
नई दिल्ली: मणिपुर के उखरूल जिले में जारी हिंसा और तनाव के बीच गुरुवार सुबह दो कुकी युवकों के शव बरामद किए गए हैं। ये दोनों युवक बुधवार सुबह से ही लापता थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही घंटे पहले बंधक बनाए गए 21 लोगों को रिहा कराया गया था, जिनमें से ज्यादातर तंगखुल नागा समुदाय से थे। सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों द्वारा खोजे गए इन दोनों मृतकों की पहचान थवई कुकी गांव के थेंगिन बैते और शंगकई गांव के थांगबोइमंग खोंगसाई के रूप में हुई है।
अधिकारियों के मुताबिक, इनके शव मैपिथेल पहाड़ी श्रृंखला के पास एक जंगली इलाके में मिले, जहां बुधवार को दोनों समुदायों के गुटों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी।
इस मामले को लेकर मणिपुर विधानसभा में गृह मंत्री गोविंददास कोथौजम ने जानकारी दी कि बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे से 9 बजे के बीच मैपिथेल पहाड़ी इलाके में दो हथियारबंद गुटों के बीच मुठभेड़ हुई थी। यह टकराव कथित तौर पर दो कुकी ग्रामीणों के अपहरण के बाद शुरू हुआ।
इस गोलीबारी में लालमिनथांग हाओकिप (40) नामक एक नागरिक के पैर में गोली लगी, जिसे इलाज के लिए कांगपोकपी जिले के एक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। उखरूल में तैनात एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि तंगखुल स्वयंसेवक अफीम की खेती रोकने के इरादे से थवई कुकी पहाड़ी इलाके में गए थे और वहां से उन्होंने दो ग्रामीणों को पकड़ लिया था।
इसके बाद अन्य ग्रामीण भाग गए और दोनों तरफ से हथियारबंद लोग इकट्ठा हो गए, जिसके परिणामस्वरूप यह गोलीबारी हुई। शंगकई ग्राम प्राधिकरण के अनुसार, पानी की पाइपलाइन की मरम्मत करने गए दो अन्य ग्रामीण उसी समय से लापता थे जिन पर तंगखुल स्वयंसेवकों द्वारा कथित तौर पर गोलियां चलाई गई थीं।
इस बढ़ते तनाव और लापता ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता के बीच कुकी समूहों ने इलाके में इंफाल-उखरूल मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। शंगकई ग्राम प्राधिकरण ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और अपहृत लोगों की सुरक्षित वापसी की मांग की। इसी विरोध के दौरान तीन वाहनों में यात्रा कर रहे 21 यात्रियों को बंधक बना लिया गया।
इनमें 18 तंगखुल नागा और तीन अन्य समुदायों के लोग शामिल थे। सरकार और सुरक्षा बलों की कड़ी मशक्कत और देर रात तक चली बातचीत के बाद ही इन बंधकों को रिहा कराया जा सका।
एक सुरक्षा अधिकारी ने बातचीत का ब्योरा देते हुए बताया कि तंगखुल समुदाय की कैद से एक कुकी व्यक्ति किसी तरह भाग निकलने में सफल रहा था। 21 बंधकों की रिहाई के लिए हुई बातचीत में मुख्य मांग यह थी कि पकड़े गए दूसरे व्यक्ति को भी छोड़ा जाए और दोनों लापता लोगों को खोजकर सुरक्षित वापस लाया जाए। इसके अलावा पहाड़ी इलाके में फंसे छह अन्य लोगों को भी सुरक्षित निकालने की मांग रखी गई।
बातचीत के बाद पकड़े गए व्यक्ति को छोड़ दिया गया और फंसे हुए छह लोगों को भी सुरक्षित कर लिया गया। हालांकि उस समय लापता दो लोगों का कोई सुराग नहीं मिल सका था। फिर भी, इस भारी तनाव के बीच दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि लापता लोगों की तलाश जारी रहेगी और रात करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच सभी 21 बंधकों को रिहा कर दिया गया। दुर्भाग्यवश, गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे बीएसएफ के जवानों को उन दो लापता युवकों के शव मिल गए।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए घोषणा की है कि हत्याओं के इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाएगी और पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि दी जाएगी। हालांकि, इलाके में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
गुरुवार दोपहर तक मृतकों के शवों को उस स्थान से नहीं उठाया जा सका था जहां वे पाए गए थे। एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोग नहीं चाहते कि स्थानीय उखरूल पुलिस उस इलाके में आए, क्योंकि पुलिस बल में अधिकतर कर्मी तंगखुल समुदाय के हैं। शवों को निकालने और पोस्टमार्टम की व्यवस्था के लिए प्रयास लगातार जारी हैं।
इस बीच, कांगपोकपी जिले में भी हालात चिंताजनक हैं। कुकी इनपी (साउथ-वेस्ट सदर हिल्स) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर 10 मार्च 2026 की रात के. सोंगलुंग गांव में एस. कामसन समूह के संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए भीषण हमले की कड़ी निंदा की है।
संगठन ने राज्य सरकार की प्रशासनिक लापरवाही को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए के. सोंगलुंग सेक्टर में तत्काल और स्थायी सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की है ताकि नागरिकों की जान-माल की रक्षा की जा सके।
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