
भोपाल। मध्यप्रदेश में लगातार नाबालिग बच्चों से यौन शोषण के मामले सामने आरहे हैं। हाल ही में प्रदेश के झाबुआ जिला मुख्यालय के स्थानीय डीआरपी लाइन में पदस्थ एक पुलिस आरक्षक मंगलेश पाटीदार पर एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की कोशिश और छेड़छाड़ का आरोप लगा है। आरोपी आरक्षक ने शनिवार शाम एक नाबालिग बालिका के साथ छेड़छाड़ एवं दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पीड़ित बालिका के परिजनों ने पुलिस थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने आरोपी पुलिस आरक्षक के खिलाफ छेडछाड़ एवं पाक्सो एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
जानकारी अनुसार आरोपी पुलिस आरक्षक मंगलेश पाटीदार डीआरपी लाइन में पदस्थ था और डीआरपी लाइन में ही पुलिस विभाग के क्वार्टर में रह रहा था। आरोपी पाटीदार ने पास के ही एक अन्य पुलिसकर्मी के क्वार्टर में निवासरत नाबालिग बालिका को बहसा-फुसालकर उसके साथ दुष्कर्म के प्रयास किया। आरोपी कुछ करता, इससे पहले ही बालिका की माता ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
पीड़िता के परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी आरक्षक मंगलेश पाटीदार के खिलाफ छेडछाड़ और पाक्सो एक्ट के एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजा गया दिया गया है।
घटना के बाद नाबालिग की मां थाने पहुंचीं और पुलिस को पूरी घटना बताई। उन्होंने बताया कि शनिवार शाम उनकी बेटी घर के आसपास ही थी। इसी दौरान आरोपी आरक्षक उसे बहला-फुसलाकर अपने क्वार्टर की ओर ले गया। जब काफी देर तक बच्ची नजर नहीं आई तो वह उसे ढूंढते हुए बाहर निकलीं। तलाश करते-करते जब वह आरोपी के क्वार्टर के पास पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह उनकी बेटी के साथ गलत हरकत कर रहा था। यह देखकर वह चिल्लाईं और आरोपी को पकड़ लिया।
मां ने पुलिस को बताया कि उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर आ गए, जिससे आरोपी घबरा गया और पीछे हट गया। उन्होंने कहा कि अगर वह समय पर वहां नहीं पहुंचतीं तो उसकी बेटी के साथ बड़ा अपराध हो सकता था। इसके बाद वह सीधे थाने गईं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और बाद में अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।
झाबुआ थाना प्रभारी आरसी भास्करे ने बताया कि आरोपी पुलिस आरक्षक मंगलेश पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे जेल भेज दिया गया है।
द मूकनायक से बातचीत में राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य संगीता शर्मा ने कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक और चिंता पैदा करने वाली है। उन्होंने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाला ही कानून तोड़ने लगे तो समाज का भरोसा टूटता है। नाबालिग के साथ इस तरह की हरकत किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तेज होनी चाहिए और आरोपी को किसी भी तरह का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा, काउंसलिंग और कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि पीड़िता को जल्दी न्याय मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
भोपाल के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकान्त त्रिवेदी के अनुसार, कम उम्र के बच्चे यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील और आसान शिकार होते हैं। वे मानसिक और भावनात्मक रूप से इतनी परिपक्वता नहीं रखते कि घटना को समझ सकें या उसका विरोध कर सकें। ऐसे बच्चे अक्सर यह भी नहीं जान पाते कि उनके साथ कुछ गलत हुआ है या उन्हें किसी से मदद लेनी चाहिए।
द मूकनायक से बातचीत में डॉ. त्रिवेदी ने इन घटनाओं को 'मल्टीफेक्टोरीयल' यानी कई कारणों से उत्पन्न होने वाली समस्या बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों के पीछे मुख्य रूप से आरोपियों की यौन कुंठा, मानसिक विकृति और नशे की लत जैसे गंभीर कारण होते हैं। समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही भी इन मामलों को बढ़ावा देती है।
मध्य प्रदेश लंबे समय से महिलाओं के खिलाफ अपराधों, खासकर दुष्कर्म के मामलों में देशभर में चर्चा का विषय बना रहा है। वर्ष 2023 में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही। एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश दुष्कर्म की घटनाओं में देशभर में तीसरे स्थान पर रहा। यहां एक साल के भीतर 2,979 मामले दर्ज हुए। राजस्थान 5,078 घटनाओं के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में 3,516 मामले सामने आए।
यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालाँकि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं और हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका असर बहुत कम दिखाई दे रहा है।
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