
भोपाल। मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में बीते मंगलवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहाँ आदिवासी अधिवक्ता रूप सिंह मरावी पर कथित तौर पर कुछ अधिवक्ताओं द्वारा बर्बर हमला किया गया। आरोप है कि यह हमला ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा और उनके साथियों ने किया। घटना के बाद जब पीड़ित एफआईआर दर्ज कराने थाना सिविल लाइंस पहुँचे तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया। न्याय न मिलने से आहत अधिवक्ता मरावी धरने पर बैठ गए हैं।
पीड़ित अधिवक्ता रूप सिंह मरावी के अनुसार, घटना दोपहर करीब दो से ढाई बजे के बीच हुई। वे जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में अपने काम से मौजूद थे। इसी दौरान ग्वालियर से आए अधिवक्ता अनिल मिश्रा अपने कुछ साथियों के साथ वहाँ पहुँचे और किसी विवाद को लेकर उनके साथ गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते बात हाथापाई में बदल गई और उन पर लात-घूँसों से हमला किया गया।
मरावी का कहना है कि हमला इतना अचानक और हिंसक था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। घटना के बाद वे मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद आहत हैं।
घटना के बाद अधिवक्ता मरावी अपने साथियों के साथ थाना सिविल लाइंस, जबलपुर पहुँचे और शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी रिपोर्ट लिखने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस द्वारा टालमटोल और उदासीन रवैये से पीड़ित को गहरा आघात पहुँचा।
मरावी का कहना है, “जब हाईकोर्ट परिसर में एक अधिवक्ता सुरक्षित नहीं है और थाने में जाकर भी न्याय नहीं मिलता, तो आम आदमी की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।”
एफआईआर दर्ज न होने और कार्रवाई न होते देख अधिवक्ता रूप सिंह मरावी ने विरोध का रास्ता चुना। वे शाम करीब चार बजे से हाईकोर्ट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। उनके साथ कई अधिवक्ता और सामाजिक संगठनों के लोग भी समर्थन में पहुँचने लगे।
धरने के दौरान नारेबाजी करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी, SC, ST और OBC समाज के सम्मान पर हमला है। उन्होंने इसे संविधान और कानून के राज पर सीधा प्रहार बताया।
घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कई लोगों ने मध्यप्रदेश के डीजीपी, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को टैग कर मामले में तुरंत हस्तक्षेप की माँग की। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर से आम जनता का भरोसा तोड़ देगी। समर्थन में उतरे संगठनों का कहना है कि आदिवासी और वंचित वर्ग के लोगों के साथ अक्सर भेदभाव और अन्याय होता है। जब वही भेदभाव न्याय के मंदिर कहे जाने वाले परिसर में दिखने लगे, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
द मूकनायक से बातचीत में आजाद समाज पार्टी, मध्यप्रदेश के नेता सुनील अस्तेय ने कहा, “जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में आदिवासी अधिवक्ता रूप सिंह मरावी पर हुआ हमला बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि आदिवासी, SC, ST और OBC समाज के सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
सबसे दुखद बात यह है कि जब पीड़ित एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुँचे तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया। यह कानून के राज पर बड़ा सवाल है। अगर हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ता सुरक्षित नहीं हैं और थाने में जाकर भी न्याय नहीं मिल रहा, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेगा?
हम मांग करते हैं कि आरोपियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए, एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी हो और पीड़ित को न्याय व सुरक्षा की गारंटी दी जाए। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
द मूकनायक प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने कहा, “भाजपा की सरकार अनिल मिश्रा जैसे लोगों को संरक्षण दे रही है, जो बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान करते हैं और संविधान पर सवाल उठाते हैं। ऐसे लोगों को सत्ता का संरक्षण मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
हम मांग करते हैं कि आदिवासी अधिवक्ता पर हुए हमले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यदि पुलिस-प्रशासन ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई और कार्रवाई नहीं की, तो आदिवासी कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान और आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई है।”
आदिवासी विकास परिषद (छात्र विभाग) के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता नीरज बारीवा ने द मूकनायक से कहा, “प्रदेशभर में वंचित जातियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है, लेकिन सरकार सब कुछ देखकर भी चुप है। यह चुप्पी खुद में बहुत बड़ा अपराध है। जब न्याय के लिए लोग थाने और अदालत तक जाते हैं और फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिलता, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हमारी साफ मांग है कि इस मामले में तुरंत निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। अगर अब भी सरकार और प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई, तो वंचित समाज सड़क पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए मजबूर होगा।”
अधिवक्ता रूप सिंह मरावी की शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज की जाए।
आरोपित अधिवक्ता अनिल मिश्रा और उनके साथियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाए।
पीड़ित को सुरक्षा और न्याय की गारंटी दी जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी, धरना जारी रहेगा।
धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने बार-बार दोहराया कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला नहीं है। यह आदिवासी, SC, ST और OBC समाज के आत्मसम्मान, बराबरी और संविधान में मिले अधिकारों से जुड़ा सवाल है। अगर ऐसे मामलों को दबा दिया गया, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
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