मणिपुर: दो नागा पादरियों के शवों की हुई पहचान, कुकी संगठनों के साथ शांति समझौता रद्द करने की उठी जोरदार मांग

इंफाल में अगवा किए गए दो नागा पादरियों के शवों की हुई शिनाख्त, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने गृह मंत्री अमित शाह से कुकी उग्रवादियों के साथ शांति समझौता (SoO) तुरंत रद्द करने की मांग की।
विष्णुपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक बैरिकेटिंग पर लिखा गया कुकीलैंड
विष्णुपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक बैरिकेटिंग पर लिखा गया कुकीलैंड (फाइल फोटो)
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नई दिल्ली: मणिपुर में कुकी हथियारबंद समूहों द्वारा कथित तौर पर अगवा कर मारे गए छह नागा ग्रामीणों में से दो नागा पादरियों के शवों की पहचान कर ली गई है। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद से राज्य में गहरा आक्रोश है।

मणिपुर के नागा समुदायों के शीर्ष संगठन 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' (UNC) ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। संगठन के अनुसार, पीड़ितों के परिजनों ने राज्य की राजधानी इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) की मोर्चरी में जाकर दोनों शवों को पहचाना है।

यूएनसी की कार्य समिति के सचिव ए.सी. थोत्सो ने हालात की भयावहता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मारे गए दोनों पादरियों की पहचान उनके कपड़ों के आधार पर ही संभव हो सकी है। बाकी चार शवों की शिनाख्त अब तक नहीं हो पाई है, क्योंकि उन्हें बेहद बेरहमी से काटा और क्षत-विक्षत किया गया है।

इस क्रूर घटना के बाद, यूएनसी ने शुक्रवार (12 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा है। इसमें केंद्र सरकार से 25 कुकी और ज़ोमी चरमपंथी समूहों के साथ किए गए 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समझौते को तत्काल प्रभाव से खत्म करने की मांग की गई है।

नागा संगठन ने कुकी नेशनल फ्रंट (प्रेसिडेंट) समूह के सदस्यों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाने की भी मांग की है। आरोप है कि पिछले महीने कांगपोकपी जिले के लीलोन वैफेई गांव से 18 नागा नागरिकों के अपहरण में इसी समूह का सीधा हाथ था।

इसके साथ ही, यूएनसी ने लीलोन वैफेई गांव के मुखिया लालबोई वैफेई और अन्य संलिप्त ग्रामीणों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। उन पर 18 नागाओं के अपहरण और उनमें से छह की निर्मम हत्या में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

गौरतलब है कि नागाओं के अपहरण की यह वारदात तीन थाडौ चर्च नेताओं की हत्या के ठीक बाद अंजाम दी गई थी। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि थाडौ समुदाय का एक बड़ा वर्ग खुद को कुकी जनजातियों का हिस्सा मानने से इनकार करता है और अपनी एक अलग पहचान का दावा करता है।

इस पूरे मामले में पुलिस महकमे की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। यूएनसी ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि नागा नागरिकों के अपहरण और उनकी हत्या की इस खौफनाक साजिश में मणिपुर पुलिस का एक सेवारत अधिकारी भी शामिल है।

इधर, नेटिव पीपुल्स कमेटी, मणिपुर ने भी छह नागाओं की हत्या की कड़ी निंदा की है। समिति ने इस क्रूरता के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए पूरे मामले की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का आह्वान किया है। मणिपुर के संदर्भ में 'नेटिव' शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से मैतेई और नागा जैसे मूल निवासियों के लिए किया जाता है।

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