MP: रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची मिली, चीटियां काटती रहीं, 3-4 घंटे बारिश के पानी में पड़ी रही

बम्हौरी के डुंगरिया खुर्द गांव की घटना, चरवाहे ने रोने की आवाज सुनकर बच्ची को झाड़ियों के बीच से निकाला; शरीर पर कटीली झाड़ियों के चोट के निशान, एसएनसीयू में भर्ती
MP: रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची मिली, चीटियां काटती रहीं, 3-4 घंटे बारिश के पानी में पड़ी रही
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भोपाल। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। बम्हौरी तहसील के डुंगरिया खुर्द गांव के जंगल में मंगलवार सुबह एक नवजात बच्ची कटीली झाड़ियों और बारिश के पानी के बीच पड़ी मिली। बच्ची करीब 3 से 4 घंटे तक जंगल में पड़ी रही। इस दौरान चीटियां उसे काटती रहीं। कटीली झाड़ियों के कारण उसके शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं।

रोने की आवाज सुनकर जंगल में पहुंचा चरवाहा

मंगलवार सुबह करीब 7 बजे एक चरवाहा जंगल में पशु चरा रहा था। इसी दौरान उसे बच्ची के रोने की तेज आवाज सुनाई दी। आवाज का पीछा करते हुए वह कटीली झाड़ियों के पास पहुंचा। वहां पानी के बीच एक नवजात बच्ची पड़ी थी।

चरवाहे ने आसपास देखा, लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद उसने तत्काल आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सूचना दी।

पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से बच्ची को निकाला

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से बच्ची को कटीली झाड़ियों और पानी के बीच से बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे उपचार के लिए बम्हौरी उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

बच्ची की हालत गंभीर होने पर उसे सिलवानी अस्पताल रेफर किया गया। यहां से उसे रायसेन जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे एसएनसीयू में भर्ती कर लिया।

भूखी और कमजोर मिली नवजात

जिला अस्पताल के एसएनसीयू प्रभारी डॉ. आलोक राय ने बताया कि बच्ची के शरीर पर कटीली झाड़ियों से चोट के निशान हैं। बारिश के पानी में काफी देर तक पड़े रहने के कारण उसका शरीर अकड़ गया था। बच्ची भूखी और कमजोर भी थी।

फिलहाल उसका एसएनसीयू में इलाज चल रहा है। डॉक्टर अगले 3 से 4 दिन तक बच्ची की लगातार निगरानी करेंगे।

जन्म के कुछ घंटे बाद जंगल में छोड़ने की आशंका

डॉक्टर के अनुसार बच्ची का जन्म मंगलवार सुबह करीब 5 बजे हुआ होगा। ऐसे में आशंका है कि जन्म के कुछ समय बाद ही उसे जंगल में छोड़ दिया गया। बच्ची लगभग 3 से 4 घंटे तक झाड़ियों और बारिश के पानी के बीच पड़ी रही।

घना जंगल होने के कारण इस दौरान बच्ची की जान को जंगली जानवरों से भी खतरा था।

अज्ञात माता-पिता की तलाश में जुटी पुलिस

बम्हौरी थाना प्रभारी प्रीतम सिंह राजपूत ने बताया कि बच्ची जिस स्थान पर मिली है, वह घना जंगल है और वहां जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर नवजात को छोड़ना उसकी जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था।

पुलिस ने अज्ञात माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के गांवों में पूछताछ के साथ जंगल और आसपास के इलाकों में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

बाल कल्याण समिति ने अस्पताल पहुंचकर ली जानकारी

नवजात बच्ची के जिला अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलने के बाद बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता पटेल अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने डॉक्टरों से बच्ची की हालत और इलाज के संबंध में जानकारी ली।

समिति ने बच्ची की देखरेख और मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। फिलहाल बच्ची एसएनसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में है। वहीं पुलिस नवजात को जंगल में छोड़ने वाले माता-पिता की पहचान करने में जुटी हुई है।

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