मणिपुर में शांति की गुहार: कुकी-ज़ो संगठनों ने नागा वार्ता के लिए मांगा मिज़ोरम का साथ, गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा ज्ञापन

मणिपुर में कुकी-ज़ो समुदाय ने शांति वार्ता के लिए मिज़ोरम का रुख किया, गृह मंत्री अमित शाह से की तुरंत हस्तक्षेप की मांग
मणिपुर के चुराचांदपुर में एक जगह इकठ्ठा हुए कुकी समुदाय के युवा
मणिपुर के चुराचांदपुर में एक जगह इकठ्ठा हुए कुकी समुदाय के युवा फोटो- द मूकनायक
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नई दिल्ली: मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को सुलझाने के लिए कुकी-ज़ो समुदाय ने अब मिज़ोरम का रुख किया है। कुकी-ज़ो जनजातियों और तांगखुल नागाओं के बीच बातचीत शुरू करने के प्रयास जब खास सफल नहीं हुए, तो कुकी नागरिक समाज समूहों ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए मिज़ोरम से उम्मीद लगाई है। इसके साथ ही कुकी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपकर मणिपुर संकट के समाधान में केंद्र सरकार से निर्णायक भूमिका निभाने की मांग की है।

इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए कुकी-ज़ो चर्च के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आइजोल पहुंच रहा है। उनका उद्देश्य मिज़ोरम के चर्च अधिकारियों से मुलाकात कर उनसे आग्रह करना है कि वे मणिपुर और नागालैंड में नागा चर्च नेतृत्व पर बातचीत के लिए दबाव बनाएं। यह पहल मौजूदा नागा-कुकी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण सेतु का काम कर सकती है।

कुकी जोनल काउंसिल (केजेडसी) के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) से बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसलिए अब कुकी-ज़ो चर्च का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को आइजोल में एक अहम बैठक करने जा रहा है। समुदाय को उम्मीद है कि मिज़ोरम का चर्च नागा अधिकारियों को संवाद के लिए राजी करने में सफल रहेगा।

मिज़ोरम में चल रहे इन प्रयासों के बीच कुकी संगठनों ने दिल्ली में भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कुकी जोनल काउंसिल और एक अन्य प्रभावशाली संगठन कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) के प्रतिनिधिमंडलों ने सप्ताहांत और सोमवार को राजधानी में डेरा डाला। वहां उन्होंने केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर वार्ताकार अजीत लाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के निदेशक महेश दीक्षित से मुलाकात की।

इन मुलाकातों के साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में कुकी बहुल इलाकों में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात और मानवीय संकट का विस्तार से जिक्र किया गया है। संगठन ने समुदाय के लिए समान न्याय, प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय पहुंच बहाल करने और व्यापक जातीय संघर्ष के जल्द राजनीतिक समाधान की वकालत की है।

सोमवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केजेडसी के प्रवक्ता गिन्ज़ा वुअलज़ोंग ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा नागा संघर्ष में कुकी-ज़ो समुदाय के दर्द को बाकी घटनाओं के बराबर तवज्जो नहीं मिल रही है। उनके अनुसार, हर कोई सिर्फ छह नागा बंधकों की चर्चा कर रहा है, जबकि कुकी-ज़ो लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

गिन्ज़ा ने दावा किया कि एनएससीएन (आईएम) और अन्य सशस्त्र समूहों ने अब तक पंद्रह कुकी-ज़ो लोगों की हत्या कर दी है और चौदह गांवों को राख में मिला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समुदाय नागा बंधकों की हत्या की कड़ी निंदा करता है, लेकिन वे भी पीड़ित हैं और उनके साथ भी समान न्याय होना चाहिए। आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल जनवरी से नागा-कुकी झड़पों में करीब दो दर्जन लोग मारे गए हैं। दोनों समुदायों के कई गांव जला दिए गए हैं, जिसने 1990 के दशक के भीषण नागा-कुकी संघर्ष की कड़वी यादें ताज़ा कर दी हैं।

प्रवक्ता ने कांगपोकपी जिले के हालात को बेहद चिंताजनक बताया। सेनापति के रास्ते होने वाली आपूर्ति बाधित होने से कुकी ग्रामीणों को भोजन, दवा और ईंधन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई का आलम यह है कि आधा बोरी चावल पैंतीस सौ रुपये और पेट्रोल ढाई सौ रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। उन्होंने सरकार से आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।

इस गंभीर मानवीय संकट का हवाला देते हुए संगठनों ने कुकी-ज़ो लोगों के लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है। वुअलज़ोंग ने जानकारी दी कि उन्होंने केंद्र सरकार से 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समूहों के साथ राजनीतिक वार्ता में तेजी लाने का भी कड़ा आग्रह किया है।

केआईएम के अध्यक्ष सी.एच. अजांग खोंगसाई ने ज्ञापन के संदर्भ में बताया कि उन्होंने गृह मंत्री से कुकी-ज़ो समुदाय के सामने मौजूद सुरक्षा और मानवीय संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में लोगों के जीवन, संपत्ति और पैतृक भूमि की रक्षा, हत्याओं और गांव जलाने की घटनाओं की निष्पक्ष जांच और एक स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए संवैधानिक कदम उठाना शामिल है।

वार्ताकार अजीत लाल के साथ हुई बैठक में थांगलेट ने उन गांवों की एक सूची भी सौंपी जो हमलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं या जहां आपूर्ति बाधित होने से गहरा संकट छाया है। इसी महीने छह नागा बंधकों की हत्या के आरोपों पर सफाई देते हुए थांगलेट ने कहा कि जैसे ही यह बात सामने आई कि घटना कुकी इलाके में हुई है, कुकी नेतृत्व ने तुरंत माफी मांग ली थी, लेकिन उसे ठुकरा दिया गया।

शांति बहाली के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कुकी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे नागा और मैतेई, दोनों समुदायों के साथ बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। थांगलेट ने याद दिलाया कि गृह मंत्रालय के पूर्व सलाहकार ए. के. मिश्रा के समय में भी बातचीत हुई थी। उनका साफ कहना है कि वे मैतेई और नागा दोनों पक्षों से संवाद करके इस मसले का एक स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहते हैं।

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