स्थानीय लोगों को अंदेशा है कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे किसी नगा उग्रवादी समूह का हाथ हो सकता है। फिलहाल खुनखो कुकी ग्राम प्राधिकरण ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए मणिपुर सरकार से दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है।
मणिपुर में कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से ही राज्य की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। हाल के दिनों में कुकी और नगा समुदायों के बीच भी तनाव काफी बढ़ गया है। इससे पहले 26 सितंबर को भी गोलीबारी की एक बड़ी घटना हुई थी, जिसमें तीन नगा नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
मई 2023 से भड़की इस जातीय हिंसा ने अब तक 300 से अधिक लोगों की जिंदगी छीन ली है। राज्य के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंददास ने बीते सितंबर महीने में 60 सदस्यीय विधानसभा को बताया था कि इस संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक 49 लोग लापता हैं।
हालात की गंभीरता और पीड़ित परिवारों के दर्द को देखते हुए हाल ही में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार की ओर से इन 49 लापता लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने का ऐलान किया गया है।
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