
इम्फाल: कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने अपने विधायकों के लिए एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया है। संस्था ने कुकी-ज़ो समुदाय के सभी विधायकों से बुधवार, 2 सितंबर से शुरू हो रहे मणिपुर विधानसभा के आगामी सत्र में हिस्सा न लेने की अपील की है।
यह विधानसभा सत्र 7 सितंबर तक चलने वाला है। इस पूरी अवधि के दौरान सदन की कुल तीन बैठकें आयोजित की जानी हैं। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल इस समुदाय से नौ विधायक आते हैं। इनमें से छह विधायक सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े हैं।
मंगलवार, 1 सितंबर को जारी एक विस्तृत बयान में केआईएम ने स्पष्ट किया कि विधायी कार्यवाही के फिर से शुरू होने को किसी भी कीमत पर हालात सामान्य होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। संस्था का साफ तौर पर कहना है कि उनके समुदाय के लिए एक अलग राजनीतिक प्रशासन की जो मांग उठाई गई थी, उसका अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
अपने इस बयान में संगठन ने कुकी-ज़ो विधायकों को समुदाय के साथ पूर्ण एकजुटता प्रदर्शित करने की हिदायत दी है। इसके साथ ही यह गंभीर चेतावनी भी दी गई है कि जो भी नेता इस निर्देश की अनदेखी करेगा, यह मान लिया जाएगा कि वह समुदाय के सामूहिक राजनीतिक रुख और उनके संघर्ष से किनारा कर रहा है।
केआईएम ने कहा कि इस बेहद संवेदनशील और नाजुक मोड़ पर कुकी-ज़ो विधायकों को पूरी मजबूती के साथ अपनी जनता के समर्थन में खड़ा होना चाहिए। संस्था के अनुसार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कभी भी लोगों की वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
संगठन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब तक समुदाय के हित में कोई ठोस राजनीतिक समझौता या समाधान नहीं हो जाता, तब तक पुरानी सामान्य व्यवस्था की ओर लौटना असंभव है। मई 2023 में भड़के भीषण जातीय संघर्ष के बाद से ही इस समुदाय ने भारी नुकसान और पीड़ा का सामना किया है।
गौरतलब है कि मणिपुर में साल 2022 के विधानसभा चुनावों में कुल 10 कुकी-ज़ो नेताओं ने जीत दर्ज की थी। उस समय चुने गए इन 10 नेताओं में से सात विधायक अकेले बीजेपी के टिकट पर जीतकर आए थे। हालांकि, इन निर्वाचित नेताओं में से एक, वुन्ज़ागिन वाल्टे का जीवन के लिए एक लंबे संघर्ष के बाद इसी साल फरवरी में निधन हो गया था।
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