कुकी इनपी मणिपुर का सख्त आदेश: कुकी-ज़ो विधायक मणिपुर विधानसभा सत्र से रहें दूर, जानिए क्यों दी चेतावनी

अलग प्रशासन की मांग पूरी न होने पर KIM की कड़ी चेतावनी, विधायकों से कहा- विधानसभा सत्र से दूर रहें, नहीं तो इसे समुदाय से किनारा माना जाएगा।
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में वॉल ऑफ रिमेंबर्स के सामने अगस्त में एक प्रदर्शन के दौरान कुकी महिलाएं। (तस्वीर अगस्त 2023 की है)
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में वॉल ऑफ रिमेंबर्स के सामने अगस्त में एक प्रदर्शन के दौरान कुकी महिलाएं। (तस्वीर अगस्त 2023 की है)फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
Published on

इम्फाल: कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने अपने विधायकों के लिए एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया है। संस्था ने कुकी-ज़ो समुदाय के सभी विधायकों से बुधवार, 2 सितंबर से शुरू हो रहे मणिपुर विधानसभा के आगामी सत्र में हिस्सा न लेने की अपील की है।

यह विधानसभा सत्र 7 सितंबर तक चलने वाला है। इस पूरी अवधि के दौरान सदन की कुल तीन बैठकें आयोजित की जानी हैं। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल इस समुदाय से नौ विधायक आते हैं। इनमें से छह विधायक सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े हैं।

मंगलवार, 1 सितंबर को जारी एक विस्तृत बयान में केआईएम ने स्पष्ट किया कि विधायी कार्यवाही के फिर से शुरू होने को किसी भी कीमत पर हालात सामान्य होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। संस्था का साफ तौर पर कहना है कि उनके समुदाय के लिए एक अलग राजनीतिक प्रशासन की जो मांग उठाई गई थी, उसका अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

अपने इस बयान में संगठन ने कुकी-ज़ो विधायकों को समुदाय के साथ पूर्ण एकजुटता प्रदर्शित करने की हिदायत दी है। इसके साथ ही यह गंभीर चेतावनी भी दी गई है कि जो भी नेता इस निर्देश की अनदेखी करेगा, यह मान लिया जाएगा कि वह समुदाय के सामूहिक राजनीतिक रुख और उनके संघर्ष से किनारा कर रहा है।

केआईएम ने कहा कि इस बेहद संवेदनशील और नाजुक मोड़ पर कुकी-ज़ो विधायकों को पूरी मजबूती के साथ अपनी जनता के समर्थन में खड़ा होना चाहिए। संस्था के अनुसार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कभी भी लोगों की वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

संगठन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब तक समुदाय के हित में कोई ठोस राजनीतिक समझौता या समाधान नहीं हो जाता, तब तक पुरानी सामान्य व्यवस्था की ओर लौटना असंभव है। मई 2023 में भड़के भीषण जातीय संघर्ष के बाद से ही इस समुदाय ने भारी नुकसान और पीड़ा का सामना किया है।

गौरतलब है कि मणिपुर में साल 2022 के विधानसभा चुनावों में कुल 10 कुकी-ज़ो नेताओं ने जीत दर्ज की थी। उस समय चुने गए इन 10 नेताओं में से सात विधायक अकेले बीजेपी के टिकट पर जीतकर आए थे। हालांकि, इन निर्वाचित नेताओं में से एक, वुन्ज़ागिन वाल्टे का जीवन के लिए एक लंबे संघर्ष के बाद इसी साल फरवरी में निधन हो गया था।

मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में वॉल ऑफ रिमेंबर्स के सामने अगस्त में एक प्रदर्शन के दौरान कुकी महिलाएं। (तस्वीर अगस्त 2023 की है)
MP: रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची मिली, चीटियां काटती रहीं, 3-4 घंटे बारिश के पानी में पड़ी रही
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में वॉल ऑफ रिमेंबर्स के सामने अगस्त में एक प्रदर्शन के दौरान कुकी महिलाएं। (तस्वीर अगस्त 2023 की है)
TM Special | जिस यूनिवर्सिटी को बचपन में स्कूल के बाहर से देखा, वहीं मिला गोल्ड मेडल; एक दलित युवा की शिक्षा, संघर्ष और सपनों की कहानी
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में वॉल ऑफ रिमेंबर्स के सामने अगस्त में एक प्रदर्शन के दौरान कुकी महिलाएं। (तस्वीर अगस्त 2023 की है)
वर्धा विवि: FIR के बाद 6 दलित-पिछड़े छात्रों पर प्रवेश प्रतिबंध, सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com